CEC नियुक्ति में PM, LoP के साथ CJI भी हों शामिल, Owaisi ने मौजूदा चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की अपनी मांग दोहराई और मौजूदा चयन प्रक्रिया को सबसे बड़ी समस्या बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत, चयन समिति में प्रधानमंत्री अध्यक्ष के तौर पर, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
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6 अक्टूबर को हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि AIMIM इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं वहां नहीं गया क्योंकि मैं उस (गठबंधन) का हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम? मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया गलत है। यह पूरी तरह से एग्जीक्यूटिव के पक्ष में है। इस प्रक्रिया को बदलने की जरूरत है। मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन सबसे बड़ी समस्या है। यह गलत है; इसे ठीक किया जाना चाहिए।
ओवैसी ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) की भी आलोचना की और इसे "पिछले दरवाजे से NRC" करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान भी मैंने आवाज उठाई थी। मेरी मांग है कि CEC के चयन के कानून को बदला जाए। CJI, PM और LoP से चयन करवाया जाए। यह SIR गलत है। मेरा मानना है कि SIR पिछले दरवाजे से NRC है। पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं—खासकर चयन पैनल से CJI को हटाने के मामले—को पांच जजों की बड़ी बेंच के पास भेजने या न भेजने पर बंटा हुआ फैसला सुनाया।
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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच की इस मुद्दे पर अलग-अलग राय थी। जस्टिस दत्ता ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग को खारिज कर दिया, जबकि जस्टिस शर्मा का मानना था कि इस मुद्दे पर संविधान बेंच को विचार करना चाहिए। बेंच ने सर्वसम्मति से निर्देश दिया कि मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के सामने रखा जाए ताकि वे उचित संख्या वाली संविधान बेंच के गठन पर विचार कर सकें। बेंच ने कहा कि इस सवाल को पहले तीन जजों की बेंच के पास भेजने से कार्यवाही में बेवजह देरी होगी।
BrahMos Launcher और फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस होंगे Indian Navy के जहाज, ₹661.50 करोड़ की डील
रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को नई दिल्ली में 'बाय (इंडियन-IDDM)' कैटेगरी के तहत भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए। रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, 661.50 करोड़ रुपये मूल्य का यह कॉन्ट्रैक्ट रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में साइन किया गया। कम से कम 68% स्वदेशी सामग्री (indigenous content) वाले इस प्रोजेक्ट से MSME सहित विभिन्न भारतीय उद्योगों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से तीन साल की अवधि में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और रक्षा क्षमताओं को भी मजबूत करता है और एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी को स्वदेशी बनाने की चल रही कोशिशों में एक अहम पड़ाव है।
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कई फ्रंटलाइन युद्धपोतों पर लगा ब्रह्मोस सिस्टम, समुद्री हमलों के लिए भारतीय नौसेना का मुख्य सतह-से-सतह पर मार करने वाला मिसाइल (SSM) सिस्टम है। यह हथियार सिस्टम सुपरसोनिक स्पीड से बहुत दूर मौजूद ज़मीनी और समुद्री ठिकानों को एकदम सटीक निशाना बनाने में सक्षम है। इससे पहले 1 अक्टूबर को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि ब्रह्मोस भारत के बढ़ते एक्सपोर्ट का एक अहम उदाहरण है, जिसका एक्सपोर्ट 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया और वियतनाम समेत दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों को यह हाई-एंड स्ट्रैटेजिक सिस्टम बेचने के लिए कॉन्ट्रैक्ट या समझौते हुए हैं।
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ANI को दिए एक इंटरव्यू में सिंह ने कहा कि इस मिसाइल का एयर-लॉन्च वर्शन भी है और सुखोई विमानों पर यह बहुत सफल रहा है। फिलीपींस को लगभग 330 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कीमत का ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम सौंपा जा चुका है। रक्षा सचिव ने कहा कि वियतनाम के लिए शुरुआती एक्सपोर्ट लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर और इंडोनेशिया के लिए लगभग 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का होना चाहिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ब्रह्मोस को सिर्फ़ एक मिसाइल नहीं, बल्कि देश की बढ़ती स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक बताया था। इस मिसाइल में पारंपरिक वॉरहेड और एडवांस्ड गाइडेड सिस्टम है और यह सुपरसोनिक स्पीड से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है। स्पीड, सटीकता और ताकत का यह कॉम्बिनेशन ब्रह्मोस को दुनिया के बेहतरीन सिस्टम में से एक बनाता है।
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