Middle East Tension: हूतियों का फिर से सऊदी अरब पर हमला, मक्का-मदीना शहर को भी बना चुके हैं निशाना
Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में युद्ध का दौर जारी है. एक ओर जहां अमेरिका और इजराइल ईरान को निशाना बना रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब को निशाना बना रहे हैं. अब एक बार फिर हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमला कर दिया है. सऊदी अरब के जजान और नजरान स्थित हवाईअड्डों को सोमवार को दो अलग-अलग हमलों में निशाना बनाया गया. सऊदी विमानन प्राधिकरण की मानें तो हमलों में तीन लोग घायल हो गए हैं. हमले में सऊदी को अधिक नुकसान नहीं हुआ है.
हूती विद्रोहियों के खिलाफ यमनी सेना ने खोला मोर्चा
यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है, जब सऊदी समर्थित यमन सरकार की सेना ने हूती विद्रोहियों सैन्य अभियान तेज कर दिया है. यमनी सेना के समर्थन में सऊदी सरकार ने हवाई हमलों को काफी तेज कर दिया है. इस वजह से हूती विद्रोही सऊदी अरब के हवाईअड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिया है.
यमनी सैनिकों ने रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास के इलाकों पर दोबारा कब्जा कर लिया है. सेना अब मोचा की ओर बढ़ रही है, जिस वजह से हूती विद्रोहियों पर दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है.
हवाई अड्डों पर नुकसान का आकलन
सऊदी अरूब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बताया कि वह किंग अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नजरान इंटरनेशनल हवाईअड्डों पर हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है. प्राधिकरण ने कहा कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और देश की सिविल एविएशन सिस्टम को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं.
हूतियों ने सऊदी की इन जगहों को निशाना बनाया
हूती विद्रोही ने दावा किया कि उन्होंने आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, खमीस मुशायत स्थित एक सैन्य अड्डे और राबिघ में अरामको की तेल रिफाइनरी पर मिसाइल से अटैक किए. हमलों में सऊदी-हूती संघर्ष और गहरा गया है. इसका असर, अब यमन की सीमाओं से बाहर निकलकर सऊदी अरब के सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर साफ दिखाई दे रहा है.
मक्का पैक्ट की बातें उठीं
सऊदी में संघर्ष के तेज होने के बीच, मक्का रक्षा समझौते की बातें फिर बढ़ गईं हैं, जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये अपने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं.
2036 ओलिंपिक मेजबानी की रेस में भारत समेत 7 देश:अहमदाबाद के नाम पर दांव; 2027 में शॉर्टलिस्टिंग, 2029 में होगा फैसला
लॉस एंजिल्स 2036 ओलिंपिक की मेजबानी की रेस में भारत समेत 7 देश शामिल हैं। इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की। भारत के अलावा कतर, साउथ कोरिया, जर्मनी, हंगरी, तुर्किये और साउथ अफ्रीका ने मेजबानी में रुचि जताई है। भारत ने अहमदाबाद को ओलिंपिक शहर चुना है। अहमदाबाद को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भी करनी है। अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम नरेंद्र मोदी स्टेडियम मौजूद है। IOA भारत की दावेदारी आगे बढ़ा रहा 2036 ओलिंपिक के लिए भारत की दावेदारी इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) के जरिए आगे बढ़ रही है। IOA ने IOC को लेटर ऑफ इंटेंट सौंपा है। 31 अक्टूबर 2026 तक दूसरे देश भी अपनी रुचि जता सकते हैं। इसके बाद मार्च 2027 में IOC एग्जीक्यूटिव बोर्ड उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट तय करेगा। चुने गए देशों के प्रस्तावों में वेन्यू, फाइनेंस, गवर्नेंस और आयोजन क्षमता का आकलन होगा। इसके बाद उम्मीदवारों को अपनी योजनाएं तैयार कर IOC के सामने पेश करने का समय मिलेगा। 2036 ओलिंपिक के मेजबान का फैसला 2029 के मध्य में IOC सेशन में वोटिंग से होगा। इस बार रेस क्यों अलग है? 2036 ओलिंपिक के लिए IOC ने ब्रिस्बेन 2032 की तुलना में ज्यादा खुली और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाई है। IOC अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने जून 2025 में पद संभालने के बाद पिछली फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया को रोक दिया। अब IOC सदस्य कई उम्मीदवारों में से मेजबान चुनेंगे। नई प्रक्रिया में सिर्फ बड़े या महंगे प्रोजेक्ट के बजाय एथलीटों को केंद्र में रखकर यह देखा जाएगा कि प्रस्तावित शहर खिलाड़ियों के लिए कितना बेहतर गेम्स अनुभव दे सकता है। भारत के सामने कौन-कौन? 2036 ओलिंपिक की रेस में भारत के अलावा कतर, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, हंगरी और तुर्किये हैं। भारत के लिए सिर्फ 2036 नहीं, 2030 भी अहम भारत की 2036 ओलिंपिक की दावेदारी के साथ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भी अहम हैं। भारत ने अहमदाबाद को केंद्र बनाकर 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की औपचारिक दावेदारी पेश की है। अगर मेजबानी मिलती है, तो इन खेलों के जरिए भारत को बड़े बहु-खेल आयोजन की अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। IOA ने इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव भी जमा किया है। अहमदाबाद में बड़े खेल आयोजनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग सुविधाओं की तैयारियों की भी समीक्षा हो रही है। मई 2026 में कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रस्तावित ओलिंपिक से जुड़े खेल ढांचे को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी। भारत ने पेरिस ओलिंपिक में 6 मेडल जीते थे...
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