Responsive Scrollable Menu

विकास दुबे एनकाउंटर की 'कड़वाहट' से 2027 की ब्राह्मण राजनीति तक... गोपी कृष्ण पांडेय पर BJP का दांव क्यों?

Gopi Krishna Pandey: क्या साल 2020 में कानपुर के विकास दुबे एनकाउंटर की काट है बीजेपी का गोपी कृष्ण पांडेय को राज्यसभा भेजना? क्या विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद कानपुर और उससे सटे इलाके में ब्राह्मण वोटर्स बीजेपी से नाराज हैं? जानिए गोपी कृष्ण पांडेय की राज्यसभा एंट्री के पीछे पीएम मोदी से दोस्ती या फिर कुछ और?

Continue reading on the app

शिवसेना चुनाव चिह्न विवाद, सुप्रीम कोर्ट बोला- दलबदल संवैधानिक पाप:चुनाव आयोग दोनों को अलग-अलग निशान दे सकता था; 4 साल से चल रहा विवाद

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद पर सुनवाई हुई। CJI जस्टिस सूर्यकांत की बेंच एकनाथ शिंदे गुट को धनुष-बाण निशान देने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस बागची ने पूछा, “क्या चुनाव चिह्न की भावना उन लोगों के लिए लागू होगी, जिन्होंने संवैधानिक पाप किया है? या उन लोगों के लिए, जिन्होंने संवैधानिक पाप की शिकायत की है?” सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी पूछा था कि क्या चुनाव आयोग दोनों गुटों को आरक्षित धनुष-बाण निशान देने से इनकार कर सकता था। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जिन विधायकों की सदस्यता पर अयोग्यता की कार्यवाही चल रही हो, उनकी संख्या को बहुमत का सुरक्षित आधार माना जा सकता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। मामले पर बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। शिंदे गुट बोला- विधायी बहुमत के आधार पर फैसला कानूनन सही सुनवाई के दौरान शिंदे गुट ने दलीलें दी कि चुनाव आयोग का विधायी बहुमत के आधार पर फैसला लेना कानूनी रूप से सही था। नीरज किशन कौल ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने चुनाव आयोग के विधायी बहुमत की कसौटी पर भरोसा करने का बचाव किया। कौल ने कहा कि चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश के तहत यह कसौटी तय करने में कानूनी रूप से सही और प्रासंगिक है कि कौन-सा गुट राजनीतिक दल है। कौल ने एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उसमें अयोग्यता का असर जरूरी तौर पर पहले की तारीख से लागू होने की बात नहीं कही गई थी। उन्होंने कहा कि वह फैसला ऐसी स्थिति से जुड़ा था, जिसमें स्पीकर के अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने से पहले ही पार्टी में विभाजन माना गया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अयोग्यता पर फैसला उस समय की स्थिति के आधार पर किया जाए, जब याचिकाएं दायर हुई थीं। कौल ने संविधान पीठ के सुभाष देसाई मामले के फैसले का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले में विधायी बहुमत की कसौटी के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 2(1)(a) के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करते समय स्पीकर को पहले यह तय करना पड़ सकता है कि विरोधी गुटों में कौन राजनीतिक दल है। कौल के मुताबिक, स्पीकर को पार्टी के संविधान और उसके नेतृत्व से जुड़े नियमों की जांच करनी चाहिए। अगर पार्टी संविधान के अलग-अलग संस्करण सामने आएं, तो गुटों के अलग होने से पहले चुनाव आयोग के पास जमा संस्करण पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी पहलुओं की जांच के बाद कोई संवैधानिक प्राधिकारी उचित समझे, तो विधायी बहुमत की कसौटी लागू की जा सकती है। वरिष्ठ वकील ने कहा कि चुनाव चिह्न उस गुट को मिलना चाहिए, जो यह साबित करे कि वही असली राजनीतिक दल है। अगर कोई भी गुट यह दावा साबित नहीं कर पाए, तो स्थिति अलग होगी। बहुमत के आंकड़ों पर दलील कौल ने कहा कि शिंदे का समर्थन करने वाले 40 विधायक, 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीतने वाले शिवसेना के 55 विधायकों के पक्ष में पड़े कुल वोटों का 76% प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने लोकसभा के आंकड़ों का भी हवाला दिया। कौल ने कहा कि शिंदे का समर्थन करने वाले 13 सांसद, पार्टी के जीतने वाले 18 सांसदों के पक्ष में पड़े कुल वोटों का 73% प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने से चुनाव आयोग को पैराग्राफ 15 के तहत पार्टी के चुनाव चिह्न विवाद पर फैसला लेने से नहीं रोका जा सकता। कौल ने यह भी कहा कि 2019 की महाराष्ट्र विधानसभा भंग हो चुकी है। 2024 के चुनाव के बाद नया सदन बन चुका है। याचिकाओं में क्या चुनौती मुख्य याचिका उद्धव ठाकरे गुट के सुनील प्रभु ने दायर की है। इसमें महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के 10 जनवरी 2024 के फैसले को चुनौती दी गई है। स्पीकर ने दसवीं अनुसूची के तहत शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार किया था। उद्धव ठाकरे की ओर से दायर एक याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना माना गया था। इसी फैसले के तहत शिंदे गुट को पार्टी का धनुष-बाण चुनाव चिह्न भी दिया गया था।

Continue reading on the app

  Sports

रिकॉर्ड 102 खिताब... नोवाक जोकोविच चीन में बने चैंपियन, फेडरर के महारिकॉर्ड से एक कदम दूर

Novak Djokovic wins china open title seventh time: नोवाक जोकोविच ने चीनी ओपन के फाइनल में एलेक्स डी मिनौर के चोट के कारण हटने पर रिकॉर्ड सातवां खिताब अपने नाम कर लिया. इस जीत के साथ एटीपी सिंगल्स में उनके कुल 102 खिताब हो गए हैं, जो रोजर फेडरर के 103 के रिकॉर्ड से मात्र एक कदम दूर हैं. चीन ओपन में अपना अजेय रथ 34-0 पर पहुंचाने वाले जोकोविच का यह लगातार 21वां साल है जब उन्होंने कम से कम एक सिंगल्स खिताब अपने नाम किया है. Tue, 6 Oct 2026 20:17:28 +0530

  Videos
See all

Congress Protest News : आकाशवाणी भवन खाली कराया गया, राहुल-प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में लिया #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-06T15:07:58+00:00

Rahul Gandhi Detained:राहुल गांधी को आकाशवाणी से हिरासत में लिया गया #shorts #rahulgandhi #Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-06T15:05:16+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers