2036 ओलिंपिक मेजबानी की रेस में भारत समेत 7 देश:अहमदाबाद के नाम पर दांव; 2027 में शॉर्टलिस्टिंग, 2029 में होगा फैसला
लॉस एंजिल्स 2036 ओलिंपिक की मेजबानी की रेस में भारत समेत 7 देश शामिल हैं। इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की। भारत के अलावा कतर, साउथ कोरिया, जर्मनी, हंगरी, तुर्किये और साउथ अफ्रीका ने मेजबानी में रुचि जताई है। भारत ने अहमदाबाद को ओलिंपिक शहर चुना है। अहमदाबाद को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भी करनी है। अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम नरेंद्र मोदी स्टेडियम मौजूद है। IOA भारत की दावेदारी आगे बढ़ा रहा 2036 ओलिंपिक के लिए भारत की दावेदारी इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) के जरिए आगे बढ़ रही है। IOA ने IOC को लेटर ऑफ इंटेंट सौंपा है। 31 अक्टूबर 2026 तक दूसरे देश भी अपनी रुचि जता सकते हैं। इसके बाद मार्च 2027 में IOC एग्जीक्यूटिव बोर्ड उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट तय करेगा। चुने गए देशों के प्रस्तावों में वेन्यू, फाइनेंस, गवर्नेंस और आयोजन क्षमता का आकलन होगा। इसके बाद उम्मीदवारों को अपनी योजनाएं तैयार कर IOC के सामने पेश करने का समय मिलेगा। 2036 ओलिंपिक के मेजबान का फैसला 2029 के मध्य में IOC सेशन में वोटिंग से होगा। इस बार रेस क्यों अलग है? 2036 ओलिंपिक के लिए IOC ने ब्रिस्बेन 2032 की तुलना में ज्यादा खुली और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाई है। IOC अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने जून 2025 में पद संभालने के बाद पिछली फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया को रोक दिया। अब IOC सदस्य कई उम्मीदवारों में से मेजबान चुनेंगे। नई प्रक्रिया में सिर्फ बड़े या महंगे प्रोजेक्ट के बजाय एथलीटों को केंद्र में रखकर यह देखा जाएगा कि प्रस्तावित शहर खिलाड़ियों के लिए कितना बेहतर गेम्स अनुभव दे सकता है। भारत के सामने कौन-कौन? 2036 ओलिंपिक की रेस में भारत के अलावा कतर, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, हंगरी और तुर्किये हैं। भारत के लिए सिर्फ 2036 नहीं, 2030 भी अहम भारत की 2036 ओलिंपिक की दावेदारी के साथ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भी अहम हैं। भारत ने अहमदाबाद को केंद्र बनाकर 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की औपचारिक दावेदारी पेश की है। अगर मेजबानी मिलती है, तो इन खेलों के जरिए भारत को बड़े बहु-खेल आयोजन की अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। IOA ने इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव भी जमा किया है। अहमदाबाद में बड़े खेल आयोजनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग सुविधाओं की तैयारियों की भी समीक्षा हो रही है। मई 2026 में कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रस्तावित ओलिंपिक से जुड़े खेल ढांचे को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी। भारत ने पेरिस ओलिंपिक में 6 मेडल जीते थे...
सीएम डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योगपतियों के साथ करेंगे वन-टू-वन बैठक, निवेश संभावनाओं पर होगी चर्चा
मध्यप्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में प्रमुख उद्योगपतियों और उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करेंगे।लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस में आयोजित निवेश संवाद के दौरान मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। इस दौरान प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों, औद्योगिक संभावनाओं और उद्योगों की जरूरतों पर चर्चा होगी।
इस दौरान उद्योगपतियों की निवेश योजनाओं और उनकी आवश्यकताओं को समझने पर विशेष ध्यान रहेगा। इसके जरिए संभावित निवेश प्रस्तावों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक क्षेत्रों और सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
उद्योगपतियों से करेंगे सीधा संवाद
मुंबई में होने वाले संवाद का मुख्य फोकस निवेशकों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करना रहेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव उद्योगपतियों के साथ व्यक्तिगत बैठकों में उनके निवेश प्रस्तावों और कारोबारी जरूरतों को समझेंगे। इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। इसमें प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश सुविधाओं, अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी उद्योग समूहों के सामने रखी जाएगी।
लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अधोसंरचना को किया जाएगा रेखांकित
निवेशकों के सामने मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति और देश के प्रमुख बाजारों से उसकी कनेक्टिविटी को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। सरकार का जोर लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लेकर उपलब्ध संभावनाओं पर रहेगा।
निवेशकों को उद्योग स्थापित करने के लिए उपलब्ध सुविधाओं और आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधे संवाद का माध्यम तैयार करना है।
जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले संपर्क अभियान
मुंबई का निवेश संवाद जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। मध्यप्रदेश सरकार समिट से पहले देश और विदेश के प्रमुख निवेशकों से संपर्क कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उद्योगपतियों के साथ बैठकें इसी संपर्क अभियान का हिस्सा हैं।
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