UP के 1.28 लाख शिक्षामित्रों के लिए खुशखबरी, अक्टूबर की सैलरी में मिलेगा बढ़े हुए मानदेय का लाभ, सरकार ने जारी की राशि
उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख शिक्षामित्रों के लिए खुशखबरी है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत शिक्षामित्रों के मानदेय में 80 प्रतिशत की बढोतरी की है। राज्य सरकार ने समग्र शिक्षा के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 में कार्यरत शिक्षामित्रों के सितंबर और अक्टूबर के मानदेय के लिए 460.23 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है।
इसके तहत सितंबर के मानदेय के लिए 230.11 करोड़ तथा अक्टूबर के लिए भी 230.11 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है। संबंधित जनपदों को निर्धारित आवंटन के अनुसार भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बता दें कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के मानदेय में 8 हजार रुपए प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। इस वृद्धि के बाद शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़कर 18 हजार रुपए प्रतिमाह हो गया है। बढ़ी दर से मानदेय मिलने से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाकर उनकी आर्थिक मदद की है। सितंबर और अक्टूबर के बढ़े हुए मानदेय के लिए ₹460.23 करोड़ जारी करना बताता है कि सरकार शिक्षा मित्रों के साथ है। वहीं महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा मानदेय बढ़ने से शिक्षा मित्रों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। इससे वे स्कूल में और मन लगाकर काम करेंगे और बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी।
उमरिया RTO कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप, ऑनलाइन व्यवस्था पर उठे सवाल, नागरिकों ने कहा- बिना पैसे नहीं होता कोई काम
उमरिया आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। मंगलवार को नागरिक अपनी शिकायतें लेकर जिला परिवहन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों-कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
नागरिकों का कहना है कि ऑफिस में उन्हें अपना जरूरी काम करवाने के लिए विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऑनलाइन व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। कई कामों के लिए लंबे समय का इंतजार भी करना पड़ता है। कुछ नागरिकों ने कथित तौर पर रिश्वतखोरी के आरोप भी लगाए हैं। इसके अलावा लोगों का कहना है कि आरटीओ अधिकारी भी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते।
ऑनलाइन सेवाओं के लिए भी कार्यालय बुलाने की शिकायत
नागरिकों का कहना है कि आरटीओ कार्यालय में बिना पैसे दिए कोई काम कराना आसान नहीं है। यहां तक कि डिजिटल कार्यों के नाम पर भी संबंधित हितग्राही को कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता है, जिससे ऑनलाइन व्यवस्था और डिजिटल सुविधाओं के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लंबे समय तक नहीं होता शिकायतों निराकरण, नागरिकों का आरोप
नागरिकों का कहना है कि आरटीओ कार्यालय में वाहन संबंधी दस्तावेज, लाइसेंस और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोगों को अपनी फाइलों के निराकरण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई हितग्राहियों की फाइलें हफ्तों तक लंबित रहती हैं। लोग कार्यालय के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता। इससे न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
अधिकारियों पर 500 रुपये लेकर काम करने के आरोप
सबसे गंभीर आरोप कार्यालय में कथित लेन-देन को लेकर लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जहां सामान्य प्रक्रिया के तहत किसी काम को पूरा कराने में कई दिन लग जाते हैं, वहीं कथित तौर पर 500 रुपये देने पर अधिकारियों द्वारा संबंधित काम जल्दी कर दिया जाता है।
इन शिकायतों ने सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस मामले में अब तक आरटीओ की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उमरिया से बृजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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