यौन उत्पीड़न जांच तक विवेक भगत ने टाली अतिरिक्त DCP पदोन्नति, Delhi Police चीफ को लिखा पत्र
नयी दिल्ली, छह अक्टूबर राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार का यौन उत्पीड़न करने के आरोप का सामने कर रहे सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत ने दिल्ली पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर अपराध शाखा में जांच लंबित रहने तक उन्हें अतिरिक्त डीसीपी का कार्यभार सौंपने संबंधी आदेश को स्थगित रखने का आग्रह किया है। भगत ने पांच अक्टूबर के अपने पत्र में कहा कि अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) का कार्यभार सौंपने संबंधी एक आदेश सोमवार को जारी किया गया था। दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, एक यूट्यूबर द्वारा मेरे खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में मेरे खिलाफ लंबित जांच को देखते हुए, मैं केवल मुझसे संबंधित इस आदेश को स्थगित रखने के लिए अपनी सहमति देता हूं।
कनॉट प्लेस के उप-मंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में तैनात भगत ने पत्र पर हस्ताक्षर किए और अनुरोध किया कि केवल उनसे संबंधित आदेश को स्थगित रखा जाए। इससे पहले, दिल्ली सरकार ने देर रात कहा था कि भगत के अनुरोध पर उन्हें अतिरिक्त डीसीपी का कार्यभार सौंपे जाने के आदेश को तबतक रोका जा रहा है, जब तक कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न की पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती। भगत उन 12 ‘दानिप्स’ (दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा) अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें एडीसीपी के पद का कार्यभार सौंपने संबंधी आदेश जारी किया गया था।
सरकार ने कहा था कि इन अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने का प्रस्ताव 25 अगस्त को शुरू किया गया था और यह मौजूदा घटनाक्रम से काफी पहले का है। तीन महिला पत्रकारों ने बीते शनिवार को जंतर-मंतर पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस को शिकायतें मिल गई हैं और उन्हें आगे की जांच के लिए अपराध शाखा को भेजा गया है।
Public Mandate पचा नहीं पा रहे Rahul Gandhi, फैला रहे अराजकता, Delhi Protest पर BJP का पलटवार
इंडिया गठबंधन के सांसदों के विरोध पर भाजपा लगातार हमलावर है। इस बीच भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वे देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। राहुल गांधी दिल्ली के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक में बैठकर अराजकता फैला रहे हैं। बात बहुत साफ है: राहुल गांधी, उनकी पार्टी के अध्यक्ष और दूसरे लोग बैलेट पेपर (मतपत्र) वापस लाने की मांग कर रहे हैं। इसका मतलब है कि चूंकि वे ईमानदार तकनीक का इस्तेमाल करके चुनाव नहीं जीत सकते, इसलिए वे बूथ कैप्चरिंग के जरिए जीतना चाहते हैं।
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भाजपा सांसद ने दावा किया कि वे गांवों में दलितों और गरीबों को वोट देने से रोकना चाहते हैं, शायद बैलेट बॉक्स में स्याही डालकर और फिर जीत हासिल करके। सालों से यही उनकी रणनीति रही है। हम इसकी निंदा करते हैं। आप कई दूसरी पार्टियों के साथ सुप्रीम कोर्ट गए थे। 26 मई को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विस्तार से बताया कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया कानूनी रूप से सही है। उसी के अनुसार कार्रवाई की गई। केरल में आपके अपने गृह मंत्री ने माना कि SIR प्रक्रिया की वजह से ही आप CPM को हरा पाए। आप बंगाल में हारे, सिर्फ़ दो सीटें जीतीं। आप बिहार में हारे, सिर्फ़ दो सीटें जीतीं। आप हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में हारे। तो, आप असल में क्या चाहते हैं?
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आप जनता के जनादेश का अपमान कर रहे हैं। आप उन चुनावों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं जहां लोगों ने विजेता को वोट दिया है। राहुल गांधी किसी भी संस्था का सम्मान नहीं करते, चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो, चुनाव आयोग हो, सेना हो या कोई और संस्था... क्या मरे हुए लोगों को वोट देने की इजाज़त दी जानी चाहिए?... मैं राहुल गांधी के इस पूरे व्यवहार की कड़ी निंदा करता हूं। वे अराजकता चाहते हैं। उन्होंने पहले भी सेना प्रमुख के बारे में अपमानजनक बातें कही हैं, और आज, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मोहन भागवत जी पर उन्होंने जो बेहद शर्मनाक आरोप लगाए हैं, हम उनकी कड़ी से कड़ी निंदा करते हैं। राहुल गांधी अराजकतावादी हैं; वे गैर-जिम्मेदार हैं। आपके इस व्यवहार को देखते हुए देश की जनता आपको कभी नहीं चुनेगी; इस बात का यकीन रखिए। हम इसकी पुरज़ोर निंदा करते हैं।
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मंगलवार को नई दिल्ली में संसद मार्ग से चुनाव आयोग के हेडक्वार्टर तक INDIA गठबंधन के मार्च के दौरान काफी गहमागहमी देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, अपने समर्थकों के साथ, चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुँचने की कोशिश में आकाशवाणी भवन के परिसर में घुस गए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक पहुँचने की कोशिश में आकाशवाणी भवन के अंदर अब लगभग तीन घंटे से बैठे हैं।
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