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Explainer: सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी तो Form-6 में कैसे हुआ बदलाव? SC और चुनाव आयोग में किस बात पर विवाद?

Form 6: नए मतदाताओं के फॉर्म-6 को लेकर छिड़ा विवाद थमने की बजाय हर दिन नया मोड़ लेता जा रहा है. बीते 48 घंटों में इस मामले में तीन बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, चुनाव आयोग का पलटवार और कांग्रेस का सड़क पर प्रदर्शन शामिल है. आइए आपको इस विषय पर अब तक क्या-क्या हुआ है पूरी डिटेल में बताते हैं.

फॉर्म-6 विवाद की शुरुआत कहां से हुई थी?

SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ दिया था, जिसमें नए आवेदकों को अपने या अपने माता-पिता, दादा-दादी के नाम पिछली मतदाता सूची में खोजकर बताने होते थे. इससे खासकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं को पुराना पारिवारिक रिकॉर्ड जुटाने में भारी दिक्कत आ रही थी. आयोग के अंदर ही दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर आपत्ति जताई थी. ये एडिशनल पत्र ही विवाद की जड़ बनकर सामने आया. दिल्ली, राजस्थान फिर मुंबई समेत अब धीरे-धीरे खासकर युवाओं ने इसके विरोध में पूरे देश में एक आंदोलन खड़ा कर दिया है. दिल्ली के जंतर-मंतर समेत जगह जगह इस विषय पर धरने प्रदर्शन हो रहे हैं.

चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 पर क्या बड़ा कदम उठाया था?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण पीठ की 26 सितंबर की बैठक के बाद आयोग ने जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां ऑनलाइन फॉर्म-6 से यह अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया था. अब इन राज्यों में सिर्फ निर्वाचक पंजीकरण नियम 1960 के तहत तय पुराना और सरल फॉर्म-6 ही भरना होगा. उम्मीद है कि इससे युवाओं का गुस्सा शांत होगा.

फॉर्म 6 पर 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने साफ टिप्पणी की कि उसने फॉर्म-6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी. बता दें यह टिप्पणी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव आयोग पहले यह दावा करता रहा था कि यह अतिरिक्त घोषणा-पत्र बिहार SIR पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक ही जोड़ा गया था.

Form 6 विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?

कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए अलग-अलग शिकायतों पर एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है. अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर चुनाव आयोग का कोई भी फैसला नियमों के दायरे से बाहर जाकर लिया गया पाया जाता है, तो उस पर आगे कार्रवाई हो सकती है. बता दें अदालत इस विषय पर काफी गंभीर है और वह दोनों पक्षों को सुन रहा है.

चुनाव आयोग ने Form 6 विवाद पर क्या सफाई दी?

इसी बीच चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान को भ्रामक बताया, जिसमें दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में एकतरफा बदलाव किया. आयोग ने 5 अक्टूबर को 'एक्स' पर फैक्ट-चेक पोस्ट जारी कर कहा कि बिहार में SIR कराने का 24 जून 2025 का आदेश आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था और इसे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में सही भी ठहराया था.

Form 6 विवाद पर आयोग और सुप्रीम कोर्ट की बातों में इतना फर्क क्यों है?

आयोग का कहना है कि उसने मूल वैधानिक फॉर्म-6 में कोई कानूनी बदलाव नहीं किया, बल्कि सिर्फ SIR प्रक्रिया के लिए एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी थी, जिसे अदालत के बिहार SIR वाले फैसले से जायज बताया जा रहा था. जबकि सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी यह कहती दिख रही है कि उसने इस बदले हुए या संशोधित स्वरूप को सीधे तौर पर कभी मंजूरी नहीं दी. यानी दोनों पक्षों की व्याख्या में बड़ा अंतर है और यही अब अदालत में तय होना बाकी है.

कांग्रेस ने Form 6 विवाद पर क्या बड़ा कदम उठाया?

कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी ने गांधी जयंती से देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया है और इसी कड़ी में 6 अक्टूबर को बिहार के गया में बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग के फैसले नियमानुसार सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए, जबकि यहां ऐसा नहीं हुआ।

क्या चुनाव आयोग पहले भी ऐसे आरोपों से घिर चुका है?

हाल के महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग के भीतर 'सत्ता के केंद्रीकरण' के आरोप लगते रहे हैं। इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर हो चुकी है, जिसमें आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं.

आम मतदाता के लिए इसका व्यावहारिक मतलब क्या है?

फिलहाल जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाताओं को पुराने जटिल पारिवारिक ब्योरे से राहत मिल चुकी है. लेकिन यह पूरा मामला अब सिर्फ प्रशासनिक राहत का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह तय करने वाला कानूनी विवाद बन चुका है कि आखिर चुनाव आयोग को वैधानिक फॉर्म में बदलाव करने का अधिकार किस हद तक है.

आगे क्या होने की उम्मीद है?

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को एक हफ्ते के भीतर जवाब देना है. ऐसे में अगली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि आयोग का फैसला कानूनी तौर पर कितना टिकाऊ है और क्या आगे चलकर फॉर्म-6 की पूरी प्रक्रिया में कोई और बड़ा बदलाव करना पड़ता है.

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प्रेमानंद महाराज के आश्रम में ड्रग्स का खेल ? प्राइवेट पार्ट कटने के बावजूद 4 मंजिल कैसे चढ़ गए रसिक दुलारी

प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की रहस्यमयी मौत की जांच में ड्रग्स एंगल सामने आया है. CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और टॉक्सिकोलॉजी जांच के आधार पर मथुरा पुलिस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

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  Sports

SA20 Auction से पहले Sourav Ganguly बोले, Pretoria Capitals का कोर मजबूत, भरेंगे 5 स्लॉट

SA20 सीज़न के लिए होने वाले खिलाड़ियों के ऑक्शन से पहले, प्रिटोरिया कैपिटल्स के हेड कोच सौरव गांगुली ने टीम के बारे में बात करते हुए कहा कि टीम का कोर मज़बूत स्थिति में है और अभी भी पांच जगहें खाली हैं, इसलिए वे यह जानते हुए ऑक्शन में जा रहे हैं कि उन्हें किन खिलाड़ियों की ज़रूरत है। SA20 के अहम पांचवें सीज़न से पहले, 7 अक्टूबर को होने वाली नीलामी में 19 खाली जगहों के लिए 95 दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेटर और 61 विदेशी स्टार खिलाड़ी बोली का हिस्सा बनेंगे।

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नीलामी के लिए कुल 789 खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन बाद में इस लिस्ट को छोटा करके 156 खिलाड़ियों तक सीमित कर दिया गया। यह नीलामी अब दक्षिण अफ़्रीका के स्पोर्ट्स कैलेंडर के सबसे चर्चित इवेंट्स में से एक बन गई है। टीम के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, गांगुली ने कहा कि पिछले सीज़न में हम फ़ाइनल में पहुँचे थे, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। इस बार हम और मज़बूत होकर लौटे हैं। फ़िल सॉल्ट वापस आ गए हैं और हमने उन खिलाड़ियों को भी रिटेन किया है जिन्होंने हमारे लिए अच्छा प्रदर्शन किया — डेवाल्ड ब्रेविस, केशव महाराज, लुंगी एनगिडी।

उन्होंने आगे कहा कि इसमें आंद्रे रसेल और शेरफ़ेन रदरफ़ोर्ड की आक्रामक क्षमता और कुछ बेहतरीन घरेलू टैलेंट को जोड़ लें, तो हमारी कोर टीम मज़बूत स्थिति में है। अभी भी पाँच जगहें खाली हैं और हम नीलामी में यह अच्छी तरह जानते हुए जाएँगे कि हमें किन खिलाड़ियों की ज़रूरत है। प्रिटोरिया कैपिटल्स 2023 और 2026 के सीज़न में फ़ाइनल तक पहुँची, लेकिन दोनों ही बार सनराइजर्स ईस्टर्न केप से हार गई। बाकी दो मौकों पर, वे छह टीमों में से पाँचवें स्थान पर रहीं और प्लेऑफ़ में जगह नहीं बना पाईं।

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पिछले साल के मुकाबले यह नीलामी छोटी होगी, क्योंकि ज़्यादातर टीमों ने पिछले सीज़न वाले अपने मुख्य खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखा है। डरबन सुपर जायंट्स और पार्ल रॉयल्स ने पहले ही अपनी 19 खिलाड़ियों की टीम पूरी कर ली है और वे नीलामी में हिस्सा नहीं लेंगी। इसमें ज़्यादा से ज़्यादा 2.11 मिलियन USD खर्च किए जाएंगे, और जोबर्ग सुपर किंग्स और MI केप टाउन को छह-छह स्लॉट भरने होंगे। JSK के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसिस, ऑलराउंडर वियान मुल्डर, तेज़ गेंदबाज़ नैंड्रे बर्गर और अनुभवी टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़ रैसी वैन डेर डुसेन जैसे बड़े दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ियों पर चार टीमों की नज़र होगी। फ़्रैंचाइज़ी क्रिकेट में डु प्लेसिस की दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है; हाल ही में इस अनुभवी खिलाड़ी ने यूरोप में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में टॉप किया है।
 

Tue, 06 Oct 2026 18:38:00 +0530

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