पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला खनन मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक बार फिर एक्शन मोड में है। मंगलवार सुबह से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी जारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में कोयले के कथित अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू की है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय की टीमें राज्य के लगभग 10 विभिन्न परिसरों की तलाशी ले रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस छापेमारी के केंद्र में राज्य पुलिस के अधिकारी मनोरंजन मंडल हैं। मनोरंजन मंडल से संबंधित परिसरों के अलावा, इस सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य संदिग्धों के घरों पर भी तलाशी ली जा रही है।
अवैध कोयला खनन व परिवहन मामले के संबंध में पश्चिम बंगाल में छापे मारे
अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस अधिकारी मनोरंजन मंडल से संबंधित परिसरों सहित लगभग 10 परिसरों की धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तलाशी ली जा रही है।
यह मामला संघीय जांच एजेंसी द्वारा जांच किए जा रहे एक अन्य कथित कोयला घोटाला मामले से अलग है, जिसमें एजेंसी ने पिछले महीने कोलकाता में राजनीतिक परामर्श कंपनी ‘आई-पैक’ के परिसर पर छापा मारा था।
अधिकारियों ने बताया कि किरण खान, शेख अख्तर, प्रबीर दत्ता, मिर्जा एच बेग समेत कुछ लोगों के घरों पर छापेमारी की जा रही है।
क्या है मुख्य आरोप?
जांच एजेंसी को संदेह है कि अवैध कोयला खनन के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई की गई और इसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध बनाने की कोशिश की गई। पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से कोयले का अवैध परिवहन किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा, इसके बदले में नई दिल्ली रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा करेगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात को वेनेजुएला और संयुक्त राज्य अमेरिका से आयात करने पर सहमत हो गए हैं। वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल भारतीय आयात का एक तिहाई से अधिक है। भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।
ट्रंप ने क्या कहा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्हें उन्होंने "अपने सबसे अच्छे दोस्तों में से एक" बताया, ने एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा। हालांकि व्यापार समझौते का पूरा विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है और अब वह अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी, जिसमें हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं!
टैरिफ घटाया
2 अप्रैल 2025 को अमेरिका ने कई भारतीय सामानों पर 26% रेसिप्रोकल टेरिफ लगाए। इसके बाद 10 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने इन टेरिफ को 90 दिनों के लिए रोक दिया। अमेरिकी आयातों पर 10% शुल्क बरकरार रखा और 31 जुलाई 2025 को ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 25% टेरिफ का ऐलान किया और इसके बाद 7 अगस्त 2025 को ट्रंप ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25% का टेरिफ लगा दिया। तो भारत पर लगातार ट्रंप की तरफ से यह टेरिफ लगाया जाता रहा। हालांकि भारत इस दरमियान काफी संयम दिखाता है। भारत के प्रधानमंत्री इन तमाम मसलों पर चुप रहते हैं। उनकी चुप्पी ट्रंप को करारा जवाब की तरह थी। आखिरकार तमाम धमकियों, तमाम चेताविनियों और बयानबाजी के बीच 2 फरवरी 2026 जी हां, यह वो ऐतिहासिक तारीख हो गई जब भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील पर साइन कर लिया है। इसके बाद ट्रंप ने भारतीय सामानों पर लगने वाले 50% टेरिफ को तत्काल प्रभाव से घटा दिया है और 18% इसे कर दिया है। ट्रंप ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी 30 मिनट की बातचीत के बाद यह फैसला हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए बड़ी जीत बताया है।
अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद
हालांकि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और इसके बदले में अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति जताई है। भारत ने अगले कुछ साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा तकनीक, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदने की प्रतिबद्धता भी दिखाई है। आपको बता दें कि दोनों देशों ने कहीं ना कहीं थोड़ा सा नरमी दिखाई है और इसके बाद जाकर ही इस डील पर सहमति बन बन पाई है। अब देखना दिलचस्प होगा क्योंकि भारत ने अभी हाल ही में ईयू के साथ ट्रेड डील किया था और इसके बाद ईयू एक बड़े मार्केट के तौर पर भारत के लिए उपलब्ध हो गया।
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