सोना ₹920 गिरकर ₹1.47 लाख पर आया:एक किलो चांदी ₹3,176 सस्ती हुई, सितंबर में सोना ₹8 हजार और चांदी ₹17 हजार गिरी थी
सोने-चांदी के दाम में आज यानी 6 अक्टूबर को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 920 रुपए गिरकर 1.47 लाख रुपए पर आ गया है। वहीं एक किलो चांदी 3,176 रुपए सस्ती होकर 2.21 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सितंबर में सोना 8 हजार और चांदी 17 हजार सस्ती हुआ इससे पहले बीते महीने यानी सितंबर में सोना 8 हजार और चांदी 15 हजार सस्ती रुपए हुई। 31 अगस्त को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था जो 30 सितंबर को 1.48 लाख रुपए पर आ गया। इसी तरह 1 किलो चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपए से गिरकर 2.20 लाख रुपए पर आ गई। क्या यह गिरावट लंबी चलेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है: ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
83% दुकानदार UPI चार्ज देने को तैयार नहीं:खर्च ग्राहकों पर डाला तो 86% लोग UPI पेमेंट नहीं करेंगे; लोकलसर्कल्स का सर्वे
83% दुकानदार 15 अक्टूबर से लगने वाला यूपीआई चार्ज भरने को तैयार नहीं हैं। वहीं, अगर दुकानदार यह खर्च ग्राहकों पर डालते हैं, तो 86% लोग UPI से पेमेंट नहीं करेंगे। ऐसे में कुल लेन-देन में 10% और पेमेंट संख्या में 4% की कमी आ सकती है। लोकलसर्कल्स ने इसे लेकर एक सर्वे किया है जिसमें ये जानकारी सामने आई है। नए नियमों के मुताबिक 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% चार्ज (MDR) लगेगा। सरकार चाहती है कि ये चार्ज दुकानदार भरे। क्या दुकानदार 0.4% फीस चुकाने के लिए तैयार हैं? लोकलसर्कल्स ने देश के 242 जिलों में 32,000 से ज्यादा कारोबारियों पर किए गए सर्वे में पाया कि कि केवल 17% मर्चेंट्स ही 0.4% MDR का बोझ उठाने के लिए तैयार हैं। दुकानदारों ने चार्ज ग्राहकों पर डाला, तो क्या होगा? 291 जिलों के 67,000 से अधिक UPI यूजर से ये सवाल किया गया। सर्वे के अनुसार 86% यूजर्स ने कहा कि वे ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट के लिए UPI छोड़कर अन्य विकल्पों को अपनाएंगे। कुल UPI मार्केट में ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शंस की कितनी हिस्सेदारी है? दुकानदारों को होने वाले कुल यूपीआई पेमेंट में ₹2,000 से बड़े पेमेंट गिनती के लिहाज से 5% से भी कम हैं। वैल्यू के लिहाज से यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाता है। दुकानों पर खर्च होने वाले कुल पैसों का लगभग 67% हिस्सा इन्हीं बड़े पेमेंट्स से आता है, जो हर महीने करीब ₹6 लाख करोड़ बैठता है। यह रकम पूरे देश में होने वाले कुल यूपीआई लेनदेन की वैल्यू का लगभग 20% है। यानी बड़े लेनदेन भले ही संख्या में कम हों, लेकिन बाजार में घूमने वाले पैसों का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं से बनता है। मर्चेंट्स फीस का बोझ कम करने के लिए क्या रास्ते निकाल सकते हैं? चूंकि 83% व्यापारी MDR देने को तैयार नहीं हैं, इसलिए वे या तो ओपनली सरचार्ज के रूप में यह शुल्क ग्राहक से वसूल सकते हैं, प्रॉडक्ट्स या सर्विसेज की कीमतों में इसे जोड़ सकते हैं, या फिर ग्राहकों को कैश/कार्ड जैसे अन्य पेमेंट मोड अपनाने के लिए कह कर सकते हैं।
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