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Allahabad HC ने UP के 4 वरिष्ठ IAS अधिकारियों पर तय किए अवमानना आरोप

लखनऊ, पांच अक्टूबर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने चार साल पहले पारित अपने एक आदेश का अनुपालन न करने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए हैं। खंडपीठ ने कहा कि इन अधिकारियों ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि 19 जुलाई 2022 के अदालत के आदेश का आंशिक रूप से भी अनुपालन किया गया है। अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि अधिकारी अदालत के आदेश का पालन करने के इच्छुक नहीं दिख रहे हैं।

न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने यह कार्रवाई सुरेश चंद्र वर्मा के मामले में 2022 में दिए फैसले के अनुपालन से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं पर की। उस फैसले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को लागू शासनादेशों के तहत लाभ देने से संबंधित आदेश निरस्त करते हुए वेतन का पुनर्निर्धारण, बकाया वेतन का भुगतान और संशोधित पेंशन भुगतान आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। चार माह में लाभ न देने पर सात प्रतिशत साधारण ब्याज देने को भी कहा गया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चार साल बीतने के बाद भी अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। जिन अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनमें वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति - लघु सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव, सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू शामिल हैं। इससे पहले, अदालत ने राज्य सरकार की अनुपालन के लिए और समय देने की अर्जी खारिज कर दी।

पीठ ने कहा कि 2022 के आदेश को विशेष अपील में बरकरार रखा गया और 13 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी। राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। पीठ ने 22 मई 2026 को महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा की ओर से दिए गए आठ सप्ताह में आदेश का अनुपालन करने के आश्वासन का भी संज्ञान लिया।

सोमवार को सुनवाई के समय पीठ ने पाया कि पूर्व आश्वासन के बाद भी अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया व उनके सहयोगी अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुनील वाजपेयी आदेश के अनुपालन का कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इस पर पीठ ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद उपरोक्त चारों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय कर दिए। वहीं लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय चौहान के खिलाफ आरोप अगली सुनवाई में तय किए जाएंगे।

सभी आरोपित अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने और 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

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यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच Delhi Police ACP Vivek Bhagat नहीं संभालेंगे ADCP का कार्यभार

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार का उत्पीड़न करने के आरोपी दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) का कार्यभार फिलहाल नहीं दिया जाएगा क्योंकि दिल्ली सरकार ने सोमवार को जारी आदेश में संशोधन करने का फैसला किया है। दिल्ली सरकार ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर देर रात एक पोस्ट में कहा कि ‘दानिप्स’ (दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा) के 12 अधिकारियों को एडीसीपी के पद का कार्यभार सौंपने संबंधी पांच अक्टूबर के आदेश में विवेक भगत के संबंध में संशोधन किया जा रहा है। इसके अनुसार, इन अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने का प्रस्ताव 25 अगस्त को शुरू किया गया था और यह मौजूदा घटनाक्रम से काफी पहले का है।

आवश्यक अनुमोदन के बाद आदेश पांच अक्टूबर को जारी किया गया। पोस्ट में कहा गया कि वर्तमान कार्यभार सौंपना एक अस्थायी व्यवस्था है, जिससे कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता। साथ ही, जिन अधिकारियों को एडीसीपी का कार्यभार सौंपा गया है, वे नियमित रूप से नियुक्त एडीसीपी द्वारा किए जाने वाले वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सकते।

इसमें कहा गया है कि हालांकि, विवेक भगत ने स्वेच्छा से अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न के मामले में जांच पूरी होने और उसके संतोषजनक रूप से निष्कर्ष तक पहुंचने तक वह वर्तमान कार्यभार स्वीकार नहीं करेंगे। पोस्ट के मुताबिक, इसके मद्देनजर पांच अक्टूबर के आदेश में संशोधन किया जा रहा है और वर्तमान कार्यभार सौंपने संबंधी आदेश शेष 11 अधिकारियों के संबंध में दोबारा जारी किया जाएगा। इससे पहले, एक आधिकारिक आदेश में भगत समेत 12 अधिकारियों को एडीसीपी का कार्यभार दिए जाने की जानकारी दी गई थी।

अधिकारियों ने इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया था है और कहा था कि इसके लिए अनुरोध बहुत पहले भेजा गया था। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त का वर्तमान कार्यभार पाने वाले 12 अधिकारियों में डॉ. विकास श्योकंद, ए वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, विवेक भगत, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता शामिल थे। तीन महिला पत्रकारों ने बीते शनिवार को जंतर-मंतर पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

पुलिस ने बताया कि उसे इस संबंध में शिकायतें मिली हैं, जिन्हें आगे की जांच के लिए अपराध शाखा को भेज दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने रविवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर कहा था कि शनिवार को नयी दिल्ली इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान, जिससे ‘‘कानून-व्यवस्था की स्थिति’’ उत्पन्न हो गई थी, तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस ने कहा था कि नयी दिल्ली जिले को उनकी शिकायतें मिली हैं और उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया है।

आरोपों के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी की मांग करते हुए संसद मार्ग थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

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  Sports

कौन रच रहा सूर्यकुमार यादव के खिलाफ साजिश? टीम इंडिया तो छोड़िए रणजी ट्रॉफी खेलने के लायक भी नहीं समझा

Ranji Trophy Mumbai Squad: मुंबई ने रणजी ट्रॉफी के आगामी सीजन के लिए अपने स्क्वॉड का ऐलान कर दिया है. सिद्धेश लाड की कप्तानी में कई अनुभवी और उभरते खिलाड़ियों को जगह मिली है, लेकिन सबसे हैरानी सूर्यकुमार यादव का नाम गायब होने पर हुई. सूर्या को सिलेक्टर्स ने पूछकर भी टीम में जगह नहीं दी. कहा गया कि उन्होंने लंबे समय से रेड बॉल फॉर्मट नहीं खेला है. Tue, 6 Oct 2026 08:11:29 +0530

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