पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी:समिक भट्टाचार्य बोले- अगले सत्र में बिल लाएगी सरकार; 1999 में ज्योति बसु सबसे पहले प्रस्ताव रखा था
पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा करने के लिए राज्य सरकार जल्द विधानसभा में बिल पेश कर सकती है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कोलकाता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिल विधानसभा के इसी सत्र में भी पेश किया जा सकता है। राज्य का नाम पश्चिम बंगा रखने का फैसला उसके इतिहास से जोड़ने के लिए किया गया है। भट्टाचार्य वाराणसी में प्रस्तावित पश्चिम बंगा भवन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अब बांग्ला या वेस्ट बंगाल जैसे नाम नहीं बोलने पड़ेंगे। पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें 1999 में शुरू हुई थीं, जब ज्योति बसु की वाम मोर्चा सरकार ने राज्य का नया नाम 'पश्चिम बंग' रखने का प्रस्ताव पेश किया था। वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने केंद्र सरकार और कूच बिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर वाराणसी में पश्चिम बंगा भवन बनाने की योजना बनाई है। यह भवन राज्य के सांस्कृतिक केंद्र के रूप में काम करेगा। यहां बंगाल से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने की सुविधा भी होगी। उन्होंने कहा कि वाराणसी का बंगाल से लंबे समय से संबंध रहा है। दोनों के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव भी है। भट्टाचार्य के मुताबिक, वहां पहला महिला कॉलेज एक बंगाली ने बनवाया था। शहर में बंगाली छात्रों के लिए कई स्कूल भी हैं। वाराणसी में बंगाली आबादी की मजबूत मौजूदगी है। कूच बिहार के राजपरिवार ने 1836 में बनारस कालीबाड़ी की आधारशिला रखी थी। इसके एक दशक बाद वहां दो मंदिर बनवाए गए थे। पुरानी इमारत को बहाल करने की कोशिश BJP नेता ने कहा कि जयपुर की पूर्व राजनेता और महारानी गायत्री देवी कूच बिहार के राजपरिवार की राजकुमारी थीं। वह पुरानी लेफ्ट फ्रंट सरकार की इमारत को बहाल करने की कोशिश का हिस्सा थीं। उन्होंने इसे लेकर व्यक्तिगत तौर पर 5 करोड़ रुपए देने की प्रतिबद्धता भी जताई थी। हालांकि, लालफीताशाही की वजह से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। भट्टाचार्य ने कहा कि TMC सरकार ने 2022 में भी ऐसा प्रयास किया था। वह कोशिश भी शुरू नहीं हो सकी। अब प्रस्तावित भवन में कॉन्फ्रेंस हॉल, लाइब्रेरी और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह होगा। यहां पार्किंग की सुविधा भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केंद्र बंगाल से आने वाले तीर्थयात्रियों के ठहरने की जगह के रूप में भी काम करेगा। वहां चार-पांच पीढ़ियों से रह रहे स्थानीय बंगालियों के सामाजिक आयोजनों के लिए जगह मिलेगी। पहले भी कई बार नाम बदलने की कोशिश पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें 1999 से चली आ रही हैं। उस समय ज्योति बसु के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट सरकार ने राज्य का नाम पश्चिम बंगा रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था। इसके बाद यह बहस हुई कि राज्य का नाम बांग्ला रखा जाए या नहीं। लेफ्ट फ्रंट सरकार ने बाद में यह सुझाव भी स्वीकार किया और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा। इसका मुख्य तर्क औपनिवेशिक दौर के नाम से छुटकारा पाना था। साथ ही, राज्य की बंगाली पहचान दिखाने वाले नाम की मांग थी। हालांकि, इस प्रक्रिया को राजनीतिक सहमति नहीं मिली। केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। 2011 में TMC के सत्ता में आने के कुछ समय बाद यह मुद्दा फिर उठा। ममता बनर्जी सरकार ने शुरुआत में पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा था। सरकार का तर्क था कि राज्यों की अंग्रेजी वर्णमाला वाली सूची में पश्चिम बंगाल नीचे आता है। इसलिए राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को बोलने के लिए अक्सर इंतजार करना पड़ता है। सरकार ने इसे कथित प्रशासनिक नुकसान बताया था। 2011 में सर्वदलीय बैठक ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी। 2016 में राज्य सरकार ने नाम बदलने की प्रक्रिया फिर शुरू की। उसने तीन नामों का प्रस्ताव दिया था—बांग्ला, बंगाल और बंगाल। इनमें बांग्ला नाम बंगाली में, बंगाल अंग्रेजी में और बंगाल हिंदी में इस्तेमाल किया जाना था। 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से बांग्ला को एकमात्र नाम बनाने का प्रस्ताव पास किया। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी। केंद्र ने कहा कि इसके लिए संविधान संशोधन जरूरी होगा। राज्य BJP के कुछ नेताओं ने बांग्ला नाम को लेकर आपत्ति जताई थी। उनकी चिंता थी कि यह नाम बांग्लादेश से मिलता-जुलता है।
GST-काउंसिल की मीटिंग 7 की जगह 8 अक्टूबर को होगी:ब्रिक्स सम्मेलन की वजह से दूसरी बार टली; GST कानून में सुधार की तैयारी
GST काउंसिल की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर के बजाय 8 अक्टूबर को होगी। काउंसिल सचिवालय के मुताबिक, कुछ जरूरी वजहों से इस बैठक की तारीख को आगे बढ़ाया गया है। यह लगातार दूसरा मौका है जब इस बैठक का शेड्यूल बदला गया है। पहले यह बैठक 12 सितंबर को होने वाली थी, लेकिन दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स समिट की वजह से इसे टालकर 7 अक्टूबर किया गया था, जिसे अब एक दिन और आगे बढ़ा दिया गया है। टैक्स अधिकारियों से छिनेगा गिरफ्तारी का अधिकार GST काउंसिल की बैठक में देश के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़े सुधारों को मंजूरी दे सकती है। नए प्रस्ताव के तहत टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लेने और फर्जीवाड़े के आपराधिक मामलों की सीमा बढ़ाने की तैयारी है। इसके अलावा, सितंबर 2025 में टैक्स दरों में बदलाव के बाद, सरकार अब नियमों को और आसान बनाकर कारोबारियों को राहत दे सकती है। जानिए इस बड़े बदलाव से जुड़ी हर जरूरी बात सवाल-जवाब में… सवाल: जीएसटी काउंसिल की बैठक में गिरफ्तारी से जुड़ा क्या बड़ा प्रस्ताव लाया जा रहा है? जवाब: नए प्रस्ताव के तहत सीजीएसटी (CGST) एक्ट की धारा 69 में संशोधन की तैयारी है। अब तक कमिश्नर लेवल की मंजूरी मिलने पर जीएसटी अधिकारी किसी व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार कर सकते थे। नए बदलाव के बाद अधिकारियों से यह पावर वापस ले ली जाएगी। अब किसी भी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट (न्यायिक मंजूरी) का आदेश अनिवार्य होगा। सवाल: क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स की सीमा में क्या बदलाव होगा? जवाब: वर्तमान में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम के मामलों में आपराधिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की व्यवस्था है। प्रस्ताव के अनुसार, क्रिमिनल केस चलाने की इस लिमिट को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की गई है। यानी ₹5 करोड़ से कम के मामलों में आपराधिक केस दर्ज नहीं होगा। सवाल: क्या रूटीन टैक्स विवादों में भी अब जेल जाना पड़ सकता है? जवाब: नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्लासिफिकेशन, वैल्यूएशन या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रूटीन विवादों को क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा। कई बार किसी एक ट्रांजैक्शन की परिभाषा को लेकर बिजनेस और टैक्स अधिकारियों की राय अलग-अलग हो सकती है, ऐसे मामलों को अब क्रिमिनल ऑफेंस नहीं माना जाएगा। सवाल: जीएसटी अधिकारियों से अरेस्ट पावर वापस लेने की मुख्य वजह क्या है? जवाब: जब 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था, तब फेक इनवॉइस और टैक्स चोरी पकड़ने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम मजबूत नहीं था। इसलिए गिरफ्तारी का डर जरूरी था। अब जीएसटी का डेटा-ड्रिवन और ऑटोमेटेड इनवॉइस-मैचिंग सिस्टम बहुत मजबूत हो चुका है। सिस्टम ही फर्जी क्रेडिट को शुरुआत में ही पकड़ लेता है। इसके अलावा, गिरफ्तार किए गए अधिकतर लोगों को कोर्ट से आसानी से जमानत मिल जाती थी और कारोबारी इसे अधिकारियों द्वारा परेशान करने का जरिया मानते थे। सवाल: अगर अरेस्ट पावर हट जाएगी, तो सरकार टैक्स की रिकवरी कैसे करेगी? जवाब: अधिकारियों की गिरफ्तारी की पावर खत्म होने का मतलब टैक्स माफी बिल्कुल नहीं है। सरकार की टैक्स वसूली, ब्याज और पेनल्टी लगाने की सिविल पावर्स पूरी तरह से बरकरार रहेंगी। छोटे और रूटीन मामलों में टैक्सपेयर बकाया टैक्स, ब्याज और पेनल्टी चुकाकर मामले का निपटारा कर सकेंगे। सवाल: क्या गंभीर धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े के मामलों में सजा की व्यवस्था खत्म हो जाएगी? जवाब: नहीं। जानबूझकर की गई बड़ी धोखाधड़ी और टैक्स चोरी के गंभीर मामलों में कोर्ट के जरिए मुकदमा चलाया जाएगा। हालांकि, सजा के प्रावधानों को भी व्यावहारिक बनाया जा रहा है। 24 में से 9 आपराधिक धाराओं को पूरी तरह खत्म करने और 11 को बरकरार रखने का प्रस्ताव है। न्यूनतम जेल की बाध्यता को हटाकर केवल जुर्माना लगाने का विकल्प भी कोर्ट को मिलेगा। साथ ही, मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा 3 साल से घटाकर 2 साल करने का प्रस्ताव है। सवाल: इस फैसले से कारोबारियों और व्यापारियों को क्या फायदा होगा? जवाब: कारोबारियों और व्यापारियों को 4 फायदे मिल सकते हैं। सवाल: टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन के काम करने के तरीके में क्या बदलाव आएगा? जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव है। अब टैक्स प्रवर्तन 'डराने-धमकाने और गिरफ्तारी' के बजाय 'टेक्नोलॉजी, डेटा और सिविल रिकवरी' पर आधारित होगा। जीएसटी अधिकारी पुलिस की तरह अरेस्ट करने के बजाय टैक्स वसूली पर ध्यान देंगे, जबकि गंभीर आपराधिक मामले जांच एजेंसियों और अदालतों के हवाले होंगे। सवाल: यह सुधार सरकार की किस बड़ी नीति का हिस्सा है? जवाब: यह कदम केंद्र सरकार के 'जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026' और आर्थिक अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने के अभियान का हिस्सा है। इससे पहले सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव (GST 2.0) कर 5%, 18% और लक्जरी सामानों के लिए 40% का स्लैब बनाया गया था। अब दूसरे फेज में एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाने पर जोर है। जानें क्या है सीजीएसटी कानून की धारा 69? जवाब: CGST कानून की धारा 69 टैक्स कमिश्नर को यह अधिकार देती है कि यदि उसके पास यह मानने का कारण हो कि किसी व्यक्ति ने निर्दिष्ट गंभीर टैक्स अपराध किए हैं, तो वह किसी अधिकारी को उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत कर सकता है। नए प्रस्ताव में इसी सीधे अधिकार को खत्म कर कोर्ट ऑर्डर से जोड़ने की बात कही गई है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 










