Mercedes-Benz की EV बिक्री 16 प्रतिशत बढ़ी, 4 नवंबर को लॉन्च होगी GLC Electric
मर्सिडीज-बेंज की इलेक्ट्रिक कारों की मांग भारत में तेजी से बढ़ती दिख रही है। कंपनी की नई सीएलए इलेक्ट्रिक को लेकर ग्राहकों का उत्साह इतना ज्यादा है कि इसकी 1,000 से अधिक पक्की बुकिंग मिल चुकी हैं। लिमिटेड आपूर्ति के कारण कुछ ग्राहकों को कार के लिए 6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है और डिलीवरी मार्च 2027 तक खिंच गई है।
बता दें कि सीएलए इलेक्ट्रिक को इस साल अप्रैल में भारतीय बाजार में उतारा गया था। इसके आने के बाद जनवरी से सितंबर 2026 के बीच मर्सिडीज-बेंज इंडिया की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 16% की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का कहना है कि अगर आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतें कम होती हैं तो अगले साल उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 20% से 25% तक पहुंच सकती है।
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष अय्यर के अनुसार, सप्लाई की परेशानी नहीं होती तो इस साल कंपनी की इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 7 से 8 प्रतिशत तक और ज्यादा हो सकती थी। इससे साफ है कि मांग की कमी के बजाय इस समय इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में सबसे बड़ी रुकावट वाहन उपलब्ध कराने की क्षमता बनी हुई है।
कंपनी ने 2026 के पहले 9 महीनों में भारत में कुल 15,190 कारें बेची हैं। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 8% ज्यादा है और कंपनी की जनवरी से सितंबर के बीच अब तक की सबसे बड़ी बिक्री है। जुलाई से सितंबर के बीच भी 5,422 कारें बिकीं, जो पिछले साल की तीसरी तिमाही से 6% ज्यादा हैं। पिछली तिमाही के मुकाबले तीसरी तिमाही की बिक्री में 17% की बढ़ोतरी हुई है।
गौरतलब है कि बिक्री बढ़ाने में नए मॉडलों के साथ लंबे पहिए वाले मॉडलों की मांग की भी बड़ी भूमिका रही। ई-क्लास, जीएलई, जीएलएस और वी-क्लास जैसे वाहनों को ग्राहकों ने पसंद किया। कंपनी के मुताबिक पुराने ग्राहक भी अपनी कार बदलने के दौरान दोबारा मर्सिडीज-बेंज खरीद रहे हैं, जिससे मांग को सहारा मिला है।
कंपनी की कुल बिक्री में मुख्य महंगे वाहन वर्ग की हिस्सेदारी करीब 60% रही। इसमें सी-क्लास, जीएलसी, जीएलई और लंबे पहिए वाली ई-क्लास प्रमुख मॉडल हैं। शुरुआती महंगे वाहन वर्ग में जीएलए और सीएलए इलेक्ट्रिक शामिल हैं, जिसकी बिक्री में 15% हिस्सेदारी रही और इसमें सालाना आधार पर 4% की बढ़ोतरी हुई।
वहीं कंपनी के सबसे महंगे वाहनों की बिक्री में 13% की वृद्धि हुई और इस वर्ग की हिस्सेदारी 25% से ज्यादा रही। मर्सिडीज-एएमजी वाहनों की बिक्री भी 18% बढ़ी। ईक्यूएस मेबैक एसयूवी की बिक्री में 68% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई इलेक्ट्रिक एस-क्लास की डिलीवरी भी अक्टूबर के मध्य से शुरू होने वाली है। इसका सबसे महंगा संस्करण इस साल के लिए बिक चुका है।
इस बीच कंपनी ने भारत में जीएलसी इलेक्ट्रिक की बुकिंग भी शुरू कर दी है। इसका बाजार में आगमन 4 नवंबर को होगा। इसे महाराष्ट्र के चाकन संयंत्र में तैयार किया जाएगा। शुरुआत में यह 400 4मैटिक संस्करण में आएगी, जिसमें 94 किलोवाट-घंटे की बैटरी और एक बार चार्ज करने पर 715 किलोमीटर तक चलने की दावा की गई क्षमता होगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार जीएलसी इलेक्ट्रिक के आने के बाद भारत में मर्सिडीज-बेंज की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सूची में सीएलए इलेक्ट्रिक, ईक्यूएस एसयूवी, ईक्यूएस मेबैक एसयूवी और जी580 भी शामिल हैं। दूसरी ओर, कंपनी की कुल बिक्री में डीजल वाहनों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 40% हो गई है, जो पहले 38% थी। ऐसे में मर्सिडीज-बेंज भारत में एक साथ इलेक्ट्रिक और पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की मांग को पूरा करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
Gujarat Rent Bill कभी लागू नहीं होगा, वकीलों की हड़ताल पर High Court में बोले महाधिवक्ता
अहमदाबाद, पांच अक्टूबर गुजरात में वकीलों ने ‘किराया विधेयक, 2026’ के विरोध में सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे कई जगहों पर अदालती कामकाज प्रभावित हुआ। वहीं, महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने उच्च न्यायालय को बताया कि यह विधेयक “कभी लागू नहीं हो पाएगा।” गुजरात विधानसभा की ओर से 11 सितंबर को पारित किराया विधेयक, 2026 को ‘गुजरात किराया, होटल और लॉजिंग हाउस दर नियंत्रण अधिनियम, 1947’ की जगह लेनी है। यह विधेयक मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों और दायित्वों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है।
हालांकि, वकीलों का कहना है कि किराया विवाद सुलझाने का काम अदालतों से हटाकर प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने से न्यायिक सुरक्षा कमजोर होगी और मुकदमा लड़ने वालों के लिए मुश्किलें पैदा होंगी। वकीलों ने लगातार तीन दिन तक विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद मामला अनसुलझा रहने के बाद हड़ताल शुरू कर दी। गुजरात उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ (जीएचसीएए) ने भी वकीलों से न्यायिक काम से दूर रहने का आह्वान किया।
अहमदाबाद में कोई भी निजी वकील उच्च न्यायालय में पेश नहीं हुआ और वकीलों के लिए बना प्रवेश द्वार बंद रखा गया। कई अदालत कक्ष में कार्यवाही जल्दी खत्म हो गई और तय मामलों को आगे की तारीख के लिए टाल दिया गया। अहमदाबाद शहर दीवानी और सत्र न्यायालय से इनकम टैक्स सर्कल तक एक बाइक रैली निकाली गई, जहां वकीलों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध-प्रदर्शन किया।
जीएचसीएए के अध्यक्ष यतिन ओझा ने कहा कि संघ ने दो दिन तक काम से दूर रहने और उसके बाद स्थिति की समीक्षा करने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि किराया विधेयक से आम लोगों को परेशानी होगी। ओझा ने राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे गए विधेयक को वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा, “गुजरात विधानसभा की ओर से पारित विधेयक जैसा कानून तो उत्तर कोरिया में भी लागू नहीं किया जाएगा।” रविवार को उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी और गुजरात बार काउंसिल के सदस्यों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई। त्रिवेदी ने उच्च न्यायालय को सोमवार को बताया कि वकीलों को अपना विरोध-प्रदर्शन वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने हड़ताल करने वाले वकीलों को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया।
त्रिवेदी ने न्यायमूर्ति एमजे शेलात की पीठ से कहा कि राज्य सरकार ने (बार काउंसिल के सदस्यों को) भरोसा दिलाया था कि वह इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाएगी और राज्यपाल से इस पर दस्तखत न करने का अनुरोध करेगी। उन्होंने कहा, “कल उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में हमारी बार काउंसिल के सभी सदस्यों के साथ बैठक हुई। सरकार ने वादा किया है कि राज्यपाल इस विधेयक पर दस्तखत नहीं करेंगे।
यह विधेयक कभी लागू नहीं होगा। हम कोशिश करेंगे कि मूल कानून को बहाल किया जाए।” त्रिवेदी ने कहा, “ऐसे हालात में, मुझे लगता है कि यह बहुत दुखद है कि समाधान होने के बाद भी हम हड़ताल कर रहे हैं।
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