निपाह वायरस की रोकथाम के लिए म्यांमार के यांगून एयरपोर्ट पर जांच कड़ी
यांगून, 2 फरवरी (आईएएनएस)। म्यांमार ने निपाह वायरस के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए यांगून अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी को कड़ा कर दिया है। सरकारी अखबार द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मौजूदा प्रकोप को देखते हुए भारत से आने वाले यात्रियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया गया कि यात्रियों की जांच में बुखार और निपाह से जुड़े अन्य लक्षणों पर खास फोकस किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच उन निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत की जा रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति पैदा कर सकने वाली संक्रामक बीमारियों के लिए लागू होते हैं।
स्वास्थ्य जागरूकता के तहत यात्रियों को जानकारी देने वाले पर्चे वितरित किए जा रहे हैं और हवाई अड्डे पर पोस्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा, हवाई अड्डे पर कार्यरत संबंधित विभागों के साथ समन्वय में रोग की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा रहे हैं।
मंत्रालय ने बताया कि इसी तरह की सख्त निगरानी और जांच व्यवस्था मांडले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी लागू की गई है।
फिलहाल म्यांमार में निपाह वायरस के किसी भी संदिग्ध मामले की पुष्टि नहीं हुई है।
निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में और कुछ मामलों में इंसान से इंसान में फैल सकती है। इसकी महामारी फैलाने की क्षमता और गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे प्राथमिकता वाले रोगजनकों की श्रेणी में रखा है।
निपाह वायरस की पहली पहचान वर्ष 1998 में मलेशिया में सुअर पालकों के बीच हुए प्रकोप के दौरान हुई थी। 1999 में मलेशिया से बीमार सुअरों के आयात के बाद सिंगापुर में भी इसका प्रकोप दर्ज किया गया। इसके बाद से मलेशिया और सिंगापुर में कोई नया मामला सामने नहीं आया। वर्ष 2001 में भारत और बांग्लादेश में निपाह वायरस संक्रमण के प्रकोप सामने आए। बांग्लादेश में तब से लगभग हर साल इसके मामले दर्ज होते रहे हैं, जबकि भारत में भी समय-समय पर विभिन्न हिस्सों में इसके प्रकोप सामने आते रहे हैं, जिनमें 2026 का ताजा मामला शामिल है।
निपाह वायरस इंसानों के बीच भी फैल सकता है। यह संक्रमण स्वास्थ्य संस्थानों में और बीमार लोगों के परिवारजनों व देखभाल करने वालों के बीच निकट संपर्क के माध्यम से फैलने की पुष्टि हो चुकी है। अस्पतालों में भीड़भाड़, खराब वेंटिलेशन और संक्रमण रोकथाम उपायों के अपर्याप्त पालन से इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
वर्तमान में निपाह वायरस संक्रमण के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत वैश्विक विकास का मुख्य इंजन बना, दुनिया की जीडीपी वृद्धि में हिस्सेदारी 17 प्रतिशत तक पहुंची : निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। भारत वैश्विक विकास का मुख्य इंजन बना हुआ है और दुनिया की जीडीपी वृद्धि में देश की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से दिया गया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि अरबपति कारोबारी एलन मस्क की ओर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का एक चार्ट शेयर किया गया था, जिसमें बताया गया था कि दुनिया की जीडीपी वृद्धि में भारत और चीन की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है।
केंद्रीय बजट 2026-27 को पेश करने के बाद संसद में छात्रों से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री ने मस्क की पोस्ट का हवाला देते हुए आईएमएफ के आंकड़ों पर बातचीत की।
चार्ट में बताया गया कि दुनिया की जीडीपी वृद्धि में चीन का योगदान 26 प्रतिशत है, जबकि भारत का योगदान 17 प्रतिशत है। एशिया की दोनों उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की जीडीपी वृद्धि में अमेरिका को पछाड़ रही हैं।
वित्त मंत्री ने बताया कि यह दिखाता है कि कैसे विश्व में आर्थिक ताकत का केंद्र धीरे-धीरे शिफ्ट हो रहा है। यह भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दिखाता है।
हालांकि, वित्त मंत्री सीतारमण ने स्वीकार किया कि चीन का योगदान वर्तमान में अधिक है, लेकिन भारत लगातार इस अंतर को कम कर रहा है और उन्होंने देश के दीर्घकालिक विकास पथ पर विश्वास व्यक्त किया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, भारत को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि वह अब अपने पड़ोसी देश के साथ वैश्विक जीडीपी वृद्धि में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीयों को अपनी अर्थव्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए, और बताया कि भारत अब वैश्विक आर्थिक विस्तार का केंद्र बिंदु है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां उसकी विकास गाथा पर दुनिया भर में ध्यान दिया जा रहा है और चर्चा हो रही है।
एलन मस्क ने वर्ल्ड ऑफ स्टैटिस्टिक्स द्वारा मूल रूप से पोस्ट किए गए चार्ट को साझा करते हुए कहा था कि वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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