हो गया तय! सपा राज्यसभा के लिए उतारेगी तीसरा उम्मीदवार, कब होगा ऐलान?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव का मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है. समाजवादी पार्टी ने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने को लेकर चल रहे सस्पेंस को लगभग खत्म कर दिया है. पार्टी विधायक रविदास मेहरोत्रा ने सोमवार को साफ कर दिया कि सपा का तीसरा प्रत्याशी 6 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेगा. नामांकन विधान भवन में सुबह 11 बजे होने की बात कही गई है.
रविदास मेहरोत्रा के मुताबिक, तीसरे उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर प्रस्तावकों के तौर पर 10 विधायकों के हस्ताक्षर भी कराए जा चुके हैं. हालांकि, उम्मीदवार का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अखिलेश यादव किस चेहरे को तीसरी सीट की लड़ाई में उतारेंगे.
तीसरे उम्मीदवार को लेकर खत्म हुआ सस्पेंस
पिछले कई दिनों से सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर लगातार अटकलें लग रही थीं. पार्टी पहले ही राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है. तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा के पास अपने दम पर पर्याप्त संख्या नहीं है, इसलिए इसका ऐलान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अब रविदास मेहरोत्रा के बयान के बाद इतना स्पष्ट हो गया है कि सपा तीसरी सीट के लिए भी चुनावी मुकाबले में उतरने जा रही है.
हालांकि, तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए केवल नामांकन करना पर्याप्त नहीं होगा. उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. यही वजह है कि उम्मीदवार के नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण इस समय उसके संभावित प्रस्तावक और समर्थक माने जा रहे हैं.
6 अक्टूबर को सामने आएगा 'सरप्राइज' नाम?
सपा नेतृत्व ने अभी तक तीसरे प्रत्याशी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है. पार्टी की ओर से पहले भी तीसरे उम्मीदवार को लेकर 'सरप्राइज' की बात कही जाती रही है.
इससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. हालांकि, आधिकारिक घोषणा से पहले किसी नाम को तय मानना उचित नहीं होगा.
सपा की रणनीति को देखते हुए ऐसा उम्मीदवार चुने जाने की संभावना पर चर्चा है जो दूसरे दलों के कुछ विधायकों को भी स्वीकार्य हो सके. आखिरकार तीसरी सीट का चुनाव संख्या बल से ज्यादा राजनीतिक प्रबंधन और प्रथम वरीयता वोटों के गणित पर निर्भर करेगा.
राज्यसभा चुनाव में क्या है गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा संख्या के हिसाब से बीजेपी नेतृत्व वाला गठबंधन सात सीटों पर मजबूत स्थिति में है, जबकि सपा-कांग्रेस खेमे के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या मानी जा रही है. असली मुकाबला दसवीं सीट को लेकर है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरा उम्मीदवार उतारने की स्थिति में विपक्षी खेमे को अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी, जबकि बीजेपी गठबंधन को आठवीं सीट के लिए भी अपने मौजूदा संख्या बल से कुछ अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है.
यही गणित इस चुनाव को सामान्य चुनाव से अलग बनाता है. यदि तीसरी सीट के लिए सीधा मुकाबला बनता है तो दोनों पक्षों को अपने-अपने खेमे के विधायकों को एकजुट रखने के साथ अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश करनी होगी.
अखिलेश यादव का 'मिलन' वाला संदेश
तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की घोषणा के बीच अखिलेश यादव का हालिया बयान भी काफी चर्चा में है. उन्होंने राज्यसभा चुनाव को 'मिलन का समय' बताते हुए कहा था कि जो पुराने साथी साथ आना चाहते हैं, उनके साथ पुरानी कड़वी बातें भुलाई जा सकती हैं.
अखिलेश ने यह भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि लोकतंत्र, संविधान और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चुनौतियां हैं तो ऐसे लोगों को साथ खड़ा होना चाहिए.
उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित से जोड़कर देखा जा रहा है. खास तौर पर इसलिए क्योंकि तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी.
हालांकि, अखिलेश यादव ने अपने बयान में किसी विशेष बीजेपी विधायक या दूसरे दल के नेता का नाम लेकर यह नहीं कहा कि वह सपा के उम्मीदवार को समर्थन देगा.
क्या बीजेपी के विधायक सपा के संपर्क में हैं?
अखिलेश यादव पहले यह दावा कर चुके हैं कि बीजेपी के कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि राजनीतिक फैसलों में समय लगता है.
अगर सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो यह दावा और महत्वपूर्ण हो जाता है. लेकिन किसी विधायक के संपर्क में होने और मतदान के समय उसके द्वारा किसी उम्मीदवार को वोट देने में अंतर होता है. इसलिए अंतिम तस्वीर मतदान के दिन ही स्पष्ट होगी.
2024 की याद फिर क्यों आ रही है?
इस चुनाव में 2024 के राज्यसभा चुनाव की घटनाओं का संदर्भ भी बार-बार सामने आ रहा है. उस चुनाव में सपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा था, लेकिन क्रॉस-वोटिंग के बाद पार्टी को झटका लगा था और बीजेपी अपना अतिरिक्त उम्मीदवार जिताने में सफल रही थी.
इसी वजह से 2026 में तीसरे उम्मीदवार का फैसला सपा के लिए केवल एक सीट का मामला नहीं माना जा रहा. यह पार्टी के विधायकों की एकजुटता और नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति की भी परीक्षा होगी.
इस बार सपा पहले से ही संभावित समर्थन जुटाने की कोशिश में दिखाई दे रही है, जबकि बीजेपी भी अपने आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए अतिरिक्त वोटों के गणित पर नजर रखे हुए है.
तीसरे उम्मीदवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
तीसरे प्रत्याशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संख्या बल की होगी. सपा के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त वोट हैं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा.
इसके लिए पार्टी को या तो दूसरे दलों के विधायकों का समर्थन हासिल करना होगा या फिर ऐसे विधायकों को अपने पक्ष में लाना होगा जो पार्टी लाइन से अलग मतदान करने का फैसला करें.
राज्यसभा चुनाव में मतदान की गोपनीयता और राजनीतिक दलों की रणनीति के बीच यह मुकाबला काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि, क्रॉस-वोटिंग की संभावना का अर्थ यह नहीं है कि वह निश्चित रूप से होगी.
अब 6 अक्टूबर पर टिकी नजर
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है. इसी दिन सपा के तीसरे उम्मीदवार का नाम सामने आने की उम्मीद है और सुबह 11 बजे विधान भवन में नामांकन की बात पार्टी विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कही है. मतदान 16 अक्टूबर को होना है.
यानी अब सस्पेंस उम्मीदवार के नाम को लेकर है, जबकि तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का फैसला लगभग स्पष्ट हो चुका है.
सपा के सामने चुनौती सिर्फ उम्मीदवार चुनने की नहीं, बल्कि उसके लिए जरूरी समर्थन जुटाने की भी है. वहीं बीजेपी के लिए भी आठवीं सीट का गणित अतिरिक्त वोटों पर निर्भर कर सकता है.
ऐसे में 6 अक्टूबर को सामने आने वाला सपा का तीसरा चेहरा इस पूरे चुनाव की रणनीति को समझने में सबसे अहम कड़ी साबित होगा. इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अखिलेश यादव ने किस राजनीतिक समीकरण को ध्यान में रखकर यह दांव चला है और मुकाबला दसवीं सीट तक किस तरह पहुंचता है.
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पीछे नहीं हटेंगे... टी20 सीरीज से पहले अकील हुसैन ने भारत को ललकारा, वैभव-अभिषेक के लिए बनाया खास प्लान
भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के शुरू होने से पहले अकील हुसैन ने कहा कि मेजबान टीम खतरनाक है, लेकिन वेस्टइंडीज पीछे नहीं हटेगी. अकील हुसैन सीरीज में भारतीय टीम को मुश्किल में डालने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हाल ही में दोनों टीमों के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज खेली गई थी, जिसमें भारत ने 2-1 से जीत हासिल की थी.
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