राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई फटकार, कहा- 'आपकी सही जगह जेल है...', दिया सिर्फ 24 घंटे का अल्टीमेटम
Rajpal Yadav Cheque Counce Case: बॉलीवुड एक्टर राजपाल (Rajpal Yadav) यादव लंबे से चेक बाउंस केस को लेकर कानूनी पचड़े में फंसे हुए हैं. उनकी मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब 5 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में राजपाल यादव को तगड़ी फटकार लगाई. दरअसल, कोर्ट ने उन्हें तय समय पर चेक बाउंस (Cheque Bounce) मामले में सजा से राहत और सरेंडर से छूट पाने के लिए कोर्ट रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कह रहा है लेकिन उन्होंने सिर्फ 50 लाख रुपये जाम किए. जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उन्हें पूरे रुपये जमा करने के लिए सिर्फ 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
दिया सिर्फ 24 घंटे का अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस केस में एक्टर और उनके वकील को जबरदस्त फटकार लगाई. वादे के मुताबिक, अदालत की रजिस्ट्री में तय रकम जमा न करने पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने तीखी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि एक्टर को कानून के सम्मान की कोई परवाह नहीं है और इस तरह के अहंकार की सही जगह जेल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजपाल यादव को मंगलवार यानी 24 घंटे घंटे के अंदर पैसे जमा करने का अल्टीमेटम दिया है.
5 करोड़ की जगह जमा किए सिर्फ 50 लाख
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि राजपाल यादव को 15 सिंतबर को दिए 2 हफ्ते के समय के बावजूद उन्होंने अब तक 5 करोड़ रुपए की रकम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा नहीं कराई. वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्टर के वकील ने कोर्ट को 50 लाख रुपए के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी दिखाते हुए कहा कि बैंक इसे प्रोसेस कर रहे हैं और छुट्टियों के वजह से थोड़ी देरी हुई. जिस पर जज की बेंच ने कहा, 'यह ड्राफ्ट असली भी है या नहीं, हम नहीं जानते. 15 सितंबर को आपको समय दिया गया था, आप तय समय से आगे निकल चुके हैं. अगर कोई दिक्कत थी तो समय बढ़ाने की अर्जी क्यों नहीं दाखिल की?'
Trouble ????#RajpalYadav gets LAST 24 HOURS deadline ⚠️⚠️⚠️
— Always Bollywood (@AlwaysBollywood) October 5, 2026
Rajpal Yadav has received a final opportunity from the Supreme Court after failing to deposit Rs 5 crore in connection with seven cheque dishonour cases. The dispute stems from financial assistance linked to his film… pic.twitter.com/3fwdxgSlga
पिछली सुनाई में सुप्रीम ने कोर्ट ने सरेंडर करने से दी छूट
15 सिंतबर को राजपाल यादव की चेक बाउंस केस की सुनाई के दौरान कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने से छूट दी थी. हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्री में 5 करोड़ जमा करने की शर्त भी रखी थी. उस समय यादव की ओर से सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया ने पैसे जमा करने के लिए दो हफ्तों का टाइम मांगा था. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि एक्टर के पास पैसे नहीं हैं, लेकिन वे पैसे जमा करना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि यादव के पास कुछ प्रॉपर्टी है और उनकी मां के पास भी अचल संपत्ति है, जिसे बेचकर वे यह रकम जमा करना चाहते हैं.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, राजपाल यादव का ये केस एक पुराने चेक बाउंस से जुड़ा हुआ है. उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से फिल्म बनाना के लिए पांच करोड़ रुपये का लोन लिया था. रिपोर्ट्स में बताया जाता है कि एक्टर ने यह लोन फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए लिया था.उन्होंने ये कर्ज मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माधव गोपाल अग्रवाल से लिया था. लेकिन वह इस लोन को तयशुदा टाइम पर जमा नहीं करा पाए तो मामला चेक बाउंस का बन गया और केस अदालत तक पहुंच गया, जो बाद में ब्याज और जुर्माने के साथ बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये हो गया. ऐसे में अब देखना होगा कि राजपाल यादव सुप्रीम कोर्ट के अल्टीमेटम के बाद टाइम पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करते हैं या नहीं.
ये भी पढ़ें: प्रेमानंद महाराज की शिष्या के घर गूंजने वाली है किलकारी, जल्द बनेंगी मां, MMS वायरल होने के बाद छोड़ी इंडस्ट्री
उत्तराखंड में 34 हजार से ज्यादा युवओं को मिली सरकारी नौकरियां, रोजगार देने पर धामी सरकार का जोर
Uttarakhand News: उत्तराखंड में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को राज्य सरकार अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है. सरकार के अनुसार, बीते साढ़े चार वर्षों में विभिन्न विभागों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं. इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्वरोजगार और स्टार्टअप के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है. इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाकर योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर देना है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई मौकों पर कह चुके हैं कि सरकारी भर्तियों में चयन अब योग्यता और मेहनत के आधार पर सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
शिक्षा से पुलिस तक, कई विभागों में नियुक्तियां
राज्य सरकार के अनुसार, पिछले साढ़े चार वर्षों में शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व, कृषि, पशुपालन, वन और ऊर्जा समेत कई विभागों में नियुक्तियां की गई हैं. शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक, प्रवक्ता और सहायक प्रोफेसर के पदों पर भर्ती हुई है. वहीं गृह एवं पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक, कांस्टेबल और फायरमैन के पदों पर युवाओं को नियुक्तियां मिली हैं.
यह भी पढ़ें: एशियन गेम्स में कांस्य जीतने वाले कपिल पोखरिया ने CM धामी से की मुलाकात, बॉक्सिंग में जीता था पदक
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, लैब टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की गई है. राजस्व एवं प्रशासनिक विभाग में पटवारी, लेखपाल और कनिष्ठ सहायक के पदों पर नियुक्तियां हुई हैं. कृषि और पशुपालन विभाग के अलावा वन एवं पर्यावरण विभाग में भी विभिन्न पदों पर युवाओं को अवसर मिले हैं. ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में यूकेपीएससी और यूकेएसएसएससी के माध्यम से सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता समेत अन्य पदों पर भर्ती की गई है.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद
सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर अवसर देने के लिए सरकार ने मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था भी शुरू की है. ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ के तहत 11 हजार से अधिक पात्र विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन कोचिंग दी जा रही है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर या दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है.
इसके अलावा युवाओं से जुड़े मुद्दों, रोजगार के अवसरों और उनकी अपेक्षाओं को संस्थागत मंच देने के लिए उत्तराखंड युवा आयोग के गठन की दिशा में भी काम किया जा रहा है.
सरकारी नौकरी के साथ स्वरोजगार पर जोर
सरकार का रोजगार मॉडल सिर्फ सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है. स्टार्टअप नीति और विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के जरिए युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार का दावा है कि इससे युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा मिलेगा.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, सरकार का लक्ष्य युवाओं को सिर्फ नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना है. इसी सोच के तहत सरकारी भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्टार्टअप और स्वरोजगार को एक साथ बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.
इस तरह उत्तराखंड में युवाओं के लिए रोजगार की तस्वीर को केवल सरकारी नियुक्तियों तक सीमित रखने के बजाय सरकारी सेवा के साथ उद्यमिता और स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को अपने राज्य में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है.
यह भी पढ़ें: सेवा संकल्प अभियान' के तहत नानकमत्ता पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वच्छता अभियान में किया श्रमदान
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation












