ओडिशा में 8 साल बाद होंगे College Elections, 15 अक्टूबर को डाले जाएंगे वोट
भुवनेश्वर, पांच अक्टूबर ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने सोमवार को कहा कि राज्य के सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव 15 अक्टूबर को होंगे, जिससे आठ साल से चला आ रहा चुनावी विराम समाप्त हो जाएगा। यह घोषणा सूरज और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच यहां लोक सेवा भवन में हुई बैठक के बाद की गई। मंत्री ने कहा, ‘‘सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेज एवं विश्वविद्यालय सात अक्टूबर को चुनाव अधिसूचना जारी करेंगे, जबकि उम्मीदवार नौ अक्टूबर को नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
मतदान 15 अक्टूबर को होगा और निर्वाचित प्रतिनिधि अगले दिन पद की शपथ लेंगे।’’ सूरज ने कहा कि ‘‘चुनाव का उद्देश्य कॉलेज स्तर से भविष्य के नेतृत्व को तैयार करना है’’ और बताया कि 2018 से चुनाव स्थगित थे। पिछला छात्रसंघ चुनाव 2017 में हुआ था। इसके बाद तत्कालीन बीजू जनता दल (बीजद) सरकार ने चक्रवात ‘तितली’, परिसर में हिंसा और बाद में कोविड-19 महामारी समेत विभिन्न कारणों के चलते चुनाव रोक दिए थे।
भाजपा ने अपने 2024 के चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आने के बाद छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू करने का वादा किया था। सूरज ने कहा कि सरकार को सभी परिसरों में चुनाव के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में समय लगा। चुनाव कार्यक्रम कम समय में पूरा करने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि लंबी प्रक्रिया से पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए चुनाव प्रक्रिया को जल्द पूरा करना बेहतर है।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नौ अक्टूबर को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे और अपराह्न दो बजे से चार बजे तक उनकी जांच होगी। वैध नामांकनों की सूची उसी दिन शाम पांच बजे जारी की जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, उम्मीदवार 10 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक नामांकन वापस ले सकेंगे और अंतिम सूची अपराह्न तीन बजे जारी की जाएगी।
इसके अनुसार उम्मीदवार 14 अक्टूबर को ‘‘मैं क्यों खड़ा हुआ हूं’’ बैठक में हिस्सा लेंगे। मतदान 15 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से अपराह्न दो बजे तक होगा और इसके बाद मतगणना की जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह 16 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11 बजे होगा और इस दिन अवकाश घोषित किया गया है।
विभाग ने कहा कि चुनाव पूरी तरह राजनीतिक दलों से अलग रहकर कराए जाने चाहिए और केवल नियमित रूप से नामांकित छात्र ही इसमें भाग लेने के पात्र होंगे। उसने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों में नामांकित छात्रों को चुनाव लड़ने या मतदान करने की अनुमति नहीं होगी। विभाग ने कहा कि संस्थानों के प्रमुखों को उम्मीदवारों का विवरण उच्च शिक्षा सूचना प्रबंधन प्रणाली (एचआईएमएस) पोर्टल पर अपलोड करने और कक्षाओं में न्यूनतम व्यवधान के साथ व्यवस्थित चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विभाग की मानक संचालन प्रक्रियाओं तथा उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
अधिसूचना में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के लिए आचार संहिता भी तय की गई है, जिसमें सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मंचों पर मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई है। इसमें अपमानजनक या आपत्तिजनक भाषा, व्यक्तिगत हमले, मानहानिकारक आरोप तथा झूठी, भ्रामक, छेड़छाड़ की गई या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार फर्जी सामग्री के प्रसार पर रोक लगाई गई है।
सियासी मजबूरी या सोची-समझी Strategy? Mayawati ने भतीजे Akash Anand को फिर बनाया राष्ट्रीय संयोजक
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर अपना फ़ैसला बदलते हुए कहा है कि उनके भतीजे आकाश आनंद को फिर से पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। यह फ़ैसला तब आया है, जब कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में संगठनात्मक बदलाव के तहत आकाश को पार्टी के अहम पद से हटा दिया गया था। माइक्रोब्लॉगिंग साइट X (पहले ट्विटर) पर हिंदी में किए गए एक लंबे पोस्ट में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आकाश का व्यवहार और व्यक्तित्व काफ़ी हद तक संतोषजनक रहा है, लेकिन कुछ ऐसे कारण थे जिनकी वजह से पार्टी में कुछ संगठनात्मक बदलाव करने पड़े और अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से रिटायर होना पड़ा।
मायावती ने लिखा कि जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है। यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
उन्होंने आगे लिखा कि वैसे तो आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः आकाश आनन्द के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है। जिसके बाद से आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
उन्होंने कहा कि इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
मायावीत ने कहा कि ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा। इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
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