UP Rajya Sabha: 10 सीटों का Number Game, क्या Cross-Voting बिगाड़ेगी सपा-BJP का खेल?
भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस खाली सीटों के लिए होने वाले चुनाव की तैयारी कर रही हैं। बीजेपी के पास सात सीटों के लिए ज़रूरी संख्या बल है, फिर भी पार्टी ने आठ उम्मीदवार उतारे हैं और निर्दलीय या संभावित क्रॉस-वोटिंग से अतिरिक्त समर्थन पाने की कोशिश कर रही है। वहीं, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी तीसरी सीट जीतने की कोशिश में है; इसके लिए वह राष्ट्रीय लोक दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसे सहयोगी दलों के नाराज़ विधायकों से क्रॉस-वोटिंग की उम्मीद कर रही है। राज्यसभा की हर सीट के लिए 37 वोटों की ज़रूरत होती है, जिससे NDA और विपक्ष के बीच एक कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है, जिस पर सबकी नज़रें टिकी हैं।
इसे भी पढ़ें: Mani Shankar Aiyar पर BJP का हमला, पाकिस्तान जाकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भड़काने की मंशा का आरोप
बीजेपी के उम्मीदवार
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आठ नामों का ऐलान किया है। इसमें जातियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है और संकेत दिया गया है कि 16 अक्टूबर को कम से कम एक सीट पर चुनाव हो सकता है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम सूची में नहीं है, जबकि उनके नाम की उम्मीद थी; इससे केंद्र में भी फेरबदल के संकेत मिलते हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के नाम भी सूची से गायब हैं, जबकि उनके शामिल होने की उम्मीद थी। आज घोषित उम्मीदवारों में राज्य मंत्री धर्मपाल सिंह, वकील राधाकांत ओझा, राज्य ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश पाल, पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, राज्य महासचिव राम प्रताप सिंह चौहान और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार शामिल हैं।
राज्य में 16 अक्टूबर को दस सीटों के लिए चुनाव होने हैं। बीजेपी का सात सीटें जीतना तय है और वह आठवीं सीट के लिए भी कोशिश कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी, जिसने पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं, एक तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार सकती है। सभी आठ उम्मीदवार कल सुबह 11.30 बजे लखनऊ में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य पार्टी प्रमुख पंकज चौधरी मौजूद रहेंगे।
संतुलन बनाने की कोशिश
आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, BJP ने राज्य की अहम जातियों और समुदायों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। पार्टी ने OBC कैटेगरी से तीन, जनरल कैटेगरी से तीन और अनुसूचित जातियों से दो उम्मीदवार उतारे हैं। इस लिस्ट में दो ब्राह्मण और एक राजपूत भी शामिल हैं। मंत्री धर्मपाल सिंह लोध समुदाय से हैं। रमाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रकाश पाल UP में पार्टी के OBC मोर्चे के अध्यक्ष हैं; धर्मपाल सिंह लोध और श्रुति गंगवार भी OBC समुदाय से हैं। विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत दलित समुदाय से हैं। राम सिंह चौहान ठाकुर समुदाय से हैं।
संख्या बल के आधार पर, BJP के सभी आठ उम्मीदवारों की जीत पक्की मानी जा रही है। इसी तरह, SP के दो उम्मीदवारों - रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी - की जीत भी तय है। BJP ने क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा है: धर्मपाल सिंह और राम प्रताप चौहान पश्चिमी UP और ब्रज क्षेत्रों से हैं, जबकि श्रुति गंगवार रुहेलखंड से आती हैं। गोपी कृष्ण पांडे और विद्यासागर सोनकर पूर्वांचल से हैं; प्रकाश पाल कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से आते हैं, और राधाकांत ओझा प्रयागराज क्षेत्र से हैं।
इसे भी पढ़ें: Aaditya Thackeray के देश छोड़ने की आशंका, Nitesh Rane ने पासपोर्ट जब्ती की मांग की
नंबर गेम
हाल की रिक्तियों के बाद विधानसभा की मौजूदा प्रभावी सदस्य संख्या 397 है, इसलिए 'सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम' के तहत हर उम्मीदवार को पहली पसंद के 37 वोटों की ज़रूरत है। बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के पास बीजेपी के लगभग 255 विधायकों और सहयोगियों को मिलाकर कुल 280 से 290 से ज़्यादा विधायक हैं। इस संख्या बल के साथ NDA आसानी से सात सीटें जीत सकता है, लेकिन वह आठवीं सीट भी हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जिसके लिए उसे अपनी मौजूदा ताकत के अलावा लगभग छह और वोटों की ज़रूरत होगी। SP के पास लगभग 100-101 MLA हैं (BJP में शामिल होने के बावजूद आधिकारिक रिकॉर्ड में चैल की MLA पूजा पाल का नाम SP के साथ ही दर्ज है) और उसे 2 कांग्रेस MLA का समर्थन भी हासिल है। इस तरह उसके पास दो सीटों के लिए तो पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे लगभग 10-12 या उससे ज़्यादा अतिरिक्त वोटों की ज़रूरत होगी - जो शायद क्रॉस-वोटिंग के ज़रिए मिल सकते हैं।
Great Nicobar Project: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, HC सुनेगा मामला
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया, जिसमें ‘‘ग्रेट निकोबार द्वीप मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट’’ के लिए सहमति लेने में वन अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना गया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला पहले से ही उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है और 25 तथा 26 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पीठ ने उच्च न्यायालय से कहा कि वह तय तारीख पर सभी लंबित याचिकाओं समेत मामले की सुनवाई करे।
शुरुआत में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि यह मुद्दा ‘बहुत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय महत्व’ का है। उन्होंने सवाल उठाया था कि इस मुद्दे से संबंधित जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी को पहले ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में चुनौती दी जा चुकी है।
उन्होंने बाद में कई कार्यवाहियां शुरू किए जाने पर चिंता जताई। वेंकटरमणि ने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति वर्षों बाद आता है और याचिका दायर करता है, फिर तीन अलग-अलग याचिकाएं तीन अलग-अलग तरीकों से इसे चुनौती देने की कोशिश करती हैं। फिर वे कहते हैं कि आदिवासी प्रभावित हैं और वे अदालत के समक्ष नहीं हैं।
अब उन्होंने उन आदिवासी समूहों को भी पक्षकार बना लिया है।’’ उन्होंने कहा कि याचिका के सुनवाई योग्य होने का सवाल मामले की जड़ तक जाता है और अदालत से अनुरोध किया कि वह केंद्र को इस मुद्दे पर आगे दलीलें रखने की अनुमति दे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं केवल दरवाजा खुला रखना चाहता हूं, और कुछ नहीं। कम से कम हमें कुछ कहने की अनुमति दीजिए।’’ मामले में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने भी कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित एनजीटी की कार्यवाही में दो दौर की सुनवाई हो चुकी है।
इस मामले में पक्षकार बनाए गए एक आदिवासी परिषद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने कहा कि यह मुद्दा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) से संबंधित है और इसलिए जनहित याचिका सुनवाई योग्य है। न्यायमूर्ति बागची ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि चूंकि याचिका की विचारणीयता पर पहले ही फैसला हो चुका है, इसलिए इसमें निहित जनहित याचिका के दायरे से जुड़े सवालों को खुला रखा जा सकता है। हालांकि, मुरलीधर ने कहा कि जनहित किस हद तक कायम है, यह सवाल ही शायद अकादमिक हो सकता है, क्योंकि आदिवासी परिषद ने पक्षकार बनाए जाने के लिए आवेदन दायर किया है।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि व्यापक सवाल मूल निवासी समुदायों की पहचान और संस्कृति के संवैधानिक संरक्षण से संबंधित है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने का अनुरोध करेगी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








