IIT Delhi का कमाल: 50 किमी Optical Fiber पर भेजा पारंपरिक और Quantum Data
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने 50 किलोमीटर लंबे ऑप्टिकल फाइबर लिंक पर पारंपरिक डेटा के साथ ‘क्वांटम-एंटैंगल्ड फोटॉन’ के संचरण का सफल प्रदर्शन किया है। संस्थान ने इसे क्वांटम संचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। इस शोध का नेतृत्व कर रहे आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर भास्कर कांसेरी ने बताया कि क्वांटम और पारंपरिक डेटा संकेतों (सिग्नल) के लिए एक ही फाइबर नेटवर्क का उपयोग करने से संचार व्यवस्था काफी सस्ती होगी और इसे बड़े पैमाने पर लागू करना भी आसान हो जाएगा।
प्रोफेसर कांसेरी ने कहा कि यह शोध भविष्य के क्वांटम संचार नेटवर्क की एक बड़ी व्यावहारिक अड़चन को दूर करता है। अब तक सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जिस फाइबर ऑप्टिक केबल से ‘हाई-स्पीड’ पारंपरिक टेलीकॉम डेटा भेजा जाता है, उसी के जरिए बेहद संवेदनशील क्वांटम संकेतों को बिना किसी रुकावट के कैसे ट्रांसमिट किया जाए। ‘क्वांटम एंटैंगलमेंट’ कई आधुनिक क्वांटम प्रौद्योगिकियों का आधार है।
यह संवेदनशील जानकारी के सुरक्षित आदान-प्रदान के नए तरीके उपलब्ध कराता है। कांसेरी ने कहा, ‘‘क्वांटम संकेतों को मौजूदा दूरसंचार नेटवर्क के साथ जोड़ना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। पारंपरिक ऑप्टिकल संकेत आमतौर पर काफी मजबूत होते हैं और ऐसा शोर पैदा करते हैं, जो संवेदनशील क्वांटम स्थिति को बाधित कर सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे परीक्षण ने साबित किया है कि नियंत्रित परिस्थितियों में क्वांटम और पारंपरिक डेटा एक ही ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पर एक साथ काम कर सकते हैं।
यह मौजूदा नेटवर्क के साथ नयी प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक तालमेल की दिशा में एक बड़ा कदम है।’’ आईआईटी दिल्ली के ‘इंसेंटिव ऑफ एक्सीलेंस’ (आईओई) अनुदान और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) द्वारा वित्त पोषित यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘ऑप्टिक्स कम्युनिकेशन’ में प्रकाशित हुआ है। इस उपलब्धि के दीर्घकालिक उपयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इससे बैंक, सरकारी एजेंसियां, स्वास्थ्य सेवाएं और रक्षा से जुड़े संस्थान अपने संवेदनशील डेटा और संचार को अधिक सुरक्षित बना सकेंगे।
Ukraine का दावा: हवाई हमलों से रूस की 51 प्रतिशत Oil Refining क्षमता ठप
कीव, पांच अक्टूबर (एपी) यूक्रेन ने कहा कि लंबी दूरी के हवाई हमलों ने रूस की आधे से अधिक तेल शोधन क्षमता को ठप कर दिया। यूक्रेन ने दावा किया कि इससे रूसी सेना को तेल की आपूर्ति करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि मॉस्को, यारोस्लाव, उस्त-लुगा, पर्म, सेराटोव और सिजरान समेत कई शहरों में तेल रिफाइनरियों पर हाल में किए गए हमलों से रूस की 51 प्रतिशत तेल शोधन क्षमता ठप हो गई है।
इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी। एक बयान के मुताबिक, 1,200 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति पर लड़ाई में काफी हद तक गतिरोध के बीच मॉस्को और कीव दोनों ने हवाई हमले तेज कर दिए हैं। यूक्रेन की सेना ने मॉस्को से लेकर साइबेरिया तक तेल रिफाइनरियों पर बार-बार हमले किए हैं।
इन हमलों के कारण इस साल की शुरुआत में रूस में बड़े पैमाने पर ईंधन संकट उत्पन्न हो गया था, जिसकी वजह से अधिकारियों को पेट्रोल की बिक्री सीमित करनी पड़ी थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को दबी आवाज में स्वीकार किया कि इन हमलों के कारण रूस के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब एक प्रतिशत की कमी आई है। पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति विशेषज्ञों के वाल्दाई क्लब फोरम की बैठक में कहा, “उन्होंने (यूक्रेन ने) तेल रिफाइनरियों पर हमले शुरू किए और खुले तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
क्या वे अपने लक्ष्य में सफल हुए? आंशिक रूप से।” यूक्रेन के रक्षा मंत्री येवहेनी खमारा ने कहा कि यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों, जनरल स्टाफ और रक्षा मंत्रालय के विश्लेषकों ने इन हमलों के प्रभाव का आकलन किया है। उन्होंने कहा, “हमारी ओर से निशाना बनाई गई तेल शोधन क्षमता का 51 प्रतिशत प्रभावित होना दुश्मन की अर्थव्यवस्था, उसकी आक्रामक कार्रवाई जारी रखने और सैनिकों को आपूर्ति करने की क्षमता के लिए बड़ा झटका है।
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