इनकम टैक्स रेड की खबरों पर भड़कीं रकुल प्रीत सिंह, बताई मामले की पूरी सच्चाई
बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह पिछले कुछ दिनों से अपनी पर्सनल जिंदगी को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। अपनी फिल्मों के जरिए तो उन्होंने हमेशा ही दर्शकों का मनोरंजन किया है लेकिन इस बाद वह अपने घर पर चले इनकम टैक्स सर्च ऑपरेशन की वजह से चर्चा में थीं।
दरअसल हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि मुंबई में बॉलीवुड सितारों के घर पर इनकम टैक्स की रेड पड़ी है। इसमें रकुल प्रीत सिंह और उनके ससुर वासु भगनानी के ठिकानों पर दबिश देने की बात कही गई थी। अब इस पर एक्ट्रेस ने चुप्पी तोड़ते हुए सच बताया है।
नाराज हुई रकुल प्रीत सिंह
रकुल प्रीत सिंह आर्म्ड फोर्स के परिवार से हैं और हमेशा कानून का पालन करती आई हैं। प्रोफेशनल रहते हुए उन्होंने हमेशा नियमों का पालन किया है। ऐसे में जब बिना किसी वेरिफिकेशन के उनके नाम के साथ गलत रिपोर्ट्स चलाई गई तो एक्ट्रेस ने नाराजगी जताई।
एक्ट्रेस ने दिया बयान
एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर करते हुए इस बात की पूरी सच्चाई बताई है। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा ‘यह बहुत दिल तोड़ने वाला है कि बिना किसी सबूत के किसी भी खबर को फैलाया जा रहा है।’ आगे उन्होंने लिखा कि ‘चलिए एक बार सारे रिकॉर्ड साफ कर देते हैं। यह सर्च मेरे बारे में नहीं था। मैं आर्म्ड फोर्स के बैकग्राउंड सोंग ऑल इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉडफादर नहीं है। मैं यहां तक अपने दम पर पहुंची हूं और एक जिम्मेदार कानून का पालन करने वाली नागरिक के तौर पर 20 साल की उम्र से अपनी जरूरी टैक्स भर रही हूं।’
एक्ट्रेस ने ये भी कहा कि ‘किसी प्रोडक्शन हाउस की तरफ से किसी भी तरह के गैर कानूनी फॉरेन रेमिटेंस में मैं शामिल नहीं हूं। मैं साफ करना चाहती हूं कि देश-विदेश में किसी भी जगह मेरे नाम पर कोई बेनामी प्रॉपर्टी नहीं है। मुझे किसी ने कोई प्रॉपर्टी गिफ्ट नहीं की है और ऐसे महंगे गिफ्ट मैं लेती भी नहीं हूं।’ उन्होंने कहा कि ‘मैं झूठी और बदनाम करने वाली अफवाहों से भरी रिपोर्ट्स बनाने वालों से ये अनुरोध करती हूं कि वह अपनी खबरों में सच्चाई बताएं। मैं समझती हूं कि मीडिया बिजनेस चलाने वाले छोटे से लेकर बड़े हर शख्स पर कमर्शियल प्रेशर होता है। लेकिन इसका मतलब नहीं है कि फैक्ट से समझौता करें। वहां तो बिल्कुल नहीं जहां किसी की रोजी-रोटी दांव पर लगी है।’
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झूठी निकली अफवाह
रकुल प्रीत सिंह के बयान से ये साफ हो चुका है कि वह पूरी तरह से कानून का पालन कर रही है। उनके द्वारा समय पर टैक्स भी दिया जा रहा है। सर्च ऑपरेशन में उनका जो नाम सामने आया था उसे लेकर भी वो बता चुकी हैं कि ये सब उनके लिए नहीं था।
राहुल गांधी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि और अभ्यर्थियों के नोटिस वापस लेने की मांग
राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर आंदोलनरत शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और उन्हें भेजे गए नोटिस वापस लेने की मांग की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे अभ्यर्थियों को भेजे गए नोटिस तत्काल वापस लेने तथा उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने का अनुरोध किया। उन्होंने वर्ग-2 एवं वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि करने के साथ दूसरे चरण की काउंसलिंग जल्द शुरू करने की मांग भी रखी है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान शिक्षक अभ्यर्थियों ने वर्ग-2 और वर्ग-3 की भर्ती में पद बढ़ाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सरकारी स्कूलों में एक लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली होने का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक भर्ती-2025 में वर्ग-3 के 13,089 और वर्ग-2 के 10,800 पदों पर ही भर्ती निकाली गई है
ये मांग की
उन्होंने कहा कि सीमित पदों के कारण बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी सरकारी शिक्षक बनने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। इनमें कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए हैं, जबकि कई अतिथि शिक्षक के रूप में सेवाएं भी दे रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि लंबे समय से इंतजार कर रहे कुछ अभ्यर्थी आयु सीमा के करीब पहुंच गए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि “हैरानी की बात है कि आज अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए ये शिक्षक अभ्यर्थी आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर हैं, और तब भी इनकी बात सुनने के बजाय सरकार उन्हें नोटिस भेज कर डराने की कोशिश कर रही है।” उन्होंने मुख्यमंत्री से माँग की है कि आंदोलन पर बैठे अभ्यर्थियों को भेजे गए नोटिस तुरंत वापस लिए जाएं और उनके प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी बात सुनी जाए।
जीतू पटवारी ने किया समर्थन
जीतू पटवारी ने राहुल गांधी के पत्र का समर्थन करते हुए कहा कि सच और न्याय के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने सरकार पर शिक्षकों को डराने का आरोप लगाते हुए कहा कि बेहतर होगा कि सरकार अभ्यर्थियों की मांगें मंजूर करे और उनके साथ न्याय करे। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश का युवा सरकार के हर झूठे वादे और अत्याचार को दर्ज कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी,
सच व न्याय के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है! शिक्षकों को डराने वाली भाजपा सरकार याद रखे, मप्र का युवा एक-एक झूठा वादा, हर-एक अत्याचार दर्ज कर रहा है!बेहतर यही होगा,
मांगें मंजूर करें, न्याय करें!@DrMohanYadav51@INCIndia | @RahulGandhi https://t.co/oocRJ8YnsW— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 5, 2026
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