सेबी चेयरमैन ने 'फिनफ्लुएंसर' को लेकर निवेशकों और ट्रेडर्स को किया सावधान
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को निवेशकों और ट्रेडर्स को फिनफ्लुएंसर और अप्रत्याशित रिटर्न का लाचल देने वाले लोगों के खिलाफ सावधान किया।
सेबी चेयरमैन की चेतावनी ऐसे समय पर सामने आई है, जब भारतीय बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है और मार्केटकैप के साथ निवेशकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में सेबी के प्रोजेक्ट जागरूक के लॉन्च के मौके पर पांडे ने कहा कि अब ज्यादा परिवार पूंजीगत बाजारों में निवेश कर रहे हैं और उन्हें ऐसे प्रोडक्ट्स मिल रहे हैं जो एक दशक पहले शायद ही मौजूद थे।
उन्होंने कहा, परिवार अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा सिक्योरिटीज मार्केट के इंस्ट्रूमेंट्स में भी लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रिटेल निवेशकों के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) निवेश के सबसे आसान तरीकों में से एक बनकर उभरे हैं।
मार्केट इकोसिस्टम के विस्तार पर जोर देते हुए पांडे ने कहा कि सेबी ने म्यूचुअल फंड स्कीम की कैटेगरी को आसान बनाया, लागत पर सीमा तय की और ज्यादा लोगों की भागीदारी के लिए कम राशि वाली एसआईपी शुरू कीं।
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत का बाजार पूंजीकरण चार गुना बढ़कर लगभग 472 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) की संपत्ति 22 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 78 लाख करोड़ रुपए हो गई है।
पांडे के अनुसार, सेबी ने एक आसान एफपीआई फ्रेमवर्क पेश किया, जिससे डिजिटल ऑनबोर्डिंग आसान हुई और विदेशी निवेशकों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने में मदद मिली।
उन्होंने कहा कि रेगुलेटर ने इन्वेस्टमेंट एडवाइजर, ईएसजी रेटिंग देने वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए नए फाइनेंसिंग चैनल लाकर मार्केट में शामिल होने वालों और प्रोडक्ट्स का दायरा भी बढ़ाया है।
पांडे ने कहा कि भारत का कैपिटल मार्केट सिस्टम मुख्य रूप से घरेलू निवेश को सपोर्ट करने की स्थिति से आगे बढ़कर, देश को ग्लोबल फंड मैनेजमेंट गतिविधियों के लिए एक संभावित केंद्र के तौर पर स्थापित करने की स्थिति में आ गया है।
उन्होंने कहा कि एसएमई आईपीओ प्लेटफॉर्म के जरिए कैपिटल मार्केट तक पहुंच बढ़ी है, साथ ही आईपीओ लिस्टिंग का समय टी प्लस 6 से घटाकर टी प्लस 3 वर्किंग डेज कर दिया गया है।
मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधारों पर पांडे ने कहा कि भारत टी प्लस 1 सेटलमेंट को टेस्ट करने वाला पहला मार्केट था और क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की सुविधा देने वाले शुरुआती देशों में से एक था।
उन्होंने कहा कि डेट मार्केट में कॉर्पोरेट बॉन्ड तक पहुंच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं, जबकि ग्रीन, सस्टेनेबल और म्युनिसिपल बॉन्ड ने पूंजी जुटाने के नए रास्ते खोले हैं।
पांडे ने कहा कि रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और कमोडिटी डेरिवेटिव्स जैसे प्रोडक्ट्स ने निवेशकों, व्यवसायों और उत्पादकों को जोखिमों को मैनेज करने और एसेट्स से बेहतर तरीके से कमाई करने में मदद की है।
उन्होंने यह भी बताया कि मार्केट में भागीदारी और डिजिटाइजेशन बढ़ने के साथ सेबी ने साइबर सिक्योरिटी रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को और सख्त किया है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जीएसटी के अगले चरण के सुधारों से कारोबार करना होगा और आसान, अनुपालन प्रक्रिया होगी सरल: पीएम मोदी
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों का अगला चरण कारोबारियों के लिए अनुपालन को और आसान बनाएगा तथा रिफंड प्रक्रिया को अधिक सरल और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि इससे उद्योग जगत का विश्वास बढ़ेगा, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने यह बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस लेख का उल्लेख करते हुए कही, जिसमें उन्होंने अगले चरण के जीएसटी सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की है। पीएम मोदी ने कहा कि नई पीढ़ी के जीएसटी सुधार कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बना रहे हैं, जिससे व्यवसायों और परिवारों दोनों को लाभ मिल रहा है।
वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि नेक्स्ट-जेन जीएसटी करदाताओं को राहत देने और अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने, दोनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल कर रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी सुधारों का मुख्य फोकस रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, विवाद निपटान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा।
जीएसटी परिषद की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले सीतारमण ने अपने लेख में कहा कि प्रस्तावित प्रक्रिया सुधारों का उद्देश्य करदाताओं के अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है। सरकार चाहती है कि कारोबारी वर्ग को कम कागजी कार्रवाई और अधिक सुविधा मिले।
वित्त मंत्री ने सितंबर 2025 में लागू हुई दर युक्तिकरण प्रक्रिया के बाद जीएसटी संग्रह और कर योग्य आपूर्ति के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। सरकार का मानना है कि जीएसटी ने राजस्व संग्रह को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
इस बीच, आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, परिषद इस बात पर विचार कर सकती है कि जीएसटी कानून में मौजूद वह प्रावधान हटाया जाए या नहीं, जिसके तहत जांच के दौरान कर अधिकारियों को करदाताओं की गिरफ्तारी का अधिकार प्राप्त है।
यह सुझाव जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी द्वारा जीएसटी कानूनों के अपराधमुक्तिकरण के व्यापक प्रस्तावों के हिस्से के रूप में दिया गया है। समिति का मानना है कि कई मामलों में कर भुगतान में चूक जानबूझकर नहीं होती और ऐसे मामलों में गिरफ्तारी जैसे कठोर कदमों की आवश्यकता नहीं हो सकती।
वर्तमान व्यवस्था के तहत सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के अंतर्गत आयुक्त को यह अधिकार है कि यदि उन्हें विश्वास हो कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत गंभीर अपराध किया है, तो वे गिरफ्तारी की अनुमति दे सकते हैं।
हालांकि, प्रस्तावित सोच यह है कि फर्जी चालान, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी रिफंड दावों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सहित सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत की जा सकती है। इससे ईमानदार करदाताओं के लिए कारोबारी माहौल अधिक सहज बन सकता है।
जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी में केंद्र और राज्यों के अधिकारी शामिल होते हैं। यह समिति जीएसटी कानूनों की कानूनी समीक्षा कर परिषद को आवश्यक संशोधनों और स्पष्टीकरणों की सिफारिश करती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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