जिसका डर था वही हो गया है। ईरान में एक साथ कई धमाकों की खबरों ने पूरे मिडिल ईस्ट को हिलाकर रख दिया है। देश के अलग-अलग शहरों से विस्फोटों की तस्वीरें सामने आ रही है और इसी के साथ ही कई बड़े सवाल अब उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के कम से कम सात शहरों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। इन शहरों में राजधानी तेहरान, परंत, तबरीज, कोम, अहवास, नतांच और बंदर अब्बास शामिल है। न्यूज़ एजेंसी के अनुसार इन धमाकों में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है। जबकि 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि ईरान सरकार की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि नहीं की गई है।
वहीं बता दें कि सबसे गंभीर स्थिति जो है वो होमुर्जगंज प्रांत से सामने आई हैं। यहां दो बड़े विस्फोट हुए हैं। जिनके बाद कई इमारतें जमीनदोज हो गई है। मलबे में दबने से कई लोगों की मौतों की खबर सामने आ रही है। अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार यहां पर जारी है। धमाकों के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों की बाढ़ आ गई है। एक खबर यह भी फैलाई गई है कि आईआरजीसी नेवी के कमांडर एडमिरल अली रेट को जो निशाना बनाया गया है यहां पर लेकिन ईरानी मीडिया ने इन खबरों से पूरी तरह से इंकार कर दिया है। इन खबरों को खारिज कर दिया है। इन धमाकों को इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पिछले साल यानी कि 26 अप्रैल 2025 को इसी इलाके के शाहिद रजाई पोर्ट पर इतिहास का सबसे भीषण विस्फोट हुआ था। उस वक्त कंटेनरों में रखे गए सोडियम पर मिसाइलें फ्यूल की वजह से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी और 1200 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
बंदर अब्बास ईरान के लिए तेल और व्यापार के लिए हाथ से सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाका है। राहत की बात आपको यह बता दें कि इन धमाकों का असर मुख्य जो ऑयल रिफाइनरी या फिर कहें कि पाइपलाइंस जो हैं उस पर नहीं पड़ा है। हालांकि पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और इन धमाकों के बाद पूरे ईरान में दहशत बढ़ चुकी है क्योंकि अमेरिका पहले से ही ईरान को चारों तरफ से घेर चुका है। समुद्र में भारी अमेरिकी सैन्य तैनाती की खबरें लगातार सामने आ रही है और इसी वजह से यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं इस घटना के पीछे इजराइल और अमेरिका तो नहीं कहीं इजराइल की सेना यहां पर घुस तो नहीं गई लेकिन एक अमेरिकी अधिकारी ने यह साफ कह दिया है कि यह विस्फोट अमेरिकी सेना ने किसी कारवाही से जुड़ा नहीं था वहीं इजराइली अधिकारी ने भी किसी भी तरह की भूमिका से साफ इंकार कर दिया है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब क्या भूल जाएं कोई नहीं जानता। उनके विरोध तंज करते हैं कि अगर ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति और बड़े उद्योगपति नहीं होते तो निसंदेह भविष्यवक्ता जरूर होते। दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। ट्रंप के मुताबिक भारत अब ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा बल्कि अब भारत वेनेजुला से तेल खरीदेगा। अब अमेरिका के राष्ट्रपति बताएंगे कि भारत किस देश से तेल खरीदे। अब ट्रंप को लगने लगा है कि अब वह इस काबिल हो गए हैं कि भारत अब उनके आदेश पर चलेगा। हाल ही के हालातों को देखकर अब ऐसा लगने लगा है कि अब ट्रंप खुद को पूरी दुनिया का राजा मान बैठे हैं और पूरी दुनिया के फैसले अब वही लेने वाले हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से बड़ा और बेहद विवादित दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक भारत अब ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा बल्कि वेनेजुला से तेल खरीदेगा। ट्रंप का कहना है कि इस पर डील हो चुकी है और कांसेप्ट ऑफ डील फाइनल है। लेकिन इस बात की सारी जानकारी केवल ट्रंप के पास है क्योंकि भारत के विदेश मंत्रालय से तो ऐसा कोई बयान सामने आया ही नहीं है। किसी ने भी इस बयान की पुष्टि नहीं करी है। यह बयान ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी से एयरफोर्स वन में बैठकर पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया है। यानी कि भारत की ऊर्जा नीति पर फैसला भारत में नहीं बल्कि अमेरिका के विमान में घोषित किया जाएगा। और असल हकीकत तो यह है कि भारत ने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद वेनेजुला से तेल आयात बंद कर दिया था। अमेरिका ने तब सेकेंडरी सेंक्शन लगाए थे।
जिसका मतलब था कि वेनेजुला से तेल खरीदने वाले देश या कंपनियों को अमेरिकी बाजार और बैंकिंग सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। 2023 और 2024 में जब अमेरिका ने प्रतिबंधों में आशंकित ढील दी थी तब भारत ने सीमित मात्रा में वेनेजुला से तेल खरीदना शुरू किया था। लेकिन मई 2025 में अमेरिका ने फिर से सख्ती बढ़ाई और 2026 की शुरुआत में भारत का वेनेजुला से तेल आयात घटकर सिर्फ और सिर्फ 0.3% रह गया। इस पूरी कहानी में अहम बात और एक अहम नाम यह है वो है Reliance Industries। दरअसल इंटरनेशनल मीडिया रर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक Reliance अमेरिका से अनुमति लेने की कोशिश कर रहा है ताकि वह दोबारा से वेनेजुला से कच्चा तेल आयात कर सके।
यानी कि फैसला भारत नहीं कर रहा है बल्कि अमेरिकी नियम तय कर रहे हैं कि कौन तेल खरीदेगा और कौन तेल नहीं खरीदेगा। और इसी बीच ट्रंप का भी बयान सामने आया है। दरअसल वह कह रहे हैं कि चीन भी चाहे तो वेनेजुला से तेल खरीद सकता है। बशर्ते अमेरिका के साथ डील हो। मतलब यह कि तेल वेनेजुला का हो लेकिन नियंत्रण अमेरिका के हाथ में रहेगा। हालांकि ट्रंप तो यह भी कह चुके हैं कि वेनेजुला अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल देगा। जिसकी कीमत करीब ₹25,000 करोड़ है और उस पैसे की इस्तेमाल पर भी अमेरिका का नियंत्रण होगा।
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