सुप्रीम कोर्ट बोला-अपराधियों में मौत का डर पैदा करना जरूरी:नहीं तो रेप जैसे अपराध रोकना मुश्किल; सितंबर में दिल्ली-NCR में 13 रेप केस सामने आए
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि रेप मामलों में जब तक अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं होगा कि अगर ऐसा अपराध किया तो मर जाएंगे, तब तक ऐसे अपराधों को रोक नहीं पाएंगे। दिल्ली-NCR में पिछले दिनों नाबालिगों से गैंगरेप मामले पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि हम भारत जैसे देश में हैं। केवल चीजों को कागज पर लिख देना पर्याप्त नहीं है। आपको कार्रवाई करनी होगी। अगर थोड़ा सख्त या कड़ा होना पड़े तो हिचकिचाएं नहीं। कुछ लोग अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का हवाला देकर हंगामा करेंगे, लेकिन आपको (पुलिस) अपना कर्तव्य निभाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पिछले दिनों नाबालिगों से गैंगरेप के तीन मामलों पर दिल्ली पुलिस, गृह मंत्रालय से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। रेप की घटनाएं ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर में हुईं थीं। पिछले 2 महीनों की इन 3 घटनाओं पर सुनवाई 4 अगस्त: दिल्ली में 16 साल की नाबालिग से चलती बस में गैंगरेप। पीड़ित ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में बैठी। आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर छोड़ा। इस दौरान बस करीब 47 किमी दौड़ती रही। बस के शीशों पर पर्दे लगे थे। 12 सितंबर: स्वरूप नगर में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप-हत्या। अगले दिन खेत के पास खुले मैदान में शव मिला। चार आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनमें तीन नाबालिग हैं। 21 सितंबर: दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग अपने दोस्त के साथ बैठी थी। तीन युवकों ने फर्जी पुलिस वाले बनकर छात्रा से रेप किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 28 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जवाबदेही तय होनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि सार्वजनिक जगहों को खराब रोशनी, निगरानी की कमी और पेट्रोलिंग की कमी जैसी वजहों से ‘हाई रिस्क जोन’ नहीं बनने दिया जा सकता। सिर्फ संवेदना जताना समाधान नहीं है, बल्कि अपराध रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आस्था कुंज पार्क की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए गए। दिल्ली में हर दिन बच्चों से यौन अपराध के 4 मामले NCRB के मुताबिक, 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 केस दर्ज हुए। यानी औसतन हर दिन 4 से ज्यादा मामले सामने आए। 2025 की रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली में नाबालिग से रेप, सोशल मीडिया पर दोस्ती कर होटल में बुलाया, आरोपी फरार दिल्ली के वजीराबाद इलाके की एक होटल में नाबालिग से रेप का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी और पीड़ित दोनों वजीराबाद के रहने वाले हैं। आरोपी ने सोशल मीडिया पर लड़की से दोस्ती की और मंगलवार को उसे होटल में बुलाया। पूरी खबर पढ़ें…
भूख हड़ताल के बाद मंदसौर में नगर पालिका कर्मचारियों ने बंद किया काम, 15 मांगों को लेकर गांधी चौराहे पर धरना
मंदसौर में पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे नगर पालिका कर्मचारियों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। गांधी चौराहे पर अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सोमवार से पूरी तरह काम बंद हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारी 19 सितंबर से लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और 26 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे थे। प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई न होने पर अब उन्होंने शहर का काम ठप करने का फैसला लिया है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले दो साल से अपनी जायज मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। उनकी सबसे मुख्य मांग 15 से 20 सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को पक्का करना, अनुकंपा नियुक्ति देना और हर महीने सही समय पर वेतन देना है। मांगें न पूरी होने के कारण अब उनके पास काम बंद करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।
200 नए सफाई कर्मियों की भर्ती और ठेका प्रथा बंद करने की मांग
कर्मचारी संगठन ने बढ़ते शहर के हिसाब से 100 पुरुष और 100 महिला सफाई कर्मियों की नई भर्ती करने की मांग रखी है। साथ ही तीन साल की नौकरी पूरी होने पर इन्हें पक्का करने की बात कही है। कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा और एनजीओ के जरिए सफाई कराने का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि ठेकेदारी प्रथा से कर्मचारियों का हक मारा जाता है, इसलिए इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
समय पर वेतन न मिलने से बैंक किस्त और सिबिल स्कोर हो रहा खराब
हड़ताल कर रहे सफाई कर्मियों का आरोप है कि उन्हें हर महीने समय पर पूरी तनख्वाह नहीं मिलती। कई बार महीने की 15 से 20 तारीख तक किस्तों में पैसे दिए जाते हैं। इससे बैंक लोन की किस्तें समय पर जमा नहीं हो पातीं और पेनल्टी भरने के साथ उनका सिबिल स्कोर भी खराब हो जाता है। इसलिए कर्मचारियों ने मांग की है कि हर महीने की 1 से 7 तारीख के बीच वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।
8 घंटे की ड्यूटी और सुरक्षा की गारंटी पर अड़े कर्मचारी
कर्मचारियों ने 8 घंटे से ज्यादा काम न कराने, छुट्टी के दिन काम करने पर अलग से भत्ता देने और बिना सुनवाई किसी को नौकरी से न निकालने की मांग की है। इसके अलावा ईपीएफ, सर्विस बुक और हर महीने सैलरी स्लिप देने की बात भी कही है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकल जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और काम बंद हड़ताल ऐसे ही जारी रहेगी।
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