Budgam Encounter: पीर पंजाल के जंगलों में कौन पहुंचा रहा था रसद? हाशिम मूसा की मौत के बाद बेनकाब होने वाला है लोकल नेटवर्क!
मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के कवान जंगल इलाके में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने के पांच दिन बाद सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। मुठभेड़ स्थल के पास पलमैदान जंगल से बडगाम पुलिस ने दवाइयों, राशन और खाने-पीने की जरूरी चीजों से भरा एक बैग बरामद किया है। इस बैग की बरामदगी के बाद आतंकी हाशिम मूसा को लंबे समय तक जंगलों में छिपाकर रखने और मदद पहुंचाने वाले स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
इस बैग का मिलना उस लोकल नेटवर्क का पता लगाने में अहम माना जा रहा है, जिसने LeT के टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ़ उर्फ़ हाशिम मूसा उर्फ़ आसिफ़ फौजी उर्फ़ मूसा फौजी को इतने लंबे समय तक जंगलों में ज़िंदा रहने में मदद की थी।
J-K में 35-40 दूसरे विदेशी आतंकवादी सक्रिय हैं
पुलिस लॉजिस्टिकल सपोर्ट और बड़ी साज़िश के सभी पहलुओं की जांच कर रही है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में, खासकर पीर पंजाल के जंगलों में, 35-40 दूसरे विदेशी आतंकवादी सक्रिय हैं।
बैग मिलने के बाद सुरक्षा बलों का मानना है कि एक अच्छी तरह से संगठित लोकल नेटवर्क सक्रिय है जो छिपे हुए आतंकवादियों की मदद कर रहा है। अगर छिपे हुए आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने वाले इस लोकल नेटवर्क को पकड़ लिया जाए, तो छिपे हुए आतंकवादियों को खत्म करना आसान हो जाएगा।
यह बरामदगी 29 सितंबर के एनकाउंटर और उस संदिग्ध लोकल नेटवर्क की चल रही जांच का हिस्सा है जिसने लॉजिस्टिकल सपोर्ट दिया हो सकता है।
पुलिस ने कहा कि ये सामान मारे गए आतंकवादी के इस्तेमाल के लिए थे। जांचकर्ता इस खेप के स्रोत, इसे उस जगह पर कैसे और कब रखा गया, और ओवरग्राउंड वर्करों, साज़िश रचने वालों या दूसरे साथियों की संभावित भूमिका की जांच कर रहे हैं।
इस बरामदगी की जांच खानसाहिब पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के तहत की जा रही है। संदिग्ध सपोर्ट नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।
बडगाम एनकाउंटर
यह एनकाउंटर 29-30 सितंबर, 2026 की रात को बडगाम ज़िले के कवान जंगलों में पलमैदान के पास घने जंगल वाले इलाके में हुआ था। यह स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) बडगाम, भारतीय सेना और CRPF के बीच तालमेल और खुफिया जानकारी पर आधारित एक जॉइंट ऑपरेशन था। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में मिली खास तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया। सैनिकों ने ऑपरेशन चलाया और मूसा को मार गिराया। उसका शव और लड़ाई में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया।
अधिकारियों ने मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को पाकिस्तान में मौजूद LeT कमांडर और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय सबसे ज़्यादा वांछित आतंकवादियों में से एक बताया। वह 2022 के आसपास जम्मू-कश्मीर में आया था और कश्मीर घाटी में जाने से पहले कई सालों तक ऊंचे पहाड़ी जंगलों, खासकर पीर पंजाल रेंज (पुंछ-राजौरी बेल्ट) में सक्रिय रहा। वह 2022 से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय LeT के शीर्ष कमांडरों के चार सदस्यीय समूह का आखिरी बचा हुआ सदस्य था।
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पंजाब में सियासी भूचाल! आप सरकार पर सबसे बड़ा संकट! CM मान के दफ्तर तक पहुंची आंच, हाई कोर्ट ने दिए CBI जांच के आदेश
पंजाब की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के दफ्तर और करीबियों से जुड़े भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। यह आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखे गए पत्रों और राज्य पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने के बाद आया है। ED ने सीनियर पुलिस अधिकारी को तीन पत्र लिखकर पंजाब में सरकारी ट्रांसफर और पोस्टिंग, ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव (CLU) के मामलों और अन्य लेन-देन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। एजेंसी ने इन आरोपों के सिलसिले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर घुमन का नाम भी लिया था।
ये आरोप एक हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले और CLU की मंज़ूरी लेने में कथित अनियमितताओं की ED की जांच के दौरान सामने आए थे। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया में नकली सहमति पत्र इस्तेमाल किए गए थे और पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों की कथित भूमिका की ओर इशारा किया था।
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पंजाब DGP को भेजे गए पत्रों में ED ने यह भी कहा था कि प्राइवेट लोगों का एक नेटवर्क सरकारी प्रक्रियाओं, जैसे ट्रांसफर और पोस्टिंग, को प्रभावित करने में शामिल था। एजेंसी ने अपने पत्रों में नामजद लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, जब राज्य पुलिस ने एजेंसी के पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो वकील निखिल सराफ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की।
इस PIL में पंजाब पुलिस की कथित निष्क्रियता पर न्यायिक हस्तक्षेप और ED द्वारा उठाए गए आरोपों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को जांच के लिए केस CBI को सौंप दिया।
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भगवंत मान ने सभी आरोपों को खारिज किया
इन आरोपों से पंजाब में ज़बरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, और मान ने इन्हें बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। अगस्त में, मुख्यमंत्री ने कहा था कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और अपनी सरकार के खिलाफ किए जा रहे दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।
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मान ने BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने, धमकाने और दबाने के लिए किया जा रहा था।
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