केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, केंद्र को नोटिस भेज 3 हफ्ते में मांगा जवाब
SC on Central Secretariat Library: केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' के तहत प्रस्तावित लाइब्रेरी व्यवस्था, खासकर किताबों के मौजूदा कलेक्शन के लिए तय की गई जगह के बारे में तीन हफ्ते अंदर विस्तृत जवाब मांगा है.
जांच में मदद के लिए सीनियर वकील नियुक्त
कोर्ट ने इस मामले की जांच में मदद के लिए सीनियर वकील हरि प्रिया पद्मनाभन को भी नियुक्त किया है. सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने लाइब्रेरी के मौजूदा कलेक्शन को लेकर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के आरके पुरम में लगभग दो लाख किताबें कार्टन में पैक करके रखी हुई हैं और 2011 से उन्हें खोला तक नहीं गया है. इसके साथ ही कोर्ट ने मौजूदा कलेक्शन के साइज और नई लाइब्रेरी में किताबों के लिए तय की जाने वाली जगह के बारे में साफ जानकारी मांगी है.
अदालत ने केंद्र की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह भी पूछा कि क्या प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर में लाइब्रेरी और उसकी किताबों के लिए काफी जगह बचेगी. अदालत ने खास तौर पर यह साफ करने को कहा कि क्या सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्लान की गई सुविधाओं, जैसे कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर का असर लाइब्रेरी कलेक्शन के लिए उपलब्ध जगह पर पड़ेगा.
केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछे ये सवाल?
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करके यह स्पष्टीकरण देने को कहा कि नई सेंट्रल विस्टा योजना के तहत दिल्ली स्थित 135 साल पुरानी केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) के लिए कितना स्थान आवंटित किया गया है. इस पुस्तकालय में लगभग 8.5 लाख पुस्तकें हैं और इसे स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है.
बता दें कि जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ सेंट्रल विस्टा योजना में सीएसएल के लिए कोई स्थान आवंटित न होने की खबरों के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज किए गए मामले की सुनवाई की. पीठ ने केंद्र सरकार से पुस्तकालय के लिए आवंटित क्षेत्र का विस्तृत विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा. हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या यह स्थान शास्त्री भवन स्थित सीएसएल में वर्तमान में मौजूद पुस्तकों के साथ-साथ आरके पुरम में कार्टन में रखी 2 लाख पुस्तकों को रखने के लिए पर्याप्त होगा.
सुनवाई की शुरुआत में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सेंट्रल विस्टा प्लान में पुस्तकालय के लिए स्थान आवंटित किया गया है. जस्टिस कुमार ने टिप्पणी की, "खबरों के अनुसार, यह पुस्तकालय 1891 से अस्तित्व में है. कागजों को कम करने की बात कहना तो ठीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप बहुमूल्य दस्तावेजों की अनदेखी कर रहे हैं. आप कर्तव्य भवन में सिर्फ दो कमरे आवंटित कर रहे हैं, बस इतना ही?"
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