पीरियड्स के बाद अचानक वजन कम क्यों हो जाता है? जानें क्या है वॉश इफेक्ट
अगर आप इन दिनों वजन कम करने की जद्दोजहद में लगी हैं, तो आपने एक अजीब बात जरूर महसूस की होगी। कई दिनों तक स्केल पर वजन बिल्कुल भी नहीं हिलता और फिर अचानक एक सुबह 500 ग्राम, 700 ग्राम या उससे भी ज्यादा वजन कम दिखाई देता है।
अमूमन यह गिरावट पीरियड्स खत्म होने के ठीक बाद होती है। ऐसे में मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि आखिर रातोंरात ऐसा क्या हो गया?” दरअसल, इसका बड़ा कारण शरीर में जमा अतिरिक्त पानी का निकलना होता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-
इसे भी पढ़ें: Expert Advice: बच्चे के दांत काले क्यों हो रहे हैं? रात की ये आदत हो सकती है वजह
वॉश इफेक्ट क्या है और यह कैसे काम करता है?
सबसे पहले यह समझते हैं कि वॉश इफेक्ट क्या होता है। दरअसल, जब आप कई दिनों से डाइटिंग और एक्सरसाइज कर रही होती हैं, तब भी कई बार तराजू पर वजन कम होता हुआ दिखाई नहीं देता। लेकिन पीरियड्स खत्म होने के बाद जब यह अतिरिक्त पानी बाहर निकलता है, तो वजन अचानक कम दिखाई दे सकता है। इसी तरह वजन में अचानक गिरावट को लोग अक्सर “वॉश इफेक्ट” कहते हैं।
पीरियड्स के बाद वजन अचानक क्यों घटता है?
पीरियड्स एक ऐसा समय होता है, जब शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान कई महिलाओं को पेट फूलना, शरीर में भारीपन, हाथ-पैरों में सूजन या वजन बढ़ा हुआ महसूस हो सकता है। इसी हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर कुछ समय के लिए पानी रोक सकता है। यही वजह है कि पीरियड्स के आसपास स्केल पर वजन कम नहीं होता या फिर थोड़ा बढ़ा हुआ दिख सकता है। लेकिन जैसे-जैसे पीरियड्स का समय गुजरता है और शरीर अतिरिक्त पानी बाहर निकालता है, पेट का फूलना और भारीपन कम हो सकता है। इसी दौरान तराजू पर वजन अचानक नीचे दिखाई दे सकता है।
क्या इसका मतलब फैट लॉस नहीं हुआ?
यह सच है कि पीरियड्स के बाद शरीर में जमा पानी रिलीज होता है और वजन कम दिखाई देता है। तो क्या इसका मतलब यह है कि स्केल पर नंबर कम दिखने के बाद भी फैट लॉस नहीं हुआ। वास्तव में ऐसा नहीं है। अगर आप लगातार संतुलित भोजन कर रही हैं, जरूरत के अनुसार कैलोरी कम ले रही हैं और नियमित शारीरिक गतिविधि कर रही हैं, तो समय के साथ शरीर में फैट भी कम हो सकता है।
- मिताली जैन
Expert Advice: बच्चे के दांत काले क्यों हो रहे हैं? रात की ये आदत हो सकती है वजह
अगर आपके 1 से 3 साल के बच्चे के दांत काले पड़ रहे हैं या उनमें कैविटी की समस्या दिख रही है, तो रात में बार-बार दूध पीने की आदत पर ध्यान देना जरूरी है। डॉक्टर साक्षी बरनवाल के मुताबिक, दूध अपने आप में नुकसानदायक नहीं है, लेकिन रात में बार-बार दूध पीना, खासकर ब्रश करने के बाद, दांतों पर कैविटी का खतरा बढ़ा सकता है।
दूध नहीं, रात में बार-बार दूध पीने की आदत है चिंता की बात
अक्सर माता-पिता कहते हैं कि दूध तो बच्चे के लिए हेल्दी है। यह बात सही है, लेकिन समस्या तब हो सकती है जब बच्चा रात में बार-बार दूध पीता है, दूध पीने के बाद ब्रश नहीं करता और फिर सो जाता है। ऐसे में दूध में मौजूद प्राकृतिक शुगर बार-बार दांतों के संपर्क में आती रहती है। समय के साथ इससे दांतों में कैविटी का खतरा बढ़ सकता है।
इसे भी पढ़ें: घर के अंदर रहने वालों में बढ़ता है Vitamin D Deficiency का खतरा, इन लक्षणों से पहचानें
ब्रश के बाद दूध मांगता है बच्चा?
डॉक्टर साक्षी बरनवाल के अनुसार, माता-पिता को बच्चे की रात की इस रूटीन पर खास ध्यान देना चाहिए। कई बार रूटीन कुछ ऐसी होती है बच्चा ब्रश करता है, फिर कहता है कि उसे दूध चाहिए और दूध पीकर सो जाता है। यही आदत बदलने की जरूरत है, क्योंकि ब्रश के बाद दूध पीने से दांतों पर दूध की शुगर रातभर बनी रह सकती है।
बच्चे की रात की रूटीन में करें छोटा सा बदलाव
रात की रूटीन का क्रम बदलना एक आसान तरीका हो सकता है। कोशिश करें कि बच्चे को पहले दूध दें, उसके बाद ब्रश करवाएं और फिर कहानी सुनाने या बच्चे को गले लगाकर सुलाने जैसी रूटीन रखें। यानी सही क्रम होना चाहिए दूध, फिर ब्रश, फिर कहानी या प्यार से समय बिताना और फिर नींद। ध्यान रखें कि सोने से पहले ब्रश बच्चे के खाने-पीने का आखिरी स्टेप होना चाहिए।
रात में बच्चा फिर दूध मांगे तो क्या करें?
अगर बच्चा रात में उठकर बार-बार दूध मांगता है, तो इसे अचानक बंद करने की बजाय धीरे-धीरे रूटीन बदलने की कोशिश करें। बच्चे को दूध पिलाने के बाद ब्रश करवाकर सुलाने की आदत डालें। रात में बच्चा दोबारा उठे तो बार-बार दूध देने के बजाय पानी देने की कोशिश की जा सकती है। इस बदलाव को धीरे-धीरे अपनाएं, ताकि बच्चे के लिए यह बहुत बड़ा बदलाव न बने।
इसे भी पढ़ें: Health Tips: सीने में जलन दिल का रोग नहीं बल्कि Digestion की गड़बड़ी, ऐसे पहचानें Heartburn
1 से 3 साल के बच्चों के दांतों के लिए जरूरी नियम
डॉक्टर साक्षी बरनवाल के अनुसार, 1 से 3 साल की उम्र में बच्चे के दांतों की सफाई को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बच्चे के दांत दिन में दो बार ब्रश करवाएं और फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट इस्तेमाल करें। 3 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए टूथपेस्ट की मात्रा चावल के एक दाने जितनी या बहुत थोड़ी, यानी स्मीयर मात्रा होनी चाहिए। ब्रश करते समय माता-पिता बच्चे की मदद करें और खास तौर पर रात में होने वाली ब्रशिंग को दिन की आखिरी ब्रशिंग रखें।
इसके अलावा, बच्चे को बार-बार मीठे पेय या मीठे स्नैक्स देने से बचें। बच्चे की पहली डेंटल विजिट 1 साल की उम्र तक हो जानी चाहिए, ताकि दांतों की शुरुआती समस्याओं का समय पर पता लगाया जा सके।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










