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Mani Shankar Aiyar ने Pakistan से बातचीत की वकालत की, अटारी वाघा बॉर्डर पर वार्ता का दिया सुझाव

श्रीनगर, चार अक्टूबर पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार की रविवार को आलोचना की और कहा कि सरकार के पास ‘‘सर्जिकल स्ट्राइक’’ करने का साहस तो है, लेकिन मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत करने की इच्छाशक्ति नहीं है। अय्यर ने यहां पांचवें ‘हल्ला बोल कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए अटारी-वाघा सीमा पर बातचीत करने का सुझाव दिया और कहा कि अतीत के मुद्दों को लेकर बहस करना विदेश नीति नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि हमारे पास उनके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है।

फिर उनके साथ आमने-सामने बैठने का साहस क्यों नहीं है? हम उनसे बात क्यों नहीं कर सकते? हम उनसे दोस्ती क्यों नहीं कर सकते?’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘दुनिया में क्या कोई ऐसा देश है जिसके साथ हम पाकिस्तान से ज्यादा सहज हैं?

क्या दुनिया में कोई ऐसा देश है जिसके साथ पाकिस्तान हमसे ज्यादा आसानी से बातचीत कर सकता है?’’ पाकिस्तान के साथ पहले हुई वार्ता प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए अय्यर ने सवाल किया, ‘‘हम वहां जाने और उन्हें यहां आने देने का साहस क्यों नहीं दिखाते?’’ उन्होंने कहा, ‘‘और अगर आपमें वह साहस नहीं है, तो मेरा सुझाव है कि हम वाघा-अटारी में मिलें। हमारी सीमा रेखा पर ही एक मेज रख दें, ताकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल हमसे बातचीत करने के लिए पाकिस्तान से बाहर न आए और हमें उनसे बात करने के लिए भारत से बाहर न जाना पड़े। और इस संवाद को जारी रखें।’’ उन्होंने कहा कि बातचीत से यह तय किया जा सकता है कि किन मुद्दों का समाधान हो सकता है और किनका नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां भी कोई समाधान निकलता है, उस पर कार्रवाई करें। और जिन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ है, उन्हें यह कहते हुए फिलहाल टाल दें कि अभी इस पर सहमति बनती नहीं दिख रही है, लेकिन हम बातचीत जारी रखेंगे। जब माहौल बदलेगा, तब इन लंबित मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत को लेकर बहस करना विदेश नीति नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि किसी भी तरह के रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता उनसे बातचीत करना है, चाहे इसमें कितना भी समय लगे। अमेरिकियों ने रूसियों के साथ यही किया। उन्होंने कभी राजनयिक संबंध नहीं तोड़े और न ही बातचीत बंद की।

समझदार देश एक-दूसरे से बात करते हैं, मूर्ख देश एक-दूसरे से बात नहीं करते।’’ देश के राजनीतिक हालात से जुड़े सवाल पर अय्यर ने कहा कि ‘‘भारतीय राजनीतिक माहौल में जो गलत है, उसे ठीक करना बहुत आसान है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए आपको (पीडीपी अध्यक्ष) महबूबा मुफ्ती द्वारा कश्मीरियों को दी गई सलाह का पालन करना होगा। उन्होंने कहा था कि जब तक सभी कश्मीरी एक आवाज में एकजुट नहीं होंगे, तब तक दिल्ली पर कश्मीर के अलग-अलग नेताओं के वहां जाने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यही बात राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर भी लागू होती है, जिसे सभी गैर-हिंदुत्व राजनीतिक समूह के एकजुट होने पर ही ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम दिल्ली में होते तो कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिल गया होता।

कश्मीर को शायद अनुच्छेद 370 और 35ए भी वापस मिल गए होते, संभवतः थोड़े अलग स्वरूप में। लेकिन अगर आप प्रगति चाहते हैं, तो असहमत लोगों को एकजुट होना होगा। और अगर हम एकजुट होते हैं, तो पाकिस्तान के साथ नई पहल कर सकते हैं।

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वित्तीय धोखाधड़ी में वांछित Kushal Samir Mehta मुंबई से गिरफ्तार, पटियाला हाउस कोर्ट ने पुलिस रिमांड पर भेजा

नयी दिल्ली, चार अक्टूबर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कथित फर्जी सरकारी दस्तावेज और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े दो मामलों में वांछित एक व्यक्ति को मुंबई और गुजरात में उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। ईओडब्ल्यू ने एक बयान में बताया कि कुशल समीर मेहता को निगरानी और सत्यापन के बाद एक अक्टूबर को मुंबई के बोरीवली रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया।

बयान के अनुसार, मेहता ईओडब्ल्यू में दर्ज 2022 के एक प्राथमिकी मामले और 2025 में दर्ज एक अन्य मामले में आरोपी है। बयान के अनुसार वर्ष 2022 का मामला वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ लेखा अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। बयान के अनुसार इसमें फर्जी मंजूरी पत्रों, कोषागार दस्तावेजों और अन्य कागजात के जरिए सरकारी भुगतानों को भुनाने के कथित प्रयासों का आरोप है।

बयान के अनुसार, जांच के दायरे में आए दस्तावेज एक कंपनी के पक्ष में 7.62 करोड़ रुपये और दूसरी कंपनी के पक्ष में 11 करोड़ रुपये के भुगतान से संबंधित थे। बयान के अनुसार सत्यापन में दस्तावेज फर्जी पाए गए और भुगतान जारी नहीं किए गए। वर्ष 2025 के मामले में गुजरात के एक कारोबारी ने आरोप लगाया कि मेहता ने सरकारी विभागों तक अपनी पहुंच होने और सरकारी कामकाज एवं धन की वसूली में मदद करने का दावा किया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कथित सरकारी दस्तावेजों और आश्वासनों के आधार पर उसे करीब 3.12 करोड़ रुपये देने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस ने बताया कि मेहता ने कथित तौर पर विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के संचार या आदेश के रूप में पेश किए गए दस्तावेजों के अलावा कथित अदालती दस्तावेज, कोषागार के चेक और डिमांड ड्राफ्ट भी उपलब्ध कराए थे। ईओडब्ल्यू की टीम ने मेहता द्वारा नोटिस और अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट के बावजूद जांच में शामिल नहीं होने के बाद उसकी तलाश शुरू की।

ईओडब्ल्यू के बयान में कहा गया, ‘‘तकनीकी निगरानी से उसके मुंबई से पालीताना, भावनगर, अहमदाबाद और वडोदरा जाने का पता चला। इसके बाद ट्रेन से मुंबई लौटने के दौरान भी उस पर नजर रखी गई और टीम ने रेलवे सुरक्षा बल के साथ समन्वय किया। मेहता की पहचान करके उसे ट्रेन से पकड़ लिया गया।’’ मुंबई की एक अदालत ने ट्रांजिट रिमांड मंजूर की, जिसके बाद उसे दिल्ली लाया गया।

पटियाला हाउस अदालत ने उसे सात अक्टूबर तक चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि मुंबई में दर्ज जालसाजी से जुड़े दो अन्य मामलों में भी उसकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।

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  Sports

Sri Lanka से 63 रन की हार के बाद Bangladesh कप्तान Litton Das ने किया कप्तानी छोड़ने से इनकार

बांग्लादेश क्रिकेट टीम के लिए एशियाई खेलों का अभियान निराशाजनक रहा है। टीम कांस्य पदक के मुकाबले में श्रीलंका से 63 रन से हार गई और पहली बार एशियाई खेलों में क्रिकेट से कोई पदक हासिल नहीं कर सकी। इस हार के बाद कप्तान लिटन दास की कप्तानी पर भी सवाल उठने लगे हैं, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने की किसी संभावना से साफ इनकार किया है।

बता दें कि कांस्य पदक के मुकाबले में श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही थी। टीम ने शुरुआती दौर में 21 रन पर 4 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद थारिंदु रत्नायके ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 65 रन की तेज पारी खेली और मुकाबले का रुख बदल दिया। उनकी पारी की बदौलत श्रीलंका मुश्किल स्थिति से बाहर निकलने में सफल रहा और अंत में बांग्लादेश को 63 रन से हरा दिया।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मुकाबले के बाद लिटन दास ने माना कि बांग्लादेश की टीम अपने स्तर के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। उन्होंने खास तौर पर थारिंदु रत्नायके की पारी की तारीफ की। लिटन के मुताबिक, बांग्लादेश के गेंदबाजों ने शुरुआती 8 ओवर में अच्छी गेंदबाजी की थी, लेकिन इसके बाद रत्नायके ने जिस तरह के शॉट खेले, उससे गेंदबाजों के लिए वापसी करना मुश्किल हो गया।

लिटन ने कहा कि रत्नायके ने असाधारण बल्लेबाजी की और बांग्लादेश के गेंदबाजों के पास उन्हें रोकने का कोई आसान तरीका नहीं था। उन्होंने यह भी माना कि जब बांग्लादेश की टीम बल्लेबाजी के लिए उतरी तो वह श्रीलंका के स्कोर का सही जवाब नहीं दे सकी। टीम की बल्लेबाजी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और इसी वजह से मुकाबला हाथ से निकल गया।

कप्तान के तौर पर खुद लिटन का प्रदर्शन भी इस प्रतियोगिता में अच्छा नहीं रहा। उन्होंने एशियाई खेलों में बांग्लादेश के 2 मुकाबलों में क्रमशः 2 और 0 रन बनाए। उन्होंने खुद माना कि उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने कप्तानी छोड़ने की बात को खारिज कर दिया।

लिटन ने कहा कि क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। एक दिन प्रदर्शन अच्छा होता है और दूसरे दिन खराब हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह बड़े लक्ष्य के साथ एशियाई खेलों में आए थे और उसे पूरा नहीं कर पाने का उन्हें भी दुख है, लेकिन सिर्फ इस वजह से कप्तानी छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। उनका कहना है कि बांग्लादेश की टीम ने पहले भी काफी कुछ हासिल किया है और भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश जारी रखेगी।

गौरतलब है कि हार के बाद बांग्लादेशी खिलाड़ियों के टीम होटल से बिना अधिकारियों को जानकारी दिए बाहर जाने की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसी चर्चा थी कि इस मामले में खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, लिटन ने खिलाड़ियों का बचाव किया और टीम को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं।

लिटन के मुताबिक खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए उचित जगह चाहिए और अगर होटल या एशियाई खेलों की ओर से उपलब्ध कराई गई भोजन व्यवस्था उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं है, तो खिलाड़ियों को बाहर जाकर खाना पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी खिलाड़ी को पूरे दिन होटल के कमरे में ही बंद रहना चाहिए।

लिटन ने कहा कि खिलाड़ियों को ऊर्जा की जरूरत होती है और उनकी जरूरतों को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने बाहर जाकर खाना इसी वजह से खाया था।

बता दें कि बांग्लादेश के लिए एशियाई खेलों में यह नतीजा खास तौर पर निराशाजनक है, क्योंकि टीम इससे पहले क्रिकेट प्रतियोगिता में पदक जीतती रही है। इस बार बिना पदक लौटने के बाद टीम के प्रदर्शन, कप्तानी और खिलाड़ियों की तैयारियों को लेकर चर्चा बढ़ गई है। हालांकि, लिटन ने साफ कर दिया है कि वह इस मुश्किल दौर के बाद भी कप्तानी की जिम्मेदारी से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।

Sun, 04 Oct 2026 21:52:00 +0530

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