सितंबर में एफपीआई ने निकाले 45,536 करोड़ रुपए, बड़ी कंपनियों के शेयरों के वैल्यूएशन हुए आकर्षक
मुंबई, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सितंबर 2026 में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की और कुल 45,536 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयर बेचे। हालांकि, प्राथमिक बाजार में उनकी रुचि बनी रही और उन्होंने सितंबर के दौरान 9,676 करोड़ रुपए का निवेश किया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसकी प्रमुख वजह अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना और कच्चे तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका रही है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि लगातार विदेशी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को काफी कमजोर किया है। इसी दबाव के चलते बाजार लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट के साथ बंद हुआ। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमजोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा पर असर डाला है।
हालांकि, हालिया करेक्शन के बाद बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में ठहराव या वापसी के लिए कुछ सकारात्मक संकेत आवश्यक होंगे। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी प्रमुख कारक होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीदों के कारण विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक हुआ था, लेकिन वह रुझान अस्थायी साबित हुआ।
28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार कारोबारी सत्रों में ही विदेशी निवेशकों ने लगभग 34,965 करोड़ रुपए की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की, जबकि इसी अवधि के लिए रिपोर्ट की गई गतिविधि के लिए निर्धारित इक्विटी बिकवाली 27,962 करोड़ रुपए रही। इससे स्पष्ट है कि महीने के अंत में और अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी निवेशकों की निकासी और तेज हो गई।
चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौर ने कहा, द्वितीयक बाजार में बिकवाली और प्राथमिक बाजार में निवेश इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह दूर नहीं जा रहे हैं, बल्कि निवेश के अवसरों के चयन में अधिक सावधानी बरत रहे हैं। उनका मानना है कि यह रुझान अक्टूबर में भी जारी रह सकता है।
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को मजबूत समर्थन दिया है। सितंबर 2026 में डीआईआई ने नकद इक्विटी बाजार में 76,030 करोड़ रुपए की खरीदारी की। इस मजबूत घरेलू निवेश ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशक और खुदरा निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि यह समर्थन नहीं होता, तो बाजार में और गहरी कमजोरी देखने को मिल सकती थी।
आगे चलकर बाजार की दिशा काफी हद तक वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (क्यू2) के नतीजों पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों का मानना है कि जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे और जिनका प्रबंधन भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा, उनके शेयरों में निवेशकों की खरीदारी देखने को मिल सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
Indira Ekadashi 2026: क्या इंदिरा एकादशी का व्रत पितरों को मोक्ष दिलाता है? जानें क्या कहती है मान्यता
Indira Ekadashi 2026: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर इंदिरा एकादशी कहते हैं. साल 2026 में यह एकादशी 6 अक्टूबर 2026 को मंगलवार के दिन मनाई जाने वाली है. यह एकादशी पितृपक्ष के दौरान आती है. इसलिए, इसका धार्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा स्थान माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से और भगवान विष्णु की पूजा करने से पूर्वजों को मोक्ष और मुक्ति मिलती है. अगर किसी के पितर जाने-अनजाने में हुए पापों के कारण यमलोक और नरक की यातना भोग रहे होते हैं अथवा प्रेत योनि में हों, तो उनके वंशजों द्वारा इस पावन तिथि पर पूजन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. इसलिए, इस खास अवसर पर श्रद्धापूर्वक व्रत रखना चाहिए. आइए जानते हैं इंदिरा एकादशी से पितरों की मुक्ति को लेकर धार्मिक मान्यताएं क्या हैं.
इंदिरा एकादशी 2026 तारीख (Indira Ekadashi 2026 Right Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को सुबह 2 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ होगी. इसके बाद एकादशी तिथि का समापन 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर होगा.
ये भी पढ़ें- Matra Navami 2026: आज मातृ नवमी है, इस दिन करें माता पितरों का श्राद्ध, जानें कुतुप मुहूर्त
इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत मुख्य रूप से पितरों की आत्मा के लिए शांति प्रदान की जाती है. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने के कारण इस एकादशी पर पितृ पक्ष का एक बेहद महत्वपूर्ण भाग होती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, अगर किसी के पूर्वज अपने पुराने पापों की वजह से नरक की यातना भोग रहे हैं, तो इस दिन उनके वंशज द्वारा रखा गया उपवास बहुत फलदायी माना जाता है. इस दिन पर व्रत रखकर उसके पुण्य फल को पितरों के नाम अर्पित करने से उन्हें यमलोक के कष्टों से तुरंत राहत मिलती है. वहीं, जो प्रेत योनि में भटक रहे हैं, उन्हें भी इस व्रत के पुण्य से पापों से मुक्ति मिलती है. उन्हें सीधे बैकुंठ में मोक्ष की प्राप्ति होती है.
भगवान विष्णु की पूजा में पुण्य फल का संकल्प लें
इंदिरा एकादशी पर पितरों की मुक्ति के लिए पूजन और संकल्प का विशेष विधान माना जाता है. इस पावन तिथि पर मुख्य रूप से भगवान श्री विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन साधक पूरे नियम के साथ व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु का ध्यान जरूर करें. पूजन के बाद संध्या के समय या फिर अगले दिन पारण के अवसर पर संकल्प लिया जाता है. इस संकल्प के माध्यम से व्रत से मिलने वाले पूरे पुण्य फल को अपने पितरों के नाम समर्पित कर दिया जाता है. जब वंशज अपने व्रत का फल पूर्वजों को अर्पित करते हैं, तो पितरों को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है. इस प्रकार विधि-विधान से किया गया पूजन और संकल्प पितरपों को सभी पापों से मुक्त करके परम धाम पहुंचते हैं और धार्मिकता लाते हैं.
इंदिरा एकादशी से जुड़ी कुछ धार्मिक बातें
पितृ पक्ष की एकादशी- आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह एकादशी सीधे पितरों की आत्मा से संबंधित है.
नरक की यातना से राहत- जाने-अनजाने हुए पापों के कारण नरक भोग रहे पूर्वजों को यह व्रत करना चाहिए.
प्रेत योनि से मोक्ष- जो पितर प्रेत योनि में भटक रहे होते हैं, उन्हें इस दिन पूजन करना चाहिए.
भगवान विष्णु की पूजा- इस पावन दिन पर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और व्रत रखकर उनका आशीर्वाद मिलता है.
ये भी पढ़ें- Shani Gochar 2026: अगले 10 हफ्ते इन 5 राशियों के लिए रहेंगे बेहद खास, शनि देंगे धन-समृद्धि का लाभ
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation









