BSC पास किसान ने बैंक की नौकरी छोड़ी, केले की खेती को बनाया कमाई का जरिया, कितनी होती है कमाई?
गोंडा के तरबगंज के किसान राजेश कुमार तिवारी ने नौकरी छोड़कर खेती को अपनी आमदनी का जरिया बनाया. साल 2001 से खेती कर रहे राजेश अब करीब 12 बीघे में केले की खेती कर रहे हैं. पिछले साल नुकसान के बावजूद उन्होंने खेती जारी रखी और इस बार केले का रकबा और बढ़ा दिया.
US-Iran Tensions: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का प्रस्ताव, पश्चिम एशिया में फिर भड़क सकता है संघर्ष
पश्चिम एशिया में लगातार गहराते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संबंधों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा पेश किए गए 7-दिवसीय युद्धविराम के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
इसके साथ ही यह संकेत भी दिए गए हैं कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य हमले और बमबारी फिर से शुरू की जा सकती है।
कतर के माध्यम से आया प्रस्ताव और ईरानी शर्तें
रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर की मध्यस्थता के जरिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेता है, ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देता है और लेबनान में संघर्ष को थामता है, तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल देगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू करेगा।
अमेरिका द्वारा प्रस्ताव और नाकेबंदी की मांग को ठुकराया जाना
ट्रंप प्रशासन ने ईरान की इन शर्तों और नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मांग को पूरी तरह से नकार दिया है। अमेरिकी रुख से साफ है कि वॉशिंगटन इस समय तेहरान को किसी भी प्रकार की कूटनीतिक राहत देने के मूड में नहीं है, और समुद्री मार्गों पर अपना कड़ा नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
मध्यावधि चुनावों का असर और सैन्य दबाव की रणनीति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि इस नाजुक दौर में ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है। अमेरिकी प्रशासन का यह भी स्पष्ट संदेश है कि घरेलू राजनीतिक समीकरणों या आगामी मध्यावधि चुनावों को अपनी विदेश नीति के आड़े नहीं आने दिया जाएगा, और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
चुनाव के बाद सैन्य अभियानों के दोबारा शुरू होने के संकेत
वॉशिंगटन के अंदरूनी हलकों से मिल रहे संकेतों के मुताबिक, नवंबर के मध्यावधि चुनावों के समापन के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों और हमलों को दोबारा शुरू किया जा सकता है। इस स्थिति से पश्चिम एशिया में तनाव के और अधिक गंभीर रूप लेने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
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