e-KYC नहीं तो आज से LPG सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं:3.07 करोड़ यूजर अब भी बाकी, जानें मोबाइल से e-KYC कैसे करें
आपने अभी तक LPG कनेक्शन का e-KYC नहीं करवाया है तो तुरंत करें, क्योंकि 1 अक्टूबर से 14.2kg वाले घरेलू गैस सिलेंडर के लिए e-KYC का नियम अनिवार्य कर दिया गया है। यानी जिन यूजर्स के LPG कनेक्शन की e-KYC पूरी नहीं होगी, वे 14.2kg वाले घरेलू सिलेंडर की बुकिंग तो कर पाएंगे लेकिन सब्सिडी नहीं मिलेगी। आप मोबाइल से वेरिफिकेशन कर सकते हैं। 89.9% यूजर्स की e-KYC पूरी पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 19 सितंबर तक 27.43 करोड़ एक्टिव घरेलू LPG कनेक्शन यानी 89.9% की e-KYC पूरी हो चुकी है। इनकी रिफिल बुकिंग बिना किसी रुकावट के चलती रहेगी। जिन उपभोक्ताओं का ऑथेंटिकेशन अधूरा है, उनके लिए सब्सिडी वाली रीफिल बुकिंग ऑथेंटिकेशन के बाद ही प्रोसेस होगी। eKYC न कराने पर क्या नुकसान होगा? सरकार ने कहा है कि जो उपभोक्ता बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं कराना चाहते या असमर्थ हैं, उन्हें भी सिलेंडर मिलेगा। इसके लिए उन्हें डिजिटल चैनल, एप, व्हाट्सएप या IVRS के जरिए अपना ऑप्शन चुनना होगा। अगर यूजर बाद में वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, तो उनकी रेगुलर 14.2 kg सिलेंडर की सब्सिडी सुविधा दोबारा चालू कर दी जाएगी। e-KYC की डेडलाइन बार-बार बढ़ाई गई इसकी शुरुआती डेडलाइन 30 जून, 2026 तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 जुलाई, 7 अगस्त, 15 अगस्त, 23 अगस्त, 31 अगस्त, 7 सितंबर और अंत में 14 सितंबर किया गया था, ताकि उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय मिल सके। कंपनियों का घाटा 62 हजार करोड़ पार हुआ सरकार के डेटा के मुताबिक, सितंबर 2026 में 14.2kg वाले सिलेंडर पर लगभग ₹210 तक की सब्सिडी दी जा रही है। तेल कंपनियों का घरेलू LPG पर बकाया घाटा 31 अगस्त 2026 तक ₹62,000 करोड़ को पार कर चुका है। मोबाइल एप से e-KYC करने के लिए नीचे ग्राफिक देखें… फेस ऑथेंटिकेशन फेल हो जाए, तो घबराएं नहीं फेस ऑथेंटिकेशन फेल होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। एप को दोबारा खोलकर फिर से फेस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया करें। ध्यान रखें कि चेहरे पर पर्याप्त रोशनी हो और मोबाइल को स्थिर रखें। फेस स्कैन के बाद एप में ‘e-KYC सक्सेस’ का स्टेटस जरूर देखें। सिर्फ फेस स्कैन हो जाने से यह न मानें कि e-KYC पूरी हो गई है। अगर स्टेटस सक्सेस नहीं दिख रहा है, तो गैस एजेंसी से अपने कंज्यूमर रिकॉर्ड में e-KYC का स्टेटस कन्फर्म कराएं। ऑफलाइन e-KYC कराने के 2 ऑप्शन अगर किसी ग्राहक को मोबाइल एप के जरिए प्रक्रिया पूरी करने में समस्या आ रही हो, तो उनके पास अन्य ऑप्शन भी हैं- ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… गूगल के AI मॉडल जेमिनाई ने 3 वेबसाइट्स हैक कीं:पब्लिक डेटा, पासवर्ड एक्सेस किया: मेटा, एंथ्रोपिक के AI भी हैकिंग कर चुके गूगल के AI मॉडल जेमिनाई ने साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान 3 कंपनियों के कंप्यूटिंग सिस्टम और वेबसाइट्स को बिना किसी इंसानी मदद के हैक कर लिया। यह ऐसा पहला मामला है, जहां गूगल का कोई AI मॉडल खुद से किसी असली सिस्टम में घुस गया। घटना मई महीने की है। साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग कंपनी ने 18 सितंबर को इसके बारे में जानकारी दी। कंपनी इररेगुलर साइबर सिक्योरिटी की टेस्टिंग कर रही थी। पूरी खबर पढ़ें…
पटाखों पर पूरे देश में नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट ने कहा “दिवाली से जुड़ी हैं लोगों की भावनाएं”
दिवाली से पहले पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरे देश में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का उसका इरादा नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। ऐसे में अदालत का प्रयास पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय पर्यावरण और लोगों की धार्मिक-सामाजिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने का है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखे चलाने के लिए 24 घंटे की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक पटाखे चलने से होने वाले प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर कुछ सीमाएं तय करना जरूरी होगा।
पटाखों की किस्म और समय पर तय होंगे नियम
सुप्रीम कोर्ट अब पटाखों की अलग-अलग किस्मों और उनके इस्तेमाल की समयसीमा पर विचार करेगा। अदालत का कहना है कि दिवाली मनाने की लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं को भी ध्यान में रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। इस दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर नियम और शर्तें तय किए जाने पर विचार किया जाएगा।
लंबे समय से चल रहा है पटाखों के प्रदूषण का मामला
पटाखों से होने वाले प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2015 से चल रहा है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के प्रदूषण प्रभावित इलाकों में दिवाली के आसपास वायु गुणवत्ता खराब होने को लेकर अदालत पहले भी कई आदेश दे चुकी है। वर्ष 2018 में अदालत ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर कई तरह की शर्तें लगाई थी। अदालत ने कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखों को अनुमति दी थी और कुछ रसायनों के इस्तेमाल वाले पटाखों पर रोक लगाई थी। साथ ही दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए रात 8 बजे से 10 बजे तक की समय-सीमा तय की गई थी। इसके बाद भी प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए अदालत अलग-अलग मौकों पर पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर निर्देश देती रही है।
त्योहार और प्रदूषण के बीच संतुलन की कोशिश
इस बार सुनवाई में अदालत का रुख साफ है कि पटाखों पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। साथ ही बिना किसी समय सीमा के पटाखे चलाने की छूट भी नहीं होगी। अब अदालत पटाखों के प्रकार और उन्हें चलाने के लिए निर्धारित समय को लेकर नियम तय करेगी। 15 अक्टूबर की सुनवाई के बाद इस मामले में तस्वीर स्पष्ट होगी।
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