बिहार विधान परिषद चुनाव: Tejashwi Yadav ने INDIA गठबंधन में दरार से किया इनकार
पटना, तीन अक्टूबर राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने विधान परिषद चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन में किसी विवाद से शनिवार को इनकार किया और कहा कि गठबंधन में शामिल दल पहले भी ये चुनाव अलग-अलग लड़ चुके हैं। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 23 अक्टूबर को विधान परिषद की आठ सीट पर होने वाले चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। यादव ने कहा, चाहे वह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव हों, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के या स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों के चुनाव हों, वाम दल, कांग्रेस और राजग हमेशा अलग-अलग लड़ते रहे हैं।
उन्होंने यह बात दिल्ली से पटना लौटने के बाद पत्रकारों से कही। वह दिल्ली में आईआरसीटीसी होटल कथित घोटाला मामले में राउज एवेन्यू अदालत में हुई सुनवाई में शामिल होने गए थे। राजद नेता ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी आगामी विधान परिषद चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी।
एक दिन पहले कांग्रेस ने भी विपक्षी गठबंधन के अंदर किसी विवाद की अटकलों को खारिज किया था। कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि पार्टी का फैसला हमारे कार्यकर्ताओं की भावनाओं और जनता की इस धारणा के अनुसार लिया गया है कि कांग्रेस भाजपा के समक्ष मुख्य चुनौती बनकर उभर रही है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस संबंध में एक कार्ययोजना तैयार की है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी दिए बिना कहा, “विपक्षी सांसद छह अक्टूबर को विरोध मार्च निकालेंगे।” उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन सीईसी ज्ञानेश कुमार और “उन्हें सत्ता के उस पद पर पहुंचाने वालों” द्वारा किए गए “पापों” के लिए सजा सुनिश्चित करेगा। दिल्ली में हुई अदालत की सुनवाई के बारे में राजद नेता ने कहा कि उनका परिवार नियमित रूप से अदालती कार्यवाही पर नजर रख रहा है और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने लालू प्रसाद के परिवार को झूठे मामले में फंसाया है।
SIR प्रक्रिया पर भड़के Prakash Raj, बोले अब CEC ज्ञानेश कुमार के विसर्जन की बारी
(फोटो के साथ) हैदराबाद, तीन अक्टूबर अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आलोचना करते हुए शनिवार को कहा कि गणेश चतुर्थी के उत्सव के तहत गणेश प्रतिमाओं का ‘विसर्जन’ हो चुका है और अब मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का ‘विसर्जन’ होना बाकी है। मीडिया में आई उन खबरों का हवाला देते हुए कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं द्वारा नाम शामिल किए जाने के लिए दायर 38 लाख अपीलें न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं और इनके निपटारे में 10-12 साल लग सकते हैं, उन्होंने सवाल किया कि क्या इतनी बड़ी संख्या में आवेदकों को इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पूरे देश में गणेश विसर्जन हो चुका है।
अब ज्ञानेश कुमार के विसर्जन की बारी है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि जब एसआईआर की शुरुआत हुई थी, तब इसे मतदाता सूची के शुद्धीकरण की प्रक्रिया बताया गया था, लेकिन अब यह सामने आया है कि यह समावेशी प्रक्रिया के बजाय नाम हटाने की प्रक्रिया बन गई है। प्रकाश राज ने कहा कि उन्होंने विभिन्न जिलों का 10-दिवसीय दौरा कर लोगों से मुलाकात की और उन्हें बताया गया कि केवल इसलिए उनके नाम मतदाता सूची से ‘‘हटा दिए गए’’, क्योंकि जब बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) उनके घर पहुंचे, तब वे घर में मौजूद नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि काम के सिलसिले में दूसरे स्थानों पर गये दिहाड़ी मजदूरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या ‘मन की बात’ करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले से ही एसआईआर की प्रक्रिया के बारे में लोगों को समझाया था। प्रकाश राज ने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसे पूरी तरह रद्द किया जाये।’’ इस बीच, भाजपा की तेलंगाना इकाई के मुख्य प्रवक्ता एन. वी. सुभाष ने सीईसी के खिलाफ की गई प्रकाश राज की “अपमानजनक” टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। सुभाष ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रकाश राज को निर्वाचन आयोग की आलोचना करने का अधिकार हो सकता है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त की तुलना प्रतिमा विसर्जन से करना राजनीतिक आलोचना की सीमा से आगे बढ़कर एक संवैधानिक संस्था के प्रति अनादर है।
लोकतंत्र में उपहास नहीं, बल्कि सार्थक बहस की आवश्यकता होती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर प्रकाश राज को एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है, तो उन्हें ‘भड़काऊ बयानबाजी’ करने के बजाय उचित मंच के समक्ष तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए।
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