CEC ज्ञानेश कुमार के Agra आवास पर प्रदर्शन मामले में छह Congress कार्यकर्ताओं को मिली जमानत
आगरा/लखनऊ (उप्र), तीन अक्टूबर आगरा की एक अदालत ने शनिवार को उन छह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी, जिन्हें पिछले सप्ताह एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के आवास के बाहरी गेट और दीवार पर कथित तौर पर नारे लिखने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के एक अधिवक्ता ने यह जानकारी दी। इस बीच कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमानत मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए इसे ‘‘न्याय की जीत’’ बताया।
अधिवक्ता संतोष दीक्षित ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) शारिब अली की अदालत ने आगरा जिला जेल में बंद सभी छह आरोपियों को जमानत दे दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले में अन्य धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) भी लगाई थी, लेकिन अदालत के समक्ष पुलिस इस धारा को लगाए जाने के समर्थन में पर्याप्त आधार पेश नहीं कर सकी। दीक्षित के अनुसार, पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस को धारा 109 के संबंध में आवश्यक जांच करने और यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि यह धारा किन तथ्यों, चोटों, चिकित्सकीय साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान या अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर लगाई गई है।
अदालत ने जांच अधिकारी को तीन अक्टूबर तक जांच पूरी करने और हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनने की स्थिति में संबंधित धारा हटाकर इसका उल्लेख केस डायरी में करने का भी निर्देश दिया था। दीक्षित ने बताया कि पुलिस हत्या के प्रयास का मामला साबित करने के लिए पर्याप्त आधार पेश नहीं कर सकी, जिसके बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों को जमानत दे दी। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले से निपटने के पुलिस के तरीके पर भी नाराजगी जताई।
दीक्षित ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद छह आरोपियों-कांग्रेस नेता मुकेश धनगर, अनिल यादव, राजेश कुमार, मनोज गौर, राजेश गौतम और पंकज चौधरी- ने 20-20 हजार रुपये के जमानती मुचलके भरे। कांग्रेस के आगरा शहर अध्यक्ष अमित सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी की लड़ाई ‘‘लोकतंत्र और संविधान को बचाने’’ की है। सिंह ने कहा, ‘‘पुलिस द्वारा लगाई गई गंभीर धारा को अदालत ने हटा दिया है।
यह लोकतंत्र की जीत है।’’ उन्होंने कहा कि कुमार के मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद से इस्तीफा देने तक कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी। यह मामला 28 सितंबर की एक घटना से जुड़ा है, जब कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान विजय नगर इलाके में कुमार के आवास के बाहरी गेट और दीवार पर काले रंग से कथित तौर पर नारे लिखे थे। पुलिस ने एक उप निरीक्षक की शिकायत पर आठ नामजद और 15-20 अज्ञात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ हरीपर्वत थाने में मामला दर्ज किया था।
आरोपियों के खिलाफ शुरुआत में बीएनएस की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 121 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), धारा 126 (गलत तरीके से रोकना), धारा 132 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) तथा दंगा, घर में अनधिकृत प्रवेश, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करने से संबंधित धाराएं शामिल थीं। छह आरोपियों को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जेल भेज दिया गया।
यह घटना कुमार के खिलाफ ‘‘वोट चोरी’’ के आरोप को लेकर कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन के बीच हुई। आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जमानत को ‘‘न्याय की जीत’’ बताया और जमानत दिलाने के प्रयासों के लिए पार्टी के विधि विभाग, स्थानीय संगठन तथा पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का आभार जताया। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी के अनुसार, मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा ‘‘वोट चोरी’’ किए जाने की बात उजागर हो चुकी है और राहुल गांधी पहले ही इस मुद्दे को उठा चुके हैं।
उन्होंने भाजपा पर लोगों के वोट ‘‘चोरी’’ कर चुनाव जीतने का आरोप लगाया और दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संवैधानिक पद पर रहते हुए लोगों के साथ धोखा किया है। मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी।
Chhattisgarh में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का एक साल पूरा, 850 गांवों तक पहुंची बस सेवा
रायपुर, तीन अक्टूबर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत एक वर्ष में बस्तर और सरगुजा संभाग के 850 गांव में पहली बार नियमित बस सेवा पहुंची है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित, सुलभ और नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने संचालन का एक वर्ष पूरा कर लिया है।
चार अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के तहत बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर 107 बस का संचालन किया जा रहा है। इन बसों के जरिए ऐसे 850 गांव को नियमित यात्री बस सेवा से जोड़ा गया है, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने बताया कि एक वर्ष में योजना के तहत बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया है।
वर्तमान में ये बसें प्रतिदिन करीब 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। योजना के अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर है। इन मार्गों की लंबाई 14 से 105 किलोमीटर के बीच है और अधिकांश पर प्रतिदिन दो बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक वर्ष पूरा होने पर कहा, ‘‘सुदूर गांव में रहने वाले नागरिक को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक सहज पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना इसी सोच को धरातल पर उतार रही है।’’ उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नियमित यात्री बस नहीं पहुंचती थी, वहां आज ग्रामीण तय समय पर सुरक्षित बस से स्कूल, अस्पताल, हाट-बाजार, ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक पहुंच रहे हैं। साय ने कहा, ‘‘यह केवल परिवहन सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम है।’’ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की शुरुआत चार अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में की थी।
शुरुआत में 34 मार्ग पर बस सेवा शुरू की गई थी और करीब 250 गांव को इससे जोड़ा गया था। एक वर्ष के भीतर योजना का दायरा बढ़कर 106 मार्ग और 107 बस तक पहुंच गया तथा नियमित बस सेवा से पहली बार जुड़े गांवों की संख्या बढ़कर 850 हो गई। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया है।
बस्तर संभाग में 51 मार्ग पर 50 बस और सरगुजा संभाग में 55 मार्ग पर 57 बस संचालित की जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि योजना शुरू करने के पीछे सुदूर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में नियमित सार्वजनिक परिवहन की कमी एक प्रमुख कारण था। बस्तर और सरगुजा के अनेक गांवों में नियमित बस सेवा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पिकअप एवं अन्य वाहनों में सफर करना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि दुर्गम मार्गों पर यात्रियों की संख्या कम होने के कारण निजी बस संचालकों के लिए नियमित बस सेवा चलाना व्यावसायिक रूप से कठिन था और इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता के साथ नियमित यात्री परिवहन की व्यवस्था शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि दुर्गम और कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर नियमित बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दे रही है। पहले वर्ष में 26 रुपये प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष में 24 रुपये और तीसरे वर्ष में 22 रुपये प्रति किलोमीटर की वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
यह सहायता अधिकतम तीन वर्ष तक दी जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत संचालित वाहनों को मासिक मोटरयान कर में भी अधिकतम तीन वर्ष तक छूट दी जाती है। अब तक 107 बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
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