पंजाबी महिला सरबजीत मामले पर सुनवाई:पाकिस्तानी कोर्ट ने जांच पूरी होने तक आदेश टाला; 13 फरवरी को अगली सुनवाई
लाहौर की अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सरबजीत कौर द्वारा दायर याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें यात्रा वीजा के कथित दुरुपयोग और ओवरस्टे को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान याचिका के विरोध में वकील अली चंगेजी संधू ने कोर्ट में प्रारंभिक दलीलें पेश कीं। इस दौरान फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (इमिग्रेशन विंग) की ओर से कोर्ट में बताया गया कि सरबजीत कौर और नासिर हुसैन के खिलाफ एक औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। एफआईए इमिग्रेशन ने कहा कि यात्रा वीजा की शर्तों के उल्लंघन, ओवरस्टे और संभावित दुरुपयोग के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एजेंसी ने कोर्ट को यह भी भरोसा दिलाया कि जांच के दौरान यात्रा दस्तावेजों, वीजा रिकॉर्ड और संबंधित तथ्यों की गहनता से समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में इमिग्रेशन कानूनों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक दलीलें सुनने और एफआईए की रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के बाद कोर्ट ने किसी भी तात्कालिक आदेश से परहेज किया। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को अपनी जांच पूरी करने और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शफकत शाहबाज राजा, लाहौर ने की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 13 फरवरी 2026 तय की है, जिस दिन फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (इमिग्रेशन) को अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई एफआईए की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी। सिलसिलेवार पढ़िए क्या था पूरा मामला... 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ गई थी पाकिस्तान: कपूरथला के गांव अमानीपुर की रहने वाली सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गई थी। यह सिख जत्था 10 दिन तक पाकिस्तान में रहा। दर्शन करने के बाद जत्था 13 नवंबर को भारत लौटा: उन्होंने सिख गुरुओं से जुड़े विभिन्न स्थलों के दर्शन किए और 13 नवंबर को श्रद्धालु भारत वापस लौट आए। पूरे सिख जत्थे के एक साथ भारत लौटने से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और 3 महिलाओं समेत कुल 9 श्रद्धालु पहले लौट आए थे। सिख श्रद्धालुओं के साथ वापस नहीं लौटी: हालांकि जब श्रद्धालुओं का पूरा जत्था वापस लौटा तो 1923 की जगह 1922 लोग ही वापस पहुंचे। जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि सरबजीत कौर वापस नहीं आई है। उसका नाम न तो पाकिस्तान के एग्जिट रिकॉर्ड में था और न ही भारत के एंट्री रिकॉर्ड में मिला। पहले माना गया कि वह लापता है। इसके बाद पाकिस्तान में भी लोकल पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी उसकी तलाश शुरू कर दी। निकाहनामा और वीडियो वायरल होने से पता चला: इसके बाद अचानक उर्दू में लिखा सरबजीत का निकाहनामा वायरल हो गया। जिसमें लिखा था कि सरबजीत ने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म अपना लिया है। उसने शेखुपुरा नूर हुसैन नाम के मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कर लिया है। सरबजीत बोली- नासिर को 9 साल से जानती है: इसके बाद 15 नवंबर को उसका एक वीडियो भी वायरल हो गया। जिसमें उसने मौलवी को कहा कि वह मुस्लिम बनना चाहती है। सरबजीत ने कहा कि वह नासिर से प्यार करती है और 9 साल से उसे जानती है। सरबजीत ने यह भी कहा था कि मेरा तलाक हो चुका है। पाक इमिग्रेशन फॉर्म में कई जानकारियां नहीं भरी: सरबजीत के पाकिस्तान में निकाह करने के बाद उसके वीजा के लिए दस्तावेजों की पड़ताल की गई। इसमें पता चला कि उसने पाकिस्तानी इमिग्रेशन में भरे फॉर्म में अपनी राष्ट्रीयता और पासपोर्ट नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां ही नहीं भरी थी। इससे पाकिस्तान में उसे ट्रेस करना मुश्किल हो गया था। निकाह करने के बाद सरबजीत नासिर के साथ छिपकर रह रही थी। पाकिस्तान में यूट्यूबर नासिर ढिल्लों ने किया था स्वागत: अमृतसर से अटारी के रास्ते में पाकिस्तान के ननकाना साहिब पहुंचने वाले जत्थे का स्वागत पाकिस्तान के यूट्यूबर नासिर ढिल्लों ने किया था। ये वही नासिर हुसैन है जिस पर ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पाकिस्तानी एजेंसियों के लिए काम करने का आरोप लगा था। इसी ने पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई हरियाणा के हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के साथ भी इंटरव्यू किया था।
'पथिक' की पहल से गुजरात में होटल चेक-इन हुआ पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित: हर्ष संघवी
अहमदाबाद, 31 जनवरी (आईएएनएस)। अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह देश की पहली ऐसी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी बन गई है जिसने आधार-इनेबल्ड गेस्ट वेरिफिकेशन के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के साथ आधिकारिक एग्रीमेंट किया है। इस पहल से न सिर्फ पुलिसिंग के तरीके में बदलाव आया है, बल्कि आम नागरिकों और यात्रियों को भी एक आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद सिस्टम मिला है।
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