Assam NRC डेटा ट्रांसफर न होने से 19.07 लाख लोगों की Rejection Slips अटकीं, RGI ने दी जानकारी
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) से बाहर रह गए 19.07 लाख लोगों को रिजेक्शन स्लिप जारी करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, क्योंकि फ़ाइनल NRC को अभी तक आधिकारिक तौर पर नोटिफ़ाई नहीं किया गया है। एक हलफ़नामे में भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने कहा कि राज्य के NRC कोऑर्डिनेटर अभी भी NRC डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एक "सुरक्षा व्यवस्था" पर काम कर रहे हैं। इसमें कहा गया है कि डेटा अभी तक रजिस्ट्रार जनरल को नहीं सौंपा गया है, और वे फ़ाइनल NRC को तभी नोटिफ़ाई कर सकते हैं जब उन्हें यह डेटा मिल जाए। अगस्त 2019 में जारी अंतिम NRC के अनुसार, 19.07 लाख आवेदकों के नाम सूची से हटा दिए गए थे, जबकि 3.11 करोड़ आवेदकों को इसमें शामिल किया गया था। हलफनामे में कहा गया, राज्य समन्वयक द्वारा NRC डेटा के लिए सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का काम चल रहा है और इसलिए डेटा भारत के महापंजीयक (RGI) के साथ साझा नहीं किया गया है।" इसमें यह भी कहा गया कि राज्य NRC समन्वयक द्वारा अस्वीकृति पर्ची (rejection slips) जारी करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले राज्य NRC कोऑर्डिनेटर को निर्देश दिया था कि वे फ़ाइनल लिस्ट से बाहर किए गए लोगों को रिजेक्शन स्लिप जारी करने के लिए एक तरीका बनाएं, ताकि वे अपने रिजेक्शन को चुनौती देने के लिए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में जा सकें। बाद में, अक्टूबर 2020 में राज्य NRC कोऑर्डिनेटर ने RGI को बताया कि रिजेक्शन स्लिप तभी जारी की जा सकती हैं जब रजिस्ट्रार जनरल फ़ाइनल NRC को नोटिफ़ाई कर दें। यह मामला असम स्टेट जमीयत उलेमा, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य संगठनों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इन संगठनों ने NRC से बाहर किए गए लोगों के लिए 'रिजेक्शन स्लिप' और अंतिम सूची में शामिल लोगों के लिए NRC कार्ड की मांग की है। असम सरकार द्वारा अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 6 नवंबर तक टाल दी।
VCK प्रमुख Thirumavalavan ने मांगा CEC का इस्तीफा, BJP से मिलीभगत का लगाया आरोप
विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार ने चुनावी गड़बड़ी में BJP और RSS के साथ मिलीभगत की है। थिरुमावलवन ने कहा कि तमिलनाडु में 13 से 15 अक्टूबर तक केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) भी कांग्रेस, VCK, MDMK और वामपंथी दलों के साथ शामिल होगी। थिरुमावलवन ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कामों ने संविधान का उल्लंघन किया है और लोकतंत्र को कमज़ोर किया है, इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
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यह मांग देश भर में कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच उठी है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय होना संस्थागत विचार-विमर्श का एक सामान्य हिस्सा है और ज़ोर देकर कहा कि उसके सभी आदेशों को कानूनी मान्यता प्राप्त है और उनका पालन स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार किया गया है। इस बीच, TVK के चुनाव अभियान प्रबंधन महासचिव, आधव अर्जुन ने तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत पार्टी की धारापुरम उम्मीदवार पी. सत्यभामा के बारे में कथित तौर पर 'बॉडी-शेमिंग' (शारीरिक बनावट का मज़ाक उड़ाने वाली) टिप्पणी करने को लेकर की गई है।
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3 अक्टूबर की शिकायत में अर्जुन ने आरोप लगाया कि स्टालिन ने 2 अक्टूबर को धारापुरम में एक चुनावी बैठक के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि इन टिप्पणियों को बड़े पैमाने पर प्रसारित किया गया और सोशल मीडिया पर फैलाया गया। शिकायत के अनुसार, स्टालिन ने सत्यभामा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कथित नामों, जैसे "पेटी बामा" (सूटकेस बामा) और "पलटी बामा" (समरसॉल्ट बामा) का ज़िक्र किया और सवाल उठाया कि "उस तरह के रूप-रंग" के साथ वह कैसे कलाबाजी (समरसॉल्ट) कर सकती हैं। अर्जुन ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी उनकी नीतियों, सार्वजनिक रिकॉर्ड या राजनीतिक रुख के बजाय उनके रूप-रंग पर केंद्रित थी।
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