Delhi में लैंडफिल से खाली कराई 100 एकड़ जमीन, Rekha Gupta ने नए प्लांट की रखी नींव
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को ओखला, गाजीपुर और सिंघोला कूड़े के पहाड़ वाली जगह पर कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं की आधारशिला रखी। गुप्ता ने कहा कि सरकार ने पिछले डेढ़ साल में शहर के तीन कूड़े के पहाड़ वाली जगहों से 100 एकड़ जमीन खाली कराई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य कूड़े और निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे का प्रसंस्करण करना और शहर में कचरे के नए पहाड़ बनने से रोकना है।
रेखा गुप्ता ने ओखला में कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से कहा कि सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है, मौजूदा कूड़े के पहाड़ वाली जगह से पुराने कचरे को हटाना और यह सुनिश्चित करना कि रोजाना निकलने वाले कचरे का ढेर लगाए बिना उसका प्रसंस्करण किया जाए। उन्होंने कहा, “आज ओखला में हमने जनवरी 2025 से पहले मौजूद लगभग पूरा पुराना कचरा प्रसंस्कृत कर दिया है।” रेखा गुप्ता ने कहा कि रोजाना करीब 3,000-4,000 मीट्रिक टन कचरा इस स्थल पर पहुंचता है और नयी इकाई के जरिये उसका नियमित रूप से प्रसंस्करण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा कचरे के पहाड़ों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “लोग देख रहे हैं कि कूड़े के पहाड़ लगातार छोटे हो रहे हैं और जल्द ही ऐसा समय आएगा जब ये पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।” उन्होंने कहा कि कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं से बायोगैस, हरित ऊर्जा और खाद का भी उत्पादन होगा। रेखा गुप्ता ने कहा, “कचरा सिर्फ कचरा नहीं रहना चाहिए, दिल्ली को इसका इस्तेमाल संपदा के रूप में करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कचरे को अलग करने और उसके प्रसंस्करण के लिए नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में तकनीक आधारित कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों के तहत कचरे और पशुओं के गोबर का इस्तेमाल बायोगैस और खाद बनाने में किया जाएगा।
Assam NRC से बाहर 19 लाख लोगों को rejection slip अभी नहीं, Supreme Court में केंद्र का जवाब
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से बाहर किए गए 19 लाख लोगों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, क्योंकि अंतिम एनआरसी को अभी औपचारिक रूप से अधिसूचित किया जाना बाकी है। अगस्त 2019 में जारी ‘अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी’ के अनुसार, 19.07 लाख आवेदकों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए थे, जबकि 3.11 करोड़ आवेदकों के नाम एनआरसी में शामिल किए गए थे। उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे में भारत के महापंजीयक ने कहा कि राज्य एनआरसी समन्वयक अब भी एनआरसी के आंकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए एक ‘‘सुरक्षा व्यवस्था’’ तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
हलफनामे में कहा गया है कि आंकड़े अभी तक महापंजीयक को नहीं सौंपे गए हैं और वह इन्हें प्राप्त करने के बाद ही अंतिम एनआरसी को अधिसूचित कर सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने पहले राज्य एनआरसी समन्वयक को अंतिम सूची से बाहर किए गए लोगों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करने के लिए एक व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया था, ताकि वे अपने नाम खारिज किए जाने को संबंधित न्यायाधिकरणों में चुनौती दे सकें। इसके बाद राज्य एनआरसी समन्वयक ने अक्टूबर 2020 में भारत के महापंजीयक (आरजीआई) को बताया था कि अस्वीकृति पर्चियां तभी जारी की जा सकती हैं, जब आरजीआई अंतिम एनआरसी को अधिसूचित कर दें।
असम सरकार द्वारा अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई छह नवंबर तक टाल दी। उच्चतम न्यायालय असम राज्य जमीयत उलेमा, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाओं में एनआरसी से बाहर किए गए लोगों को अस्वीकृति पर्चियां और अंतिम सूची में शामिल लोगों को एनआरसी कार्ड जारी करने का अनुरोध किया गया है।
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