बचाव करना नामुमकिन था, AAP छोड़ Congress में शामिल हुईं Priyanka Kakkar
प्रियंका कक्कड़ ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। उन्होंने कहा कि वह अपनी पुरानी पार्टी के उन कामों का अब और बचाव नहीं कर सकतीं, जिन्हें उन्होंने बचाव के लायक न होने वाला बताया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि वह दिल्ली को हरा-भरा, साफ़-सुथरा, प्रगतिशील और सुरक्षित देखना चाहती हैं, ठीक वैसी ही दिल्ली जैसा वह शहर था जिसमें वह पली-बढ़ी थीं।
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प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि मुझे वही दिल्ली वापस चाहिए जिसमें मैं बड़ी हुई—एक ऐसी हरी-भरी, साफ़-सुथरी, प्रगतिशील और सुरक्षित दिल्ली जो मेरे पालन-पोषण का हिस्सा थी। भारतीय राजनीति में एक दशक से ज़्यादा के अनुभव के बाद, मेरा सचमुच मानना है कि सिर्फ़ कांग्रेस ही ऐसा कर सकती है। कक्कड़ ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी तारीफ़ की और कहा कि वह उन्हें एक सच्चे नेता मानती हैं जो अपनी बात कहने से नहीं डरते।
उन्होंने कहा कि मैंने यह भी देखा है कि अगर आज हमारे देश की राजनीति में कोई नेता सचमुच सच्चा है और सच्चाई को बढ़ावा देने से नहीं डरता, तो वह राहुल गांधी हैं। वह आज ऐसे इकलौते नेता हैं जिन्होंने कैमरे के सामने कभी आँसू नहीं बहाए और उन्हें नीचा दिखाने या अपमानित करने के लिए पूरी मशीनरी लगाए जाने के बावजूद मज़बूती से डटे रहे। AAP छोड़ने के अपने फ़ैसले के बारे में बताते हुए, कक्कड़ ने आरोप लगाया कि समय के साथ पार्टी का रवैया बदल गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में पार्टी ने समझदार और समर्पित लोगों को आकर्षित किया था, लेकिन बाद में उन्हें बनाए रखने में उसे मुश्किल हुई।
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उन्होंने कहा कि मैं यह बात अपने निजी अनुभव के आधार पर कह रही हूँ। मैंने AAP इसलिए छोड़ी क्योंकि वे पहले दिखाते थे कि वे बंगले वगैरह नहीं लेंगे, लेकिन बाद में वे प्राइवेट हेलीकॉप्टर में सफ़र करने लगे। मैं ऐसी चीज़ों का बचाव नहीं कर सकती थी जिनका बचाव करना मुमकिन ही नहीं था। कक्कड़ ने यह भी आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने राजस्थान में बूथ-स्तर पर अच्छा काम नहीं किया था, उन्हें बाद में पंजाब में पद और दूसरी सुविधाएं दी गईं। उन्होंने पूछा कि मैं कब तक ऐसी चीज़ों का बचाव करती रहूँगी जिनका बचाव करना मुमकिन नहीं है? उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना का भी ज़िक्र किया और वोटिंग के अधिकारों तथा चुनावी संस्थाओं के कामकाज को लेकर चिंता जताई।क्कड़ ने कहा कि उनका मानना है कि इन मुद्दों को जनता के सामने लाया जाना चाहिए।
MRFA फाइटर जेट डील इसी वित्त वर्ष में संभव: एयर चीफ मार्शल AP Singh
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत इस वित्त वर्ष में बहुप्रतीक्षित बहु-उद्देशीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) सौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बशर्ते सब कुछ योजना के मुताबिक हो। भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद पहल के तहत फरवरी में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव को मूल रूप से करीब दो दशक पहले मंजूरी दी गई थी।
परियोजना से संबंधित कीमतों पर बातचीत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर फिलहाल चर्चा जारी है। एयर चीफ मार्शल ने वायुसेना दिवस से पहले एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि अगर उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम में देरी होती है तो वायुसेना को किसी अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “रूस ने हमें एसयू-57 लड़ाकू विमानों की पेशकश की है लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।” एयर चीफ मार्शल सिंह ने लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रनों की घटती संख्या के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारतीय वायुसेना को अगले कुछ वर्षों में हर साल कम से कम 36 से 40 विमानों की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता के संदर्भ में वायु शक्ति महत्वपूर्ण बनी हुई है और भारत को अपनी वायु शक्ति को और बढ़ाने की जरूरत है। एयर चीफ मार्शल ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण के बारे में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिए वायुसेना की क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा, “हमें कृत्रिम मेधा से सक्षम वायुसेना तैयार करनी होगी।” सिंह ने कहा कि समग्र युद्धक तैयारी के लिए आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है।
वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमान के इंजन का उत्पादन भारत में करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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