दृष्यम 3 से डरे 'उड़ता तीर' के मेकर्स:क्लैश से बचने के लिए दूसरी बार बदली रिलीज डेट, जानिए पोस्टपोन की 3 वजह और एक्सपर्ट की राय
आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की अपकमिंग फिल्म 'उड़ता तीर' की रिलीज दूसरी बार टल गई है। पहले फिल्म 11 सितंबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन बाद में रिलीज डेट 9 अक्टूबर हो गई। लेकिन अब दृष्यम 3 की बेहतरीन कमाई होते देख मेकर्स ने फिर इसकी रिलीज टाल दी है। जानते हैं फिल्म बार-बार पोस्टपोन करने की 3 बड़ी वजह और ट्रेड एक्सपर्ट की राय- उड़ता तीर पोस्टपोन होने की 3 बड़ी वजह- 1. दृष्यम 3 से क्लैश पर नुकसान का अनुमान अजय देवगन, तबू और जयदीप अहलावत स्टारर फिल्म दृष्यम 3, 2 अक्टूबर को रिलीज हुई है। इस फिल्म ने पहले ही दिन 66.75 करोड़ की कमाई कर रिकॉर्ड बनाया है। फिल्म का मौजूदा बज देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि फिल्म अगले हफ्ते तक सिनेमाघरों और बॉक्स ऑफिस में पकड़ बनाए रखेगी, ऐसे में अगर उड़ता तीर इसके साथ रिलीज हुई, तो फिल्म को नुकसान हो सकता है। 2. ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म का रिलीज होना मराठी फिल्म गोंधल (2025) को ऑस्कर में ऑफिशियल एंट्री मिली है। 9 अक्टूबर को इस फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज किया जा रहा है। गोंधल को सिनेमाघरों में स्क्रीन दी जाएंगी और दृष्यम 3, हनुमान अंश पहले ही सिनेमाघरों में होंगी। ऐसे में उड़ता तीर के लिए स्क्रीन काउंट कम मिलने का खतरा हो सकता था। 3. यामी गौतम की फिल्म का एक हफ्ते बाद ही रिलीज होना अगर उड़ता तीर, 9 अक्टूबर को रिलीज होती, तो दृष्यम 3, गोंधल, हनुमान अंश से क्लैश तो होता, लेकिन साथ ही एक हफ्ते बाद ही फिल्म को 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली यामी गौतम की नई नवेली का सामना भी करना पड़ता। नई नवेली, पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जबकि उड़ता तीर का बज कम है। ऐसे में फिल्म के लिए डिस्ट्रीब्यूशन और थिएटर मिलने में दिक्कतें हो सकती थीं। जानिए क्या है उड़ता तीर पोस्टपोन होने पर ट्रेड एक्सपर्ट की राय- फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट सुमित कड़ेल ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा है- ‘दृष्यम 3 इस साल की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर है। इस फिल्म का वर्ड ऑफ माउथ भी एक्सेप्शनल है। यानी पहले और दूसरे हफ्ते में इसका कलेक्शन बड़ा होगा। इसलिए उड़ता तीर के मेकर्स ने पोस्टपोन करने का फैसला किया, जिससे एक क्लीन और खाली विंडो मिले रिलीज और अच्छा बिजनेस करने के लिए।’ नई रिलीज डेट से भी है फिल्म को खतरा 9 अक्टूबर की बजाए अब ये फिल्म 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगी। अब इस फिल्म का क्लैश सोनाक्षी सिन्हा, जहीर इकबाल की फिल्म तू है मेरी किरण, गुरमीत चौधरी, ईशा मालवीय की फिल्म तुम मेरे हो और जैकी श्रॉफ की फिल्म काली खेती से होगा। अगर फिल्म इस क्लैश से बच भी जाए, तो 15 दिन बाद यानी 8 नवंबर को रणबीर कपूर की मेगा बजट फिल्म रामायणः पार्ट-1 रिलीज हो रही है। फिल्म को परफॉर्म करने के लिए महज 15 दिन ही मिलेंगी। रामायण को बड़े स्कैल पर रिलीज किया जा रहा है, जिससे उसे अधिकतम स्क्रीन्स दी जाएंगी। पाकिस्तानी जासूस की कहानी है उड़ता तीर आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की लीड रोल वाली यह फिल्म एक पाकिस्तानी जासूस की कहानी पर आधारित है। वह जासूस भारत में घुसता है और एक दुर्घटना का शिकार हो जाता है। इसके बाद उसकी याददाश्त चली जाती है। उसे यकीन हो जाता है कि वह भारतीय है। वह भारत का कट्टर देशभक्त भी बन जाता है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। फिल्म में आयुष्मान खुराना और सारा अली खान लीड रोल में हैं। 'उड़ता तीर' को करण जौहर, आदर पूनावाला, अपूर्व मेहता, गुनीत मोंगा कपूर और अचीन जैन ने प्रोड्यूस किया है।
संजय दत्त को हथकड़ी लगते देख रो पड़े पिता:एक्टर बोले- वो सदमे में थे, अधिकारी ने मजाक उड़ाकर कहा- जेल में सिगरेट नहीं मिलती, मजेदार जवाब दिया
संजय दत्त ने हाल हीमें शेखर सुमन के शो शेखर टुनाइट में जेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके पिता सुनील दत्त के सामने उन्हें हथकड़ी पहनाई गई थी। उस समय उनके पिता की आंखों में आंसू आ गए थे। संजय दत्त को 1993 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने के आरोप में जेल की सजा हुई थी। बाद में वे आतंकवाद के आरोपों से बरी हो गए, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए और कई बार जेल गए। शेखर सुमन के टॉक शो में संजय दत्त ने बताया कि जेल अधिकारियों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की थी। शेखर सुमन ने दर्शकों से कहा, ‘संजय दत्त को ‘अंडा सेल’ में रखा गया था, फिर भी उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा।’ इसके बाद उन्होंने संजय से पूछा, ‘क्या कभी ऐसी स्थितियों में आपको अपनी जान देने का ख्याल आया?’ संजय दत्त ने जवाब दिया, ‘कभी नहीं।’ इसके बाद उन्होंने संजय से पूछा, ‘वह कौन-सा पल था, जब आपने खुद को सबसे कमजोर महसूस किया?’ संजय ने कहा, ‘मुझे पता था कि मेरे पिता और परिवार ने बहुत मुश्किल हालात का सामना किया है। लेकिन मैंने कभी खुद को कमजोर महसूस नहीं किया।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जब पुलिस पहली बार आई और मुझे हथकड़ी पहनाई, तो मेरे पिता सदमे में आ गए। उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा, “तुम मेरे बेटे के साथ क्या कर रहे हो?”’ संजय ने बताया, ‘मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और कहा, “आप इन हथकड़ियों से परेशान क्यों हो रहे हैं? ऐसा मत कीजिए। यह बस एक प्रक्रिया है, प्लीज परेशान न हों।”, जबकि असल में, यह मुझे अंदर ही अंदर तोड़ रहा था। लेकिन मुझे उनके लिए मजबूत बने रहना था।’ संजय दत्त ने कहा कि स्टारडम और सुविधाओं के बावजूद उन्होंने खुद को कभी दूसरों से बेहतर नहीं समझा। उन्होंने कहा, ‘देखिए, इतने सालों में भी मुझमें अपने स्टारडम को लेकर कभी कोई घमंड नहीं आया। मुझमें ऐसी कोई बात नहीं है।’ सिगरेट नहीं मिली तो बीड़ी मांगी संजय दत्त के मुताबिक, जेल अधिकारियों को लगता था कि उनकी सेलिब्रिटी वाली सुख-सुविधाएं छीनने से वे टूट जाएंगे। संजय ने बताया कि अधिकारियों ने उनका मजाक उड़ाया। उनमें से एक उनके पास आया और बोला, ‘तुम्हें यहां सिगरेट नहीं मिलेगी। अब क्या करोगे?’ एक्टर ने कहा, “सर, यहां बीड़ी तो मिल जाएगी।”’ जानिए संजय दत्त केस की पूरी डीटेल- 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए। अलग-अलग जगहों पर हुए इन धमाकों में 257 लोगों की मौत और 713 लोग घायल हुए थे। जांच में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का पता चला। इसी जांच के दौरान अभिनेता संजय दत्त का नाम सामने आया। वह इस मामले में आरोपी नंबर 117 बनाए गए। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, 16 जनवरी 1993 को तीन AK-56 राइफलें, 250 राउंड गोलियां और कुछ हैंड ग्रेनेड उनके घर लाए गए थे। बाद में इनमें से दो राइफलें और कुछ गोला-बारूद वहां से ले जाए गए। जांच में संजय के घर से AK-56 राइफल, 9mm पिस्तौल बरामद की गई। 12 मार्च को हुए धमाकों के समय संजय दत्त मॉरीशस में एक फिल्म शूट कर रहे थे। करीब एक महीने बाद, 19 अप्रैल 1993 को संजय दत्त मुंबई लौटे। मुंबई क्राइम ब्रांच ने एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया। उन पर अवैध रूप से रखने का आरोप था। गिरफ्तारी के बाद संजय दत्त ने पुलिस के सामने हथियार रखने की बात स्वीकार की थी। रिकॉर्ड के अनुसार 28 अप्रैल 1993 को उन्होंने पुलिस के सामने बयान दिया, जो बाद में उन्होंने वापस ले लिया। 5 मई 1993 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी। जुलाई 1994 में ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और 4 जुलाई 1994 को उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्होंने करीब 16 महीने जेल में बिताए। अक्टूबर 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। उस समय तक वह लगभग 18 महीने जेल में रह चुके थे। करीब 13 साल तक चली सुनवाई के बाद नवंबर 2006 में TADA कोर्ट ने संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। लेकिन उन्हें TADA के तहत आतंकवादी साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया। यानी अदालत ने यह नहीं माना कि वह 1993 के मुंबई धमाकों की साजिश का हिस्सा थे। 2007 में उन्हें 6 साल की सजा सुनाई गई। 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आर्म्स एक्ट वाली सजा को बरकरार रखा, लेकिन सजा को 6 साल से घटाकर 5 साल कर दिया। चूंकि संजय दत्त पहले ही लगभग 18 महीने जेल में रह चुके थे, उन्हें बाकी अवधि जेल में बितानी थी। इसके बाद उन्होंने 16 मई 2013 को सरेंडर किया और पुणे की यरवडा जेल भेजे गए। फरवरी 2016 में अच्छे व्यवहार आदि के आधार पर उनकी सजा पूरी होने से कुछ महीने पहले रिहाई हुई।
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