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Prabhasakshi NewsRoom: America ने Iran को फिर से घेरा! Trump ने तीसरा विमानवाहक पोत और 10 हजार सैनिक भेजे, दुनिया टेंशन में

दो-तीन दिन पहले तक खबर थी कि अमेरिकी सेना इराक से अपना बोरिया-बिस्तर समेट रही है। 30 सितंबर को अमेरिकी और गठबंधन बलों ने इराक में अपनी आखिरी प्रमुख तैनाती भी समाप्त कर दी। ईरान और उसके समर्थकों ने इसे अमेरिका के पश्चिम एशिया से पीछे हटने की शुरुआत के तौर पर पेश किया। लेकिन अब तस्वीर अचानक पलटती दिखाई दे रही है। इराक से सैनिक निकले हैं, मगर अमेरिकी सैन्य शक्ति पश्चिम एशिया से दूर जाने की बजाय समुद्र और हवा के रास्ते फिर से ईरान के आसपास जमा हो रही है।

यही वह बदलाव है जिसने एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल गहरा दिए हैं। अमेरिका ने एक और विमानवाहक पोत और हजारों सैनिकों को क्षेत्र की ओर रवाना कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक नवंबर के अंत तक पश्चिम एशिया के आसपास तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत और दो उभयचर युद्ध समूह तैनात हो सकते हैं। इस अतिरिक्त सैन्य जमावड़े में करीब 9,000 से 10,000 अमेरिकी सैनिक, नौसैनिक और मरीन शामिल हो सकते हैं।

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सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अमेरिका इराक से निकलते ही समुद्री शक्ति को ईरान के आसपास क्यों बढ़ा रहा है? हम आपको बता दें कि अमेरिका का यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक पोत सैन डिएगो से रवाना हो चुका है। इसके एक दिन बाद यूएसएस माकिन आइलैंड के नेतृत्व वाला उभयचर युद्ध समूह भी पश्चिम एशिया के लिए निकल पड़ा। माकिन आइलैंड के साथ 13वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के दो हजार से अधिक मरीन हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस पूरे अभियान में नौसैनिकों और मरीन समेत नौ से दस हजार अतिरिक्त अमेरिकी सैन्यकर्मी शामिल हो सकते हैं।

हम आपको बता दें कि अमेरिका के पास पहले से ही क्षेत्र में लगभग 50 हजार सैनिक मौजूद हैं। नई तैनाती के बाद उसकी सैन्य मौजूदगी और अधिक शक्तिशाली हो जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि इस शक्ति-संकेंद्रण से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिक सैन्य विकल्प उपलब्ध होंगे। यानी संदेश बिल्कुल साफ है कि ईरान के आसपास समुद्री, हवाई और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

हम आपको यह भी बता दें कि विमानवाहक पोत महज युद्धपोत नहीं होता। उसके साथ लड़ाकू विमान, मिसाइल रक्षा प्रणाली, निगरानी क्षमता और कई अन्य युद्धपोत चलते हैं। इसके साथ उभयचर युद्ध समूह और मरीन बल जुड़ जाएं तो समुद्र से हवाई हमले, समुद्री सुरक्षा, त्वरित सैन्य कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर तटीय अभियान जैसे कई विकल्प एक साथ खुल जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी बेड़े में एफ-35 लड़ाकू विमान भी शामिल होंगे। नवंबर तक तीन विमानवाहक पोतों और दो उभयचर समूहों की मौजूदगी की संभावना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महज सैनिकों की संख्या बढ़ाने से कहीं बड़ा सैन्य संदेश है।

हालांकि इसका यह अर्थ नहीं कि अमेरिका ने ईरान पर नए हमले का अंतिम निर्णय ले लिया है। कुछ मौजूदा जहाजों की तैनाती बदलने या उन्हें राहत देने की प्रक्रिया भी इसमें शामिल हो सकती है। लेकिन अमेरिकी सैन्य विकल्पों को सक्रिय बनाए रखने की तैयारी स्पष्ट दिखाई दे रही है। देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विस्फोटक पहलू है होर्मुज जलडमरूमध्य। दुनिया के महत्वपूर्ण तेल और गैस समुद्री मार्गों में शामिल इस संकरे रास्ते पर तनाव बढ़ते ही उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

2 अक्टूबर को होर्मुज से गुजर रहे करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाले एक सुपरटैंकर को अज्ञात प्रक्षेप्य से नुकसान पहुंचने की खबर ने जोखिम को और बढ़ा दिया। ऐसे घटनाक्रम से जहाजरानी कंपनियों, बीमा बाजार और तेल व्यापार पर तत्काल दबाव पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका की सैन्य गतिविधि के साथ-साथ ऊर्जा मोर्चे पर भी असाधारण हलचल दिखाई दे रही है।

उधर, जी-7 देशों ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति संकट को नियंत्रित करने के लिए अगले चार महीनों में 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन भंडार बाजार में छोड़ने पर सहमति जताई है। इसमें डीजल की बड़ी मात्रा शुरुआती 20 दिनों में ही जारी करने की योजना है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय से लागू किया जाएगा। यह फैसला अपने आप में बताता है कि मामला केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया का तनाव अब दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई के मोर्चे तक पहुंच चुका है। देखा जाये तो जब एक तरफ तीन विमानवाहक पोत ईरान के आसपास पहुंचने की तैयारी कर रहे हों, दूसरी तरफ हजारों मरीन रास्ते में हों, होर्मुज में टैंकर निशाना बन रहा हो और जी-7 को अपने रणनीतिक तेल भंडार खोलने पड़ रहे हों, तब दुनिया के लिए चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

बहरहाल, पश्चिम एशिया में अगला विस्फोट केवल किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी लपटें पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले सकती हैं। ऐसे में सैन्य ताकत के प्रदर्शन से आगे बढ़कर सभी पक्षों को शांति और कूटनीति का रास्ता तलाशना होगा। दुनिया ने देखा कि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमलों से भी स्थायी समाधान नहीं निकल सका था और मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी अब तक निर्णायक परिणाम नहीं दे पाई हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि अमेरिका और ईरान किसी भी पूर्व शर्त और सैन्य दबाव से ऊपर उठकर सीधे आमने-सामने बैठें और बातचीत की मेज पर ऐसा रास्ता तलाशें, जो टकराव को रोकने के साथ-साथ क्षेत्र और पूरी दुनिया को एक और विनाशकारी युद्ध के खतरे से बचा सके।

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Jitiya Vrat Paran Recipe: जितिया व्रत पारण के लिए ऐसे बनाएं पारंपरिक सतपुतिया और छोटा चना

बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। जितिया व्रत माताएं अपनी संतानों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए रखती हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस निर्जला कठिन व्रत का समापन पारण के साथ होता है।

पारण वाले दिन सुबह स्नान करके भगवान जी की पूजा-अर्चना के बाद व्रत खोला जाता है। इस दिन विशेष रूप से पारंपरिक बिहारी व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें सतपुतिया यानी झिंगनी की सब्जी और छोटे चने (घूघनी) का धार्मिक के साथ ही पारंपरिक महत्व माने जाते हैं। आइए आपको सतपुतिया और छोटे चने को बनाने की रेसिपी बताते हैं-

सतपुतिया (झिंगनी) की सब्जी बनाने की पारंपरिक विधि

आमतौर पर सतपुतिया को कई जगहों पर झिंगनी या तोरई परिवार की खास किस्म कहा जाता है, जितिया पारण की सबसे मुख्य सब्जी है। देखें रेसिपी-

सामग्री

500 ग्राम- सतपुतिया
2- हरी मिर्च
आधा चम्मच- जीरा,
एक चुटकी- हींग
हल्दी पाउडर
धनिया पाउडर
स्वादानुसार नमक
सरसों का तेल

बनाने की विधि

- सबसे पहले सतपुतिया को धोकर छील लें और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।

- इस बात का ध्यान रखें कि सतपुतिया में पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है, इसलिए इसमें अलग से पानी न डालें।

- अब कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें।

- इसके बाद तेल गर्म होने पर उसमें जीरा और हींग का तड़का लगाएं।

- इसमें कटी हुई हरी मिर्च और प्याज डालकर हल्का सुनहरा भून लें

- अब कटी हुई सतपुतिया, हल्दी, धनिया और नमक डालकर अच्छी तरह से मिला लें।

-  इसके बाद कड़ाही को ढककर मध्यम आंच पर पकने दें।

- इसको आप बीचों-बीच में चलाते रहे हैं, जब तक कि पानी पूरी तरह सूख न जाए और सब्जी नरम न हो जाए।

छोटा चना की पारंपरिक विधि क्या है?

सतपुतिया की सब्जी के साथ छोटे काले चने की सूखी सब्जी या रसदार घूघनी का संयोजन जितिया पारण के खाने का पूर्ण बनाया जाता है। नीचे पढ़े रेसिपी-

सामग्री

1 कप छोटे काले चने
1 चम्मच अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट
आधा चम्मच जीरा
तेजपत्ता
हल्दी
लाल मिर्च पाउडर
गरम मसाला
नमक
सरसों का तेल

बिहारी स्टाइल छोटे चने बनाने की तरीका

- सबसे पहले भीगे हुए चनों को कुकर में थोड़ा-सा पानी और नमक डालकर 4 से 5 सीटी आने तक अच्छी तरह उबाल लें।

- अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। इसमें जीरा और तेजपत्ता डाल दें।

- इसके बाद अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट डालकर कच्चापन दूर होने तक भूनें।

- उबले हुए चने और सूखे मसाले (हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर) अच्छे से मिला लें।

- मसालों को चनों के साथ 3 से 4 मिनट तक भून लें, जिससे स्वाद अंदर तक चला जाए।

- अंत में थोड़ा-सा गरम मसाला छिड़कर इसे आंच से उतार लें।
 

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  Sports

Abhishek Sharma ने T20I में तोड़ा Virat Kohli का रिकॉर्ड, Asian Games 2026 में रचा इतिहास

2026 एशियन गेम्स में पुरुषों के क्रिकेट गोल्ड मेडल मैच में पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ओपनर अभिषेक शर्मा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 28 गेंदों में 61 रन बनाए और भारत-पाकिस्तान T20I मैचों की एक पारी में सबसे ज़्यादा छक्के लगाने के युवराज सिंह के रिकॉर्ड की बराबरी की। शर्मा की पारी में सात छक्के और तीन चौके शामिल थे और उनका स्ट्राइक रेट 217.68 रहा। सात छक्के लगाकर उन्होंने युवराज सिंह के उस रिकॉर्ड की बराबरी की, जो 2012 में अहमदाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ़ मैच में बना था। इससे पहले, शर्मा ने 2025 में दुबई में एशिया कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ़ पांच छक्के लगाए थे।

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इस पारी के साथ, T20 इंटरनेशनल में पाकिस्तान के खिलाफ़ शर्मा के छक्कों की कुल संख्या 14 हो गई, जिससे उन्होंने भारत के पूर्व बल्लेबाज़ विराट कोहली के 11 छक्कों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 26 साल के इस खिलाड़ी ने एक कैलेंडर ईयर में T20 क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा सबसे ज़्यादा छक्के लगाने का अपना ही रिकॉर्ड भी बेहतर किया; 2026 में उनके छक्कों की संख्या 104 हो गई। उन्होंने 2025 में 108 छक्कों का रिकॉर्ड बनाया था।

वैभव सूर्यवंशी 2026 में 90 छक्कों के साथ दूसरे नंबर पर हैं, जबकि शर्मा ने 2024 में 87 छक्के लगाए थे। 2022 में सूर्यकुमार यादव ने 85 छक्के लगाए थे। शर्मा एक कैलेंडर ईयर में सबसे तेज़ी से 100 छक्के लगाने वाले खास खिलाड़ियों के ग्रुप में भी शामिल हो गए; उन्होंने यह उपलब्धि 651 गेंदों में हासिल की। ​​उनसे आगे सिर्फ़ वेस्टइंडीज़ के ऑलराउंडर आंद्रे रसेल हैं, जिन्होंने 2019 में 589 गेंदों में यह कारनामा किया था। इस लिस्ट में उनके बाद डेवाल्ड ब्रेविस (2025 में 653 गेंदें), क्रिस गेल (724) और करणबीर सिंह (728) का नंबर आता है।

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इसके अलावा, शर्मा ने 3,513 गेंदों में 400 T20 छक्के पूरे किए। इस मामले में वे रसेल (3,027) के बाद तीसरे और गेल (3,557) से आगे हैं। इस लिस्ट में शामिल अन्य खिलाड़ियों में टिम डेविड (3,803), कीरोन पोलार्ड (3,944) और निकोलस पूरन (4,045) हैं। पुरुषों के T20 गोल्ड मेडल मैच में भारत के कुल 211/6 के स्कोर में शर्मा के 61 रनों का अहम योगदान रहा। उन्हें तिलक वर्मा का साथ मिला, जिन्होंने 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए। पाकिस्तान की ओर से अहमद दानियाल और अराफात मिन्हास ने दो-दो विकेट लिए।

Sat, 03 Oct 2026 12:44:00 +0530

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