तुर्किये से भारत लाया गया कथित ड्रग किंगपिन नवप्रीत सिंह, फर्जी पहचान से हासिल की थी नागरिकता
कथित ड्रग किंगपिन नवप्रीत सिंह को तुर्किये से भारत वापस लाया गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बतायाा कि नवप्रीत सिंह ने 'नवाब विर्क' नाम की फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके तुर्किये की नागरिकता हासिल की थी. वह तुर्किये में बैठकर अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क चला रहा था.
नवप्रीत पर लगे हैं ये आरोप
नाम/पहचान: नवप्रीत सिंह पर तुर्किये में ‘नवाब विर्क’ नाम से कथित तौर पर पहचान बनाने का आरोप लगाया गया है.
नशीले पदार्थों की तस्करी: उस पर अफगानिस्तान से भारत तक हेरोइन और मेथामफेटामाइन पहुंचाने का आरोप है.
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: भारतीय जांच एजेंसियों के अनुसार वह विदेश में रहकर भारत में चल रहे ड्रग नेटवर्क से जुड़ा हुआ था.
भारत वापसी: बयान के अनुसार तुर्किये से उसे भारत लाकर अब संबंधित आपराधिक और ड्रग तस्करी के मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
दिल्ली पुलिस की एक जांच में भी नवप्रीत सिंह को विदेश से संचालित कथित ड्रग नेटवर्क का प्रमुख बताया गया था. मई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अजरबैजान से भारत लाए गए प्रभदीप सिंह पर नवप्रीत सिंह के लिए भारत में ड्रग ऑपरेशन संभालने का आरोप था. उस मामले में 358 किलो हेरोइन बरामद होने की बात सामने आई थी.
Modi govt has achieved a historic milestone by securing the deportation of hardened narco-trafficking kingpin Navpreet Singh from Türkiye.
— Amit Shah (@AmitShah) October 3, 2026
Obtaining Turkish citizenship under the fake identity of Navab Virk, he had continued to smuggle heroin and methamphetamine to India from…
‘एजेंसियों ने परत-दर-परत पहचान उजागर की’ का मतलब
बयान में “ripping apart veil after veil to unmask his true identity” का अर्थ है कि भारतीय एजेंसियों ने उसकी असली पहचान और गतिविधियों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच की. यानी कथित फर्जी नाम और विदेश में बनाई गई पहचान के पीछे मौजूद वास्तविक व्यक्ति की पहचान स्थापित की गई.
सरकार के ड्रग-विरोधी अभियान का बड़ा दावा
बयान के अंत में कहा गया है कि मोदी सरकार दिसंबर 2029 तक हर नार्को-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह सरकार की नीति और लक्ष्य से जुड़ा राजनीतिक दावा है; इसे एक घोषित लक्ष्य के रूप में रिपोर्ट किया जाना चाहिए, न कि पहले से हासिल परिणाम के रूप में.
5 प्रमुख बिंदु:
1. तुर्किये से भारत लाया गया नवप्रीत सिंह
2. ‘नवाब विर्क’ नाम से कथित फर्जी पहचान बनाने का आरोप
3. अफगानिस्तान से हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी का आरोप
4. भारत में ड्रग नेटवर्क चलाने के मामले में एजेंसियों की जांच
5. सरकार का दिसंबर 2029 तक नार्को-कार्टेल के खिलाफ अभियान तेज करने का दावा
झारखंड के छात्रों के लिए खुशखबरी, 540 हॉस्टल में मुफ्त भोजन की तैयारी; हर विद्यार्थी के लिए ₹3,000 का प्रावधान
Jharkhand News: राज्य के कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अब इन छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को भोजन पकाने की जद्दोजहद से मुक्ति मिलने जा रही है. सरकार ने फैसला किया है कि छात्रावासों में रहने वाले सभी विद्यार्थियों को पौष्टिक और नियमित भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए कल्याण विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है और सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर तय समयसीमा के भीतर पूरी प्रक्रिया समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं. इस वर्ष के अंत तक या फिर जनवरी के पहले सप्ताह से विद्यार्थियों की थाली में सरकार की ओर से गर्म खाना परोसा जाने लगेगा.
25 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
वर्तमान समय में पूरे राज्य के भीतर कल्याण विभाग के लगभग पांच 100 चालीस छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं. इन सभी छात्रावासों को मिलाकर पच्चीस हजार से अधिक छात्र-छात्राएं रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. इनमें ज्यादातर विद्यार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से शहर आकर शिक्षा हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं. अब तक इन छात्रावासों में केवल रहने के लिए कमरा और बुनियादी आवासीय सुविधा ही मिल पाती थी. खाने-पीने का सारा इंतजाम विद्यार्थियों को खुद अपने पैसों से और अपने स्तर पर ही करना पड़ता था. इससे उनकी पढ़ाई का कीमती समय भी बर्बाद होता था और उन पर आर्थिक बोझ भी लगातार बना रहता था.
हर महीने प्रत्येक छात्र पर 3 हजार का बजट तय
योजना के प्रारूप के अनुसार सरकार ने विद्यार्थियों की सेहत और पोषण का पूरा ध्यान रखा है. छात्रावास में रहने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के खान-पान के लिए सरकार हर महीने तीन हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराएगी. इस बजट के माध्यम से छात्रों को एक दिन में तीन बार संतुलित और भरपेट भोजन दिया जाएगा. सुबह के समय पौष्टिक नाश्ता मिलेगा, जबकि दोपहर और रात के समय दाल, चावल, रोटी और हरी सब्जियों से युक्त ताजा भोजन परोसा जाएगा. मेनू को इस तरह से तैयार किया जा रहा है ताकि छात्रों को घर जैसा और स्वच्छ भोजन नियमित रूप से मिल सके.
जिला स्तर पर टेंडर से चुनी जाएगी निजी एजेंसी
भोजन वितरण व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए एजेंसियों के चयन का तरीका बदल दिया गया है. पहले राज्य मुख्यालय से एजेंसी चयन करने का प्रयास हुआ था, लेकिन उसमें आई रुकावटों को देखते हुए अब यह जिम्मेदारी संबंधित जिलों के उपायुक्तों को 100ंप दी गई है. विभाग ने सभी जिला प्रशासनों को इसी महीने टेंडर जारी कर प्रक्रिया पूरी करने का सख्त आदेश दिया है. जिला स्तर पर चुनी गई एजेंसी ही छात्रावासों में खान-पान की पूरी व्यवस्था संभालेगी. जैसे ही जिला स्तर पर टेंडर की औपचारिकता पूरी होगी, राज्य स्तर से भोजन मद की राशि जिलों को आवंटित कर दी जाएगी.
100 विद्यार्थियों पर तैनात होंगे तीन समर्पित कर्मी
छात्रावासों में रसोई और डाइनिंग एरिया की बेहतर देखभाल के लिए कार्यबल का पैमाना भी तय कर दिया गया है. प्रत्येक 100 विद्यार्थियों के अनुपात पर तीन कर्मियों की तैनाती की जाएगी. इनमें रसोई और खान-पान के प्रबंधन के लिए एक प्रबंधक, भोजन तैयार करने के लिए एक कुशल रसोइया और परिसर को साफ-सुथरा रखने के लिए एक सफाई कर्मी शामिल होगा. इन सभी कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान अलग से किया जाएगा, जिसका छात्र के भोजन बजट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एजेंसी के चयन के तुरंत बाद इन सभी कर्मियों की तैनाती कर दी जाएगी ताकि नए सत्र से बिना किसी बाधा के भोजन मिलना शुरू हो जाए.
देरी की वजह और नई रणनीति पर विभागीय रुख
इस योजना को लेकर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सरकार विद्यार्थियों की हर जरूरत के प्रति पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने बताया कि पहले राज्य स्तर पर टेंडर निकाला गया था, लेकिन पर्याप्त एजेंसियों के शामिल नहीं होने के कारण उस प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा था. इसी वजह से योजना को लागू करने में कुछ वक्त लग गया. अब पूरी प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करते हुए जिलों को 100ंप दिया गया है. जिलों में टेंडर तेजी से पूरे हो रहे हैं. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि दिसंबर के अंत तक या जनवरी की शुरुआत से हर छात्रावास में भोजन व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू कर दी जाएगी.
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