ठाणे में प्रदीप पूर्णेकर मर्डर केस: परिजनों ने CBI जांच और हत्यारों को फांसी की मांग की
ठाणे, तीन अक्टूबर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता प्रदीप पूर्णेकर के परिजनों ने स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए उनकी (प्रदीप पूर्णेकर) हत्या के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। पूर्णेकर के परिवार ने शुक्रवार को दौरे पर आए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं, विधायक संजय केलकर और विधान परिषद सदस्य निरंजन डावखरे से मुलाकात की। परिजनों ने उनसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तत्काल मुलाकात कराने का आग्रह किया, ताकि मामले की बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्णेकर की पत्नी और बेटे ने हत्यारों के लिए मृत्युदंड और राजनीतिक या सरकारी पदों पर बैठे किसी भी संदिग्ध को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने हमले के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की। शिवसेना (उबाठा) के ठाणे मंडल प्रमुख पूर्णेकर को 29 सितंबर की रात कपूरबावडी थाना क्षेत्र में गोली मारी गई थी और चाकू से हमला किया गया था।
उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। इस बीच, एक अधिकारी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपियों में से एक निखिल यादव उनकी गतिविधियों पर नजर रखता था जो पूर्णेकर के घर के पास खाने-पीने की दुकान संचालित करता था।
वह शिवसेना (उबाठा) नेता के कार्यक्रम, आने-जाने आदि पर भी करीबी नजर रख रहा था। पुलिस ने इससे पहले पप्पू शिंदे को हमलावरों को जरूरी मदद मुहैया कराने के संदेह में गिरफ्तार किया था, जो पूर्णेकर का करीबी परिचित है और हमले के दौरान उनके कार्यालय में मौजूद था। अधिकारी ने कहा कि अपराध शाखा इस बात की जांच कर रही है कि यादव ने हथियार चलाने का प्रशिक्षण कहां से लिया, उसे हथियार किसने मुहैया कराए और क्या इस वारदात के लिए उसे सुपारी के तौर पर कोई रकम दी गई थी।
पूर्णेकर के परिवार ने इससे पहले ठाणे की पूर्व महापौर एवं शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता मीनाक्षी शिंदे तथा उनके पति राजेंद्र शिंदे पर आरोप लगाए थे और दावा किया था कि उन्होंने इस अपराध की साजिश रची थी। मीनाक्षी शिंदे ने शुक्रवार को हत्या से अपना नाम जोड़े जाने की कोशिशों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं।
यूपी में अपराध पर सख्त प्रहार! 9.5 वर्षों में पुलिस एनकाउंटर में 303 ढेर, 23,601 इनामी बदमाश गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ करने और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के ठोस परिणाम सामने आए हैं। राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों में अपराधियों के खिलाफ राज्यव्यापी ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभूतपूर्व कार्रवाई की गई है। इस अवधि के दौरान पुलिस एनकाउंटर में जहां 303 कुख्यात अपराधी मारे गए, वहीं 23,601 इनामी वॉन्टेड बदमाशों को सलाखों के पीछे भेजा गया।
ये आंकड़े अलग-अलग कानूनों के तहत और संगठित अपराध के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी दिखाते हैं। इनाम वाले 23,601 वॉन्टेड अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 87,835 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति ज़ब्त की गई, जबकि 995 लोगों पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाया गया।
पुलिस एनकाउंटर और वॉन्टेड अपराधी
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में साढ़े नौ साल की अवधि में पुलिस एनकाउंटर में 303 अपराधी मारे गए। ऐसे एनकाउंटर में 12,202 अपराधी घायल भी हुए।
पुलिस ने इसी दौरान इनाम वाले 23,601 वॉन्टेड अपराधियों को भी गिरफ्तार किया।
गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और संपत्ति ज़ब्ती
आंकड़ों के मुताबिक, 87,835 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने इस दौरान गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति भी ज़ब्त की।
माफिया और गैंग के खिलाफ कार्रवाई
इन आंकड़ों में पहचाने गए माफिया और गैंग से जुड़े मामले भी शामिल हैं। 68 पहचाने गए माफिया और गैंग के खिलाफ कुल 909 मामले दर्ज किए गए, जबकि इनसे जुड़े 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
NSA के मामले और साइबर अपराध पर कार्रवाई
आंकड़ों के मुताबिक, 995 लोगों के खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी एक्ट का इस्तेमाल किया गया।साइबर अपराध के मोर्चे पर, साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के तहत 874.58 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम फ्रीज़ या होल्ड पर रखी गई। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा।
यूपी में साइबर अपराध के खिलाफ हालिया कार्रवाई
ये ताज़ा आंकड़े राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई के बीच सामने आए हैं। 23 सितंबर को, हमीरपुर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने नकली KYC और सिम कार्ड रैकेट के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ़्तार किया। पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में गंवाए गए पैसे को वापस पाने की हालिया कोशिशों की जानकारी भी दी है।
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