Apples to cost more: इस साल सेब खरीदना होगा महंगा, मौसम की बेरुखी के चलते सेब के उत्पादन में 40 फीसदी तक की कमी
देश में सेब की खेती के लिए मशहूर दो प्रमुख राज्यों- जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बागवानों और उपभोक्ताओं के लिए इस बार का सीजन मायूसी भरा साबित हो रहा है। मौसम की लंबी मार और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इस वर्ष सेब के कुल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है, जिसका सीधा असर बाजार में सेब की कीमतों पर पड़ेगा और यह ग्राहकों के लिए काफी महंगा साबित होगा।
मौसम की मार से कश्मीरी और हिमाचली सेब का उत्पादन प्रभावित
जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में इस सीजन के दौरान मौसम का मिजाज बागवानी के अनुकूल नहीं रहा है। कभी अत्यधिक गर्मी, तो कभी समय पर बारिश न होने और अचानक हुई भारी ओलावृष्टि ने सेब के बगीचों को बुरी तरह तबाह कर दिया है। इन प्राकृतिक आपदाओं के कारण पेड़ों पर फल या तो टिक नहीं पाए या फिर उनका विकास ठीक से नहीं हो सका, जिसके परिणामस्वरूप कुल पैदावार में भारी गिरावट देखने को मिली है।
मंडियों में आवक घटने से कीमतों में जबरदस्त उछाल की आशंका
उत्पादन में 40 प्रतिशत तक की भारी कमी आने के कारण देश भर की प्रमुख मंडियों में सेब की आवक कम हो गई है। मांग और आपूर्ति के बीच आए इस असंतुलन के चलते व्यापारियों का मानना है कि इस सीजन में सेब की कीमतें काफी ऊंची बनी रहेंगी। त्योहारी सीजन और सर्दियों के दौरान सेब की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है, ऐसे में कम पैदावार के कारण उपभोक्ताओं को बढ़े हुए दामों पर ही सेब खरीदना पड़ेगा।
बागवानों के सामने आर्थिक संकट और चिंताएं एक तरफ जहां उपभोक्ताओं को महंगा सेब खरीदना पड़ेगा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय किसानों और बागवानों की आजीविका पर भी इसका गहरा संकट मंडरा रहा है। सालभर की कड़ी मेहनत और लागत लगाने के बाद भी फसल के बर्बाद होने और पैदावार आधी रह जाने से बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बागवानों ने सरकार से इस प्राकृतिक आपदा के बाद उचित मुआवजे और राहत पैकेज की मांग भी उठाई है ताकि इस मुश्किल दौर से निपटा जा सके।
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