गांधी जयंती पर CM भूपेंद्र पटेल ने खरीदी खादी, डिजिटल पेमेंट से दिया स्वदेशी और डिजिटल लेनदेन का संदेश
गांधी जयंती के अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को गांधीनगर स्थित खादी ग्रामोद्योग हाट पहुंचकर खादी के कपड़े खरीदे. खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने खादी की खरीदारी के लिए डिजिटल भुगतान किया. इस दौरान उन्होंने खादी को बढ़ावा देने के साथ डिजिटल लेनदेन के महत्व का भी संदेश दिया.
खादी ग्रामोद्योग हाट पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पोरबंदर के कीर्ति मंदिर में महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित सर्व धर्म प्रार्थना सभा में हिस्सा लेने के बाद गांधीनगर के खादी ग्रामोद्योग हाट का दौरा किया. यह हाट सौराष्ट्र रचनात्मक समिति की ओर से संचालित किया जाता है. मुख्यमंत्री ने यहां खादी के अलग-अलग वस्त्र खरीदे और उनका भुगतान डिजिटल माध्यम से किया. इस दौरान ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल, विधायक रिताबेन पटेल और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे.
‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ पर जोर
मुख्यमंत्री की खादी खरीदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गांधी जयंती पर खादी को बढ़ावा देने की अपील के अनुरूप रही. प्रधानमंत्री ने लोगों से खादी उत्पाद खरीदने और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आग्रह किया है. खादी को बढ़ावा देने के लिए ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ का संदेश भी दिया जाता रहा है.
गांधी के विचारों को किया याद
इससे पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पोरबंदर स्थित कीर्ति मंदिर में महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की और सर्व धर्म प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया. इस मौके पर उन्होंने सत्य, अहिंसा, सर्वोदय और भाईचारे के गांधीवादी विचारों को याद किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रार्थना आत्मचिंतन, विनम्रता और करुणा को मजबूत करती है तथा अलग-अलग धर्मों और समुदायों के बीच आपसी सम्मान, शांति और सद्भाव को बढ़ावा देती है. उन्होंने भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच एकता को देश की ताकत बताया. साथ ही, उन्होंने ‘सर्व धर्म समभाव’ के महत्व पर भी जोर दिया.
खादी को नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने खादी को युवा पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत पर भी बात की. ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ जैसे संदेशों के जरिए खादी को पारंपरिक वस्त्र के साथ आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. गांधी जयंती पर मुख्यमंत्री की खादी खरीद और डिजिटल भुगतान की पहल को खादी, स्वदेशी उत्पादों और डिजिटल लेनदेन को एक साथ बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखा गया.
UP Election 2027: अखिलेश यादव का फॉर्मूला क्लियर, कांग्रेस से कहा - पहले प्रत्याशी का नाम बताइये फिर सीट ले जाइये
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अभी से तेज हो चुकी है। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना है, लेकिन सीट बंटवारे के सटीक फार्मूले को लेकर बैठकों और मंथन का दौर जारी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल राजनीतिक सौदेबाजी या सीटों की संख्या के आधार पर समझौते के बजाय, जमीन पर मजबूत पकड़ रखने वाले 'जिताऊ चेहरों' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीटों की संख्या नहीं, 'विनबिलिटी' है अखिलेश यादव का मुख्य पैमाना
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का रुख स्पष्ट है कि गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा इस बात पर तय होना चाहिए कि कौन सी पार्टी या उम्मीदवार उस क्षेत्र में सीट निकालने का दम रखता है। उनका मानना है कि सिर्फ हवा हवाई दावों या राजनीतिक दबाव के आधार पर सीटें तय करने से गठबंधन को नुकसान हो सकता है, इसलिए 'जीत की क्षमता' ही सबसे बड़ा आधार होनी चाहिए।
कांग्रेस के सामने रखी गई सपा की चार प्रमुख शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीट शेयरिंग के इस पेच को सुलझाने के लिए सपा ने कांग्रेस के सामने चार मुख्य शर्तें रखी हैं:
- संभावित उम्मीदवारों के नाम: कांग्रेस जिन सीटों पर अपनी दावेदारी जता रही है, वहां के लिए उसे अपने मजबूत संभावित उम्मीदवारों के नाम पहले ही बताने होंगे।
- विशिष्ट सीटों की सूची: मनचाही सीटों के नाम स्पष्ट किए जाएं ताकि उनका जमीनी सत्यापन किया जा सके।
- क्षेत्रीय जनाधार का आकलन: यह देखा जाए कि उस खास विधानसभा क्षेत्र में पार्टी और उसके वर्करों का वास्तव में कितना राजनीतिक आधार है।
- जीत की शत-प्रतिशत संभावना: प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो स्थानीय समीकरणों को साधते हुए चुनाव जीतने में पूरी तरह सक्षम हो।
2024 के लोकसभा चुनावों से सीख और 2027 की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के आम चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को जो सफलता मिली थी, उसके पीछे सही सामाजिक समीकरण और मजबूत सीटों का चयन एक बड़ा कारण था। इसी रणनीति को दोहराते हुए 2027 के विधानसभा रण में भी सपा किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मैदान में उतरने वाला हर एक उम्मीदवार पूरी तरह मजबूत स्थिति में हो।
सीट संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान
जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में संगठन को विस्तार देने और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखती है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने हिस्से के समीकरणों और चुनावी गणित को ध्यान में रखते हुए सीटों के आंकड़े और मजबूत प्रत्याशियों की सूची पर सटीक संतुलन बनाना चाहती है। इस पर आगामी बैठकों में विस्तृत रूप से फैसला लिया जाना है।
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