New Engine: सुज़ुकी ने जापान में अपने नए 1.2-लीटर, तीन-सिलेंडर डायरेक्ट-इंजेक्शन टर्बो-पेट्रोल इंजन के प्रोटोटाइप की जानकारी शेयर की है। कंपनी इस इंजन को भारत समेत कई बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों को ध्यान में रखकर तैयार कर रही है। हालांकि, भारत में यह कब और किस मॉडल के साथ लॉन्च होगा, इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है। नया इंजन सुज़ुकी की ‘टेक्नोलॉजी स्ट्रैटेजी 2026: लुकिंग 10 इयर्स अहेड’ स्कीम का हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य इस 1.2-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन से अधिकतम 125 बीएचपी की पावर और 230 एनएम का टॉर्क हासिल करना है।
1.2-लीटर टर्बो इंजन में क्या खास है? सुज़ुकी इस इंजन को लॉन्च के समय करीब 40 प्रतिशत थर्मल एफिशिएंसी के लक्ष्य के साथ विकसित कर रही है। कंपनी 2035 तक इसकी थर्मल एफिशिएंसी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की योजना पर भी काम कर रही है। खास बात यह है कि यह इंजन E100, CNG और CBG जैसे अलग-अलग ईंधनों के अनुकूल बनाया जा रहा है।
यह नया इंजन कंपनी के Z12E तीन-सिलेंडर इंजन पर आधारित है। इसमें वेरिएबल-जियोमेट्री (VG) टर्बोचार्जर और वॉटर-कूल्ड इंटरकूलर जैसे तकनीकी फीचर्स दिए गए हैं। हालांकि, सुज़ुकी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस इंजन का इस्तेमाल किन कारों में किया जाएगा।
Z12E इंजन के साथ हाइब्रिड सेटअप भी तैयार सुज़ुकी Z12E इंजन पर आधारित एक सीरीज-हाइब्रिड पावरट्रेन पर भी काम कर रही है। इस सिस्टम में पेट्रोल इंजन सीधे पहियों को चलाने के बजाय जनरेटर के तौर पर काम करता है, जबकि इलेक्ट्रिक मोटर कार के पहियों को चलाती है।
इस हाइब्रिड सिस्टम में दो इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया गया है। इनमें से एक मोटर जनरेटर की भूमिका निभाती है, जबकि दूसरी ड्राइव मोटर के तौर पर काम करती है। इसमें 1.2-लीटर इंजन 81 बीएचपी तक की पावर और 108 एनएम का टॉर्क पैदा करता है। वहीं, जनरेटर मोटर की अधिकतम क्षमता 82 बीएचपी और ड्राइव मोटर की क्षमता 87 बीएचपी तक है।
इस सेटअप में 0.6 kWh की बैटरी का इस्तेमाल किया गया है। सुज़ुकी का कहना है कि वह भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजारों के लिए नई डायरेक्ट-इंजेक्शन टर्बोचार्ज्ड तकनीक पर भी काम कर रही है, जिसका उद्देश्य बेहतर क्षमता के साथ दमदार ड्राइविंग अनुभव उपलब्ध कराना है।
देशभर में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार नए नियम लागू कर रही है। अब केवल सुरक्षित ड्राइविंग करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि आपकी कार सभी अनिवार्य सुरक्षा मानकों पर खरी उतरे। कई बार वाहन चालक किसी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं करते, फिर भी चेकिंग के दौरान उनकी कार में जरूरी फीचर्स या दस्तावेजों की कमी मिलने पर चालान काट दिया जाता है। ऐसे में हर कार मालिक को यह जानना चाहिए कि किन फीचर्स का होना अनिवार्य है और उनकी अनदेखी कितनी महंगी पड़ सकती है।
HSRP और फ्यूल स्टिकर को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर आपकी कार में अभी भी सामान्य या पुरानी नंबर प्लेट लगी हुई है, तो उसे जल्द से जल्द हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) से बदलवा लेना चाहिए। HSRP में लेजर कोड, क्रोमियम आधारित होलोग्राम और यूनिक पहचान संख्या जैसी आधुनिक सुरक्षा तकनीक होती है, जिससे वाहन की सही पहचान आसान हो जाती है और फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल पर रोक लगती है।
इसके साथ ही विंडशील्ड पर रंग-आधारित फ्यूल स्टिकर भी अनिवार्य माना गया है। जांच के दौरान HSRP या फ्यूल स्टिकर नहीं मिलने पर वाहन चालक पर लगभग 5,000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
सीटबेल्ट केवल आगे नहीं, पीछे बैठे यात्रियों के लिए भी जरूरी
आज की अधिकांश नई कारों में आगे और पीछे दोनों सीटों पर थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट दी जाती है। सड़क सुरक्षा नियमों के अनुसार पीछे बैठे यात्रियों के लिए भी सीटबेल्ट लगाना उतना ही जरूरी है जितना आगे बैठे लोगों के लिए।
कुछ लोग सीटबेल्ट अलार्म को बंद करने के लिए नकली बकल या क्लिप का इस्तेमाल करते हैं, जो नियमों के खिलाफ है। यदि जांच के दौरान कोई यात्री बिना सीटबेल्ट के पाया जाता है, तो करीब 1,000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है।
ABS, रियर पार्किंग सेंसर और स्पीड अलर्ट सिस्टम भी अहम
आधुनिक कारों में एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), रियर पार्किंग सेंसर और स्पीड अलर्ट सिस्टम जैसे फीचर्स सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए दिए जाते हैं। ABS अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में वाहन का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जबकि रियर पार्किंग सेंसर पीछे मौजूद बाधाओं की जानकारी देकर दुर्घटना की संभावना कम करता है।
वहीं स्पीड अलर्ट सिस्टम निर्धारित गति सीमा पार होने पर चालक को चेतावनी देता है। इन सुरक्षा सुविधाओं को जानबूझकर हटाना, निष्क्रिय करना या किसी भी तरह से बाईपास करना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
आखिर क्यों जरूरी हैं ये सभी सुरक्षा फीचर्स?
सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए ये सभी फीचर्स केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं। HSRP वाहन की विश्वसनीय पहचान स्थापित करती है, सीटबेल्ट गंभीर दुर्घटनाओं में जान बचाने में मदद करती है, ABS वाहन को फिसलने से बचाता है, रियर सेंसर सुरक्षित पार्किंग सुनिश्चित करते हैं और स्पीड अलर्ट चालक को नियंत्रित गति बनाए रखने की याद दिलाता है।
सफर पर निकलने से पहले करें यह जरूरी जांच
यदि आप नियमित रूप से कार का उपयोग करते हैं, तो समय-समय पर अपनी गाड़ी की सुरक्षा सुविधाओं की जांच करना बेहद जरूरी है। सुनिश्चित करें कि HSRP और फ्यूल स्टिकर सही स्थिति में हों, सभी सीटबेल्ट काम कर रही हों, ABS सिस्टम में कोई खराबी न हो और पार्किंग सेंसर तथा स्पीड अलर्ट सिस्टम सामान्य रूप से कार्य कर रहे हों। थोड़ी-सी सावधानी न केवल आपको भारी चालान से बचाएगी, बल्कि सड़क पर आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।
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