Car Sales: महिंद्रा XEV 9S ने मारी बाजी, अगस्त में सबसे ज्यादा डिस्पैच हुई ये इलेक्ट्रिक कार
Car Sales: भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2026 के बिक्री आंकड़ों में भी इसकी झलक देखने को मिली है। इस महीने महिंद्रा की एक्सईवी 9एस देश में सबसे ज्यादा भेजी जाने वाली इलेक्ट्रिक कार रही। थ्री-रो वाली इस इलेक्ट्रिक एसयूवी ने टाटा पंच ईवी को महज 78 यूनिट के मामूली अंतर से पीछे छोड़ा। अगस्त 2026 में महिंद्रा ने डीलरशिप पर एक्सईवी 9एस की 4,508 कारें भेजीं। वहीं, टाटा मोटर्स ने पंच ईवी की 4,430 यूनिट डीलर्स तक पहुंचाईं। दोनों इलेक्ट्रिक कारों के बीच केवल 78 यूनिट्स का अंतर रहा।
एक्सईवी 9एस की बढ़ रही मांग
महिंद्रा एक्सईवी 9एस की मांग पिछले कुछ महीनों में मजबूत हुई है। जनवरी 2026 में इसकी ग्राहक डिलीवरी शुरू हुई थी। जुलाई 2026 में इसकी 4,131 इकाइयां भेजी गई थीं, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा बढ़कर 4,508 इकाइयों तक पहुंच गया। यानी एक महीने में इसकी डीलरशिप तक पहुंचने वाली इकाइयों में करीब 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एक्सईवी 9एस को 59 किलोवाट-घंटा, 70 किलोवाट-घंटा और 79 किलोवाट-घंटा क्षमता वाली तीन बैटरी के विकल्पों के साथ पेश किया गया है। अलग-अलग मॉडल के अनुसार कंपनी 521 से 679 किलोमीटर तक की अधिकतम दूरी तय करने का दावा करती है। इसकी शुरुआती कीमत 20.65 लाख रुपये है।
टाटा पंच ईवी की भी मजबूत मांग
अगस्त 2026 में टाटा पंच ईवी 4,430 इकाइयों के साथ दूसरे स्थान पर रही। अगस्त 2025 में इसकी 1,476 इकाइयां भेजी गई थीं। इस तरह एक साल में अगस्त की डीलरशिप आपूर्ति तीन गुने से भी ज्यादा हो गई।
टाटा पंच ईवी की शुरुआती कीमत 9.79 लाख रुपये है। वहीं, टाटा नेक्सॉन ईवी 3,975 इकाइयों के साथ तीसरे स्थान पर रही। इसकी डीलरशिप आपूर्ति में सालाना आधार पर 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अगस्त की दस सबसे ज्यादा भेजी गई इलेक्ट्रिक कारें
अगस्त 2026 में एमजी विंडसर ईवी 3,705 इकाइयों के साथ चौथे स्थान पर रही। इसके बाद टाटा हैरियर ईवी की 2,103 और महिंद्रा एक्सईवी 9ई की 2,001 इकाइयां भेजी गईं।
टाटा सिएरा ईवी 1,930 इकाइयों के साथ सातवें स्थान पर रही। वहीं, विनफास्ट लिमोग्रीन की 1,901 इकाइयां डीलरशिप तक पहुंचीं। टाटा टियागो ईवी 1,730 इकाइयों के साथ नौवें और महिंद्रा बीई 6 कुल 1,696 इकाइयों के साथ दसवें स्थान पर रही। बीई 6 की डीलरशिप आपूर्ति में पिछले साल की तुलना में 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
(मंजू कुमारी)
विश्व पृथ्वी दिवस: एमआईटी-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे में ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर हो रहा शोध, दुबई में कोप 28 सम्मेलन आयोजित
मधुरिमा राजपाल, भोपाल: आज सम्पूर्ण विश्व में ग्लोबल वार्मिंग एक प्रमुख समस्या बन गया है। जिसमें अनुमान लगाया जा रहा है कि औसत वैश्विक तापमान बढ़ेगा, जिससे ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा और पृथ्वी पर रेगिस्तानों का विस्तार होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जन-धन हानि होगी। ग्लोबल वार्मिंग की इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई शोध और अनुसंधान कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा जलवायु परिवर्तन पर आयोजित ‘कॉप सम्मेलन’ भी महत्तवपूर्ण स्थान रखता हैं। इस सम्मेलन में दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नीतियों और कार्रवाइयों पर चर्चा करते हैं। ऐसे ही जलवायु परिवर्तन पर शोध करने में पुणे में स्थित एमआईटी -वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी ग्रीन हाइड्रोजन के विस्तार पर प्रयासरत है।
गन्ने और गेंदे के फूल से ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर दिया रहा बल
हरिभूमि से बातचीत में एमआईटी में पदस्थ डॉ. भरत काले, एमेरिटस प्रोफेसर और मैटेरियल साइंस [सीओई] के निदेशक ने कहा कि एमआईटी ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर कार्य कर रही है। जिसके अंतर्गत जहां एक ओर गन्ने के बायोमास का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गन्ने को हाइड्रोजन में बदलने के लिए मीथेन पायरोलिसिस (क्रैकिंग) या थर्मोलिसिस जैसे तरीकों का उपयोग किया जाता है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती है। गन्ने से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन कम लागत वाला और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत हो सकता है, वहीं हमारी रिसर्च गेंदे के फूल से भी ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर काम चल रहा है।
दुबई में आयोजित कोप 28 सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के 15 छात्रों ने लिया भाग
वहीं उन्होंने बताया कि हाल ही में दुबई में आयोजित कॉप 28 सम्मेलन में हमारी यूनिवर्सिटी के एक दल को भाग लेने का मौका मिला। जिसमें डॉ. रत्नदीप आर जोशी के साथ यूनिवर्सिटी के 15 छात्रों के समूह ने डी-काबोर्नाइजेशन और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का मुकाबला करने के लिए ब्रांड का काम किया। स्टूडेंट्स ने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दुनिया भर में सरकारों, संगठनों और उद्योगों द्वारा की गई पहलों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
क्यों है ग्रीन हाइड्रोजन महत्तवपूर्ण
ग्रीन हाइड्रोजन पृथ्वी को संरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके बनाया जाता है और कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से विभिन्न उद्योगों और परिवहन क्षेत्रों में कार्बन मुक्त ऊर्जा प्रदान की जा सकती है।
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