Mercury Retrograde: बुध की उल्टी चाल से 3 राशियों की बढ़ेगी भागदौड़, खर्च और सेहत को लेकर रहें सतर्क
ग्रहों के राजकुमार बुध जल्द ही वक्री होने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में बुध की राशि परिवर्तन करने के साथ ही उनका मार्गी और वक्री होना भी काफी महत्वपूर्ण होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बुध की वक्री चाल कुछ राशि वालों के लिए परेशनियां बढ़ा सकता है।
इस दौरान बुध उल्टी चाल से गोचर करते हैं। इतना ही नहीं, इसका नकारात्मक प्रभाव कुछ जातकों के करियर, कारोबार और प्रेम जीवन पर देखने को मिल सकता है। इस अवधि में बनते हुए काम बिगड़ने के साथ ही जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
इस अवधि में जातक अपने फैसले सोच-समझकर लें। किसी भी काम में जल्दबाजी करने से बचें। आइए आपको बताते हैं बुध की उल्टी चाल किन राशि वालों की परेशनियों का सामना करना पड़ेगा।
कर्क राशि
इस अवधि में कर्क राशि के जातकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। यात्रा अधिक करनी पड़ सकती है और काम बनते-बनते बिगड़ जाएंगे। कार्यक्षेत्र में कुछ चुनौतियों सामने आ सकती हैं। अपने वरिष्ठ अधिकारियों और अनुभवी लोगों की सलाह की अनदेखी करने से बचें। निवेश के मौके आपके हाथ से जा सकते हैं। किसी भी काम में जल्दबाजी न करें। ऐसा करने से आपको नुकसान हो सकता है।
तुला राशि
बुध की वक्री चाल तुला राशि के लोगों के लिए भागदौड़ बढ़ा सकती है। इस अवधि में कामकाज के सिलसिले में अधिक यात्राएं करनी पड़ सकती हैं, जिससे धन खर्च बढ़ने की संभावना है। इस अवधि में वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। यात्रा के समय सामान और सेहत का खासा ध्यान रखें। आर्थिक मामले में सोच-समझकर फैसले लें और अनावश्यक खर्चों से बचें। प्रेम संबंध में गलतफहमियां पैदा होंगी।
मकर राशि
इस अवधि में मकर राशि के जातकों अपने विरोधियों से सतर्क रहने की जरुरत है। वर्कप्लेस में कुछ लोग आपकी छवि खराब करने का प्रयास करेंगे। आर्थिक मामलों और भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित फैसले भी सोच-समझकर फैसले लें। इस दौरान आपकी माता की सेहत खराब हो सकती है, जिससे आप परेशान रह सकते हैं। जल्दबाजी में किया गया निवेश या अनावश्यक खर्च आपकी परेशानियां बढ़ा सकता है। मकर राशि के जातक किसी भी प्रकार का कार्य में शॉर्टकट न लें। नियमों के उल्लंघन करने से बचें।
Pitru Paksha में तर्पण न कर पाने पर अपनाएं जल और काले तिल के ये 5 सरल उपाय
पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों के नाम से तर्पण करने से पितरों की शांति प्राप्त होती है। इस समय पितरों के नाम से रोजाना तर्पण किया जाता है। स्कंद पुराण में वर्णित है कि पितृपक्ष में पितरों के नाम से तर्पण करने के लिए एक जल में पानी भरकर उसमें काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके जल दिया जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, स्वर्ग में पितरों के लिए हर चीज उपलब्ध होती है लेकिन, वह हर किसी चीज को आसानी से नहीं पा सकते हैं। इसलिए पितरों के नाम से जल और तिल से तर्पण करने से उन्हें संतुष्टि प्राप्त होती है। ऐसे में अगर आप बार-बार तर्पण नहीं कर पा रहे हैं, तो आप जल से संबंधित कुछ उपाय आजमा सकते हैं, इससे आपके पितरों को शांति प्राप्त हो सकती है।
पितर पक्ष में करें पानी से जुड़े ये 5 उपाय
- पितृ पक्ष के समय सूर्योदय के समय रोजाना जल अर्पित करें। प्रात: स्नान करने के बाद सबसे पहले एक तांबे के लोटे में जल लें और फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके अपने पितरों को याद करते हुए उनका तर्पण करें। इसके साथ ही अपने मन में अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता और शांति की प्रार्थना जरुर करें।
- प्रतिदिन जल में काले तिल मिलाकर ही पितरों के नाम से तर्पण करें। अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। शास्त्रों में भी पितृ कर्म में तिल का विशेष महत्व माना जाता है।
- पितृ पक्ष के दौरान रोजाना पीपल के वृक्ष में जल अर्पित जरुर करें। माना जाता है कि पीपल के पेड़ में देवता और पितरों का वास होता है। पीपल के पेड़ में जल अर्पित करते हुए मन ही मन पितरों को स्मरण करते हैं।
- पितृ पक्ष में जरुरतमंदों और श्रामिकों के लिए पानी पीने की व्यवस्था करें। यह काफी पुण्यकारी सेवा मानी जाती है। किसी भी सार्वजनिक स्थान या प्याऊ या जल सेवा में सहयोग करें। भावना यह हो कि इससे किसी जीव की प्यास बुझे और सेवा का पुण्य पितरों को अर्पित करें।
- पितृ पक्ष के समय अपने घर के बाहर या छत पर पक्षियों के लिए पानी रखें और इसे नियमित रुप से बदलते रहें। गाय, कुत्ते आदि जीवों के लिए अपने जरुरत के हिसाब से जल की व्यवस्था कराएं।
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