CBSE Board Exam 2027: 24 सितंबर से LOC भरना शुरू, 10वीं-12वीं छात्रों के लिए फीस और तारीखें जारी
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026-27 सत्र की कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए LOC (List of Candidates) सबमिशन को लेकर अहम नोटिस जारी किया है।
बोर्ड के अनुसार LOC जमा करने की प्रक्रिया 24 सितंबर 2026 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। बोर्ड परीक्षा 2027 में उन्हीं छात्रों को शामिल होने की अनुमति होगी, जिनका नाम LOC में दर्ज होगा।
सीबीएसई ने स्कूलों को LOC भरते समय विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी, विषय और अन्य विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच करने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने परीक्षा शुल्क और विलंब शुल्क की तारीखों की जानकारी भी जारी की है।
24 सितंबर से शुरू होगी LOC प्रक्रिया
CBSE के अनुसार 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2027 के लिए LOC जमा करने की प्रक्रिया 24 सितंबर से 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।
भारतीय छात्रों के लिए पांच विषयों का परीक्षा शुल्क 1,600 रुपये प्रति छात्र निर्धारित किया गया है।
यदि छात्र अतिरिक्त विषय लेता है तो उसके लिए 320 रुपये प्रति अतिरिक्त विषय शुल्क देना होगा।
जो स्कूल निर्धारित समय सीमा में LOC जमा नहीं कर पाएंगे, उन्हें विलंब शुल्क के साथ LOC जमा करने का अवसर मिलेगा। 22 से 30 अक्टूबर 2026 तक 2,000 रुपये लेट फीस के साथ LOC जमा किया जा सकेगा।
चालान से शुल्क जमा करने की तारीख भी तय
CBSE ने चालान के जरिए शुल्क जमा करने की समय सीमा भी तय की है। सामान्य प्रक्रिया के तहत चालान से LOC जमा करने की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर 2026 है।
वहीं, लेट फीस के साथ चालान के जरिए LOC जमा करने की सुविधा 22 से 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।
12वीं प्रैक्टिकल परीक्षा की फीस कितनी?
कक्षा 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए भी CBSE ने अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया है।
- भारत के स्कूलों में: 160 रुपये प्रति विषय
- नेपाल के स्कूलों में: 175 रुपये प्रति विषय
- अन्य देशों के स्कूलों में: 375 रुपये प्रति विषय
CBSE ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा फीस के भुगतान से छूट देने की जानकारी भी दी है।
12वीं के छात्रों को नहीं मिलेगी माइग्रेशन सर्टिफिकेट की हार्ड कॉपी
CBSE के अनुसार इस बार भी बोर्ड की ओर से माइग्रेशन सर्टिफिकेट की हार्ड कॉपी जारी नहीं की जाएगी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कक्षा 12वीं के छात्र माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद दस्तावेज डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
LOC भरते समय इन गलतियों से बचें
CBSE ने स्कूलों को LOC जमा करने से पहले विद्यार्थियों की जानकारी को अच्छी तरह जांचने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर विद्यार्थियों और उनके माता-पिता या अभिभावकों के नाम की स्पेलिंग एडमिशन रजिस्टर के अनुसार सही होनी चाहिए।
इसके अलावा विद्यार्थी की जन्मतिथि, विषय और Subject Code की भी जांच जरूरी है। विषय का चयन संबंधित स्कीम के अनुसार होना चाहिए। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि LOC में दर्ज जानकारी के आधार पर ही आगे प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे।
इसलिए स्कूलों को LOC सबमिट करने से पहले सभी विवरणों का मिलान करने की सलाह दी गई है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
Credit card: क्रेडिट कार्ड की 30% लिमिट पार होते ही गिरेगा सिबिल स्कोर? समझें पूरा गणित
क्रेडिट कार्ड से खर्च करते समय अक्सर एक सलाह सुनने को मिलती है- अपनी क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा इस्तेमाल मत कीजिए, वरना सिबिल स्कोर खराब हो जाएगा। लेकिन क्या 30% की सीमा पार करते ही क्रेडिट स्कोर गिर जाता है? ऐसा जरूरी नहीं है। असली परेशानी तब शुरू हो सकती है, जब आप लगातार अपनी क्रेडिट लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करते हैं।
पहले समझें क्रेडिट इस्तेमाल का अनुपात क्या है
आपको कार्ड पर जितनी कुल क्रेडिट लिमिट मिली है, उसमें से कितनी रकम इस्तेमाल हो रही है, इसे क्रेडिट इस्तेमाल का अनुपात कहा जाता है।
मान लीजिए आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपए है और आपने 40 हजार रुपए खर्च किए हैं। ऐसे में आपने अपनी कुल लिमिट का 40% इस्तेमाल किया है। यह आमतौर पर सुझाए जाने वाले 30% के स्तर से ज्यादा है।
लेकिन सिर्फ एक बार 30% पार होने का मतलब यह नहीं कि आपका सिबिल स्कोर अचानक गिर जाएगा। सिबिल कम क्रेडिट इस्तेमाल करने की सलाह देता है। लगातार ज्यादा लिमिट इस्तेमाल करना आपके कर्ज से जुड़े रिकॉर्ड के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता।
2 लाख की लिमिट है तो ऐसे समझें गणित
अगर कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपए है और बकाया 60 हजार रुपए है तो क्रेडिट इस्तेमाल 30% होगा। यही बकाया बढ़कर 80 हजार रुपए हो जाए तो यह 40% हो जाएगा।
अगर ऐसा कभी-कभार होता है तो बहुत ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है। लेकिन हर महीने लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो रहा है तो इससे यह संकेत मिल सकता है कि आपकी निर्भरता उधार के पैसों पर ज्यादा है।
यह भी याद रखें कि सिबिल स्कोर केवल क्रेडिट इस्तेमाल से तय नहीं होता। समय पर भुगतान, कर्ज का रिकॉर्ड कितना पुराना है, आपके पास किस तरह के कर्ज और कार्ड हैं और आपने कितनी बार नए कर्ज के लिए आवेदन किया है, जैसे कई पहलू इसमें शामिल होते हैं।
इसलिए 35% लिमिट इस्तेमाल करके हर भुगतान समय पर करने वाले व्यक्ति का कर्ज से जुड़ा रिकॉर्ड, 20% इस्तेमाल करने लेकिन बार-बार भुगतान चूकने वाले व्यक्ति से अलग हो सकता है।
पूरा बिल भरने के बाद भी ज्यादा दिख सकता है क्रेडिट इस्तेमाल
कई लोगों को लगता है कि अगर वे हर महीने भुगतान की आखिरी तारीख से पहले क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल चुका रहे हैं तो उनका क्रेडिट इस्तेमाल हमेशा कम ही दिखेगा। जरूरी नहीं।
बैंक और कार्ड कंपनियां एक निश्चित समय पर क्रेडिट ब्यूरो को जानकारी भेजती हैं। उस समय कार्ड पर जितनी बकाया रकम दर्ज होती है, वह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई दे सकती है।
मसलन, 1 लाख रुपए की लिमिट वाले कार्ड से आपने 70 हजार रुपए खर्च किए। बाद में भुगतान की आखिरी तारीख से पहले पूरा बिल चुका दिया। इसके बावजूद अगर जानकारी भेजे जाने के समय बकाया ज्यादा था तो उस अवधि में क्रेडिट इस्तेमाल ज्यादा दिखाई दे सकता है।
क्रेडिट इस्तेमाल लगातार ज्यादा है तो क्या करें?
सबसे आसान तरीका बकाया रकम कम रखना है। आपके पास पहले से एक से ज्यादा कार्ड हैं तो सामान्य खर्च उनके बीच बांटा जा सकता है, बशर्ते आप सभी कार्ड जिम्मेदारी से संभाल सकें।
आप बैंक से क्रेडिट लिमिट बढ़ाने की मांग भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आपकी लिमिट 1 लाख से बढ़कर 2 लाख रुपए हो जाती है और खर्च 40 हजार रुपए ही रहता है तो क्रेडिट इस्तेमाल 40% से घटकर 20% रह जाएगा।
हालांकि सिर्फ क्रेडिट इस्तेमाल कम दिखाने के लिए नया कर्ज लेना या बेवजह ब्याज चुकाना समझदारी नहीं है। सबसे जरूरी है समय पर बिल भरना, बकाया काबू में रखना और लगातार उधार के पैसों पर निर्भर रहने से बचना।
इसलिए 30% को कोई पक्की सीमा न समझें। इसे सावधान होने के स्तर की तरह देखा जा सकता है। एक-दो बार इसके ऊपर जाने से घबराने के बजाय कोशिश करें कि लंबे समय तक क्रेडिट इस्तेमाल ज्यादा न बना रहे। खासतौर पर अगर जल्द ही होम लोन, कार लोन या कोई दूसरा बड़ा कर्ज लेने की तैयारी है तो कार्ड पर दर्ज होने वाली बकाया रकम कम रखना फायदेमंद हो सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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