भारत-यूएस संबंधों पर जयशंकर का बड़ा बयान: बोले- 'हमारी चिंताओं को लेकर अमेरिका गंभीर नहीं, ये समस्या है'
S Jaishankar on US: भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार से जुड़े मतभेदों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए सुरक्षा से जुड़े मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं और अगर कोई सहयोगी देश इन चिंताओं के प्रति पर्याप्त समझ या सहानुभूति नहीं दिखाता है तो इसका असर संबंधों पर पड़ सकता है।
जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद और व्यापारिक जटिलताओं को भी दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाले मुद्दों में शामिल किया।
आतंकवाद के मुद्दे पर क्या बोले जयशंकर?
जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बिना पड़ोसी देश के लंबे समय से आतंकवाद को राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने का उल्लेख किया। उनकी टिप्पणी को भारत की पाकिस्तान से जुड़ी सीमापार आतंकवाद की चिंताओं के संदर्भ में देखा गया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उनका तर्क था कि जब किसी देश के लिए कोई मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण हो और उसका सहयोगी उस चिंता को उसी गंभीरता से न देखे, तो इससे रिश्तों में समस्याएं पैदा होना स्वाभाविक है।
जयशंकर की यह टिप्पणी उनके हालिया संयुक्त राष्ट्र संबोधन के बाद आई है। 26 सितंबर को UNGA में उन्होंने आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके लिए जवाबदेही से बचने की कोशिशों का विरोध किया था तथा आतंकवाद को प्रायोजित करने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराने की बात कही थी।
भारत-अमेरिका रिश्तों में सिर्फ आतंकवाद ही मुद्दा नहीं
भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में सुरक्षा के अलावा व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका की ओर से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित कड़े टैरिफ को लेकर भारत अपनी चिंताएं पहले ही जाहिर कर चुका है।
23 सितंबर को न्यूयॉर्क में जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, मध्य पूर्व की स्थिति और रूस-ईरान से जुड़े प्रतिबंधों पर चर्चा की। भारत की ओर से रूस से तेल खरीद पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर अपनी चिंताएं रखी गई थीं।
रूस से तेल खरीद पर भी बढ़ा दबाव
अमेरिका में पारित नए कानून के तहत रूस और ईरान से आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान है। भारत उन देशों में शामिल है जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं। भारत ने इस मुद्दे पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को लेकर चिंता जताई है।
हालिया घटनाक्रम में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा भी प्रस्तावित है, जहां भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। ऐसे में सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार तीनों मुद्दे फिलहाल द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख हिस्से बने हुए हैं।
जयशंकर के बयान का क्या मतलब है?
जयशंकर के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक सहयोग के बावजूद कुछ मुद्दों पर दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। भारत आतंकवाद और अपनी सुरक्षा चिंताओं को महत्वपूर्ण मानता है, जबकि अमेरिका के साथ व्यापार और रूस से ऊर्जा खरीद जैसे आर्थिक एवं रणनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत चल रही है।
इसलिए जयशंकर का न्यूयॉर्क में दिया गया बयान केवल आतंकवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की व्यापक सुरक्षा और विदेश नीति प्राथमिकताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
Essar Steel Plant US: भारत का एस्सार ग्रुप अमेरिका में बनाएगा इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट, ट्रंप ने किया ऐलान
Essar Group US Steel Plant: भारत के एस्सार ग्रुप ने अमेरिका में स्टील उत्पादन को लेकर एक बड़ी निवेश योजना का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एस्सार ग्रुप के को-फाउंडर रवि रुइया और मेसाबी मेटालिक्स के चेयरमैन रेवंत रुइया के साथ इस प्रोजेक्ट की जानकारी साझा की।
एस्सार ग्रुप की अमेरिकी सब्सिडियरी Mesabi Metallics आयोवा में करीब 18 अरब डॉलर (लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये) के निवेश से स्टील प्लांट बनाएगी। ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बताया है।
सालाना 1 करोड़ टन स्टील बनाने का लक्ष्य
प्रोजेक्ट के पूरी तरह तैयार होने के बाद आयोवा स्थित इस प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 10 मिलियन टन यानी 1 करोड़ टन स्टील होने की उम्मीद है। कंपनी की योजना के मुताबिक यहां 2030 में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, इस परियोजना के निर्माण के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं स्टील और माइनिंग ऑपरेशंस शुरू होने के बाद करीब 2,000 स्थायी नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।
खदान से स्टील प्लांट तक तैयार होगी पूरी सप्लाई चेन
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसे अमेरिका के भीतर एक इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत मिनेसोटा की Mesabi Iron Range में विकसित की जा रही आयरन ओर खदान से कच्चा माल आयोवा के स्टील प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
Mesabi Metallics ने मिनेसोटा की इस खदान परियोजना में करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। कंपनी को उम्मीद है कि खदान से हर साल करीब 75 लाख टन लौह अयस्क का उत्पादन होगा। इस परियोजना से लगभग 350 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
रवि रुइया के साथ व्हाइट हाउस में हुआ ऐलान
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रोजेक्ट की घोषणा करते हुए इसे अमेरिका के लिए बड़े स्टील निवेश के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि आयोवा में बनने वाला प्लांट अमेरिका का सबसे बड़ा स्टील प्लांट होगा और दुनिया के बड़े स्टील प्लांट्स में भी इसकी गिनती होगी।
रेवंत रुइया ने कहा कि उनका जन्म भारत में हुआ, लेकिन उन्होंने न्यूयॉर्क, बोस्टन और कैलिफोर्निया में पढ़ाई की है। उन्होंने अपनी जिंदगी का करीब आधा हिस्सा अमेरिका में बिताया है और इस निवेश को 'घर वापसी' जैसा बताया। उनके मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के जरिए 'माइन से मिल' तक एक पूरी तरह इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन तैयार करने की कोशिश है।
अमेरिका में नई आयरन ओर माइन को लेकर भी दावा
ट्रंप ने मिनेसोटा की प्रस्तावित आयरन ओर खदान को लेकर कहा कि यह 50 से ज्यादा वर्षों में अमेरिका में खुलने वाली पहली नई लौह अयस्क खदान होगी। उनके अनुसार यहां उच्च गुणवत्ता वाला अयस्क उपलब्ध होगा।
इस प्रोजेक्ट की योजना में अमेरिका में ही आयरन ओर की माइनिंग से लेकर उसे प्रोसेस करने और स्टील बनाने तक की प्रक्रिया को जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसके जरिए कच्चे माल से तैयार स्टील तक की सप्लाई चेन को अमेरिका के भीतर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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