बांग्लादेश सरकार की भारत के खिलाफ एक बड़ी साजिश सामने आई है। भारत को दी गई एसपी जेड की भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया। एसएस की भूमि जो है वो रद्द कर दी गई है। चटगांव में 850 एकड़ जमीन का आवंटन था उसे रद्द किया गया। बांग्लादेश ने चीन को जमीन दिया है। अब बांग्लादेश में ड्रोन प्लांट जो है चीन बना रहा है। यह बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। साल के अंत तक यहां प्रोडक्शन की भी शुरुआत हो जाएगी। यहां मीडियम रेंज और वर्टिकल लिफ्ट वाले ड्रोन बनेंगे। चटगांव का प्लांट भारत की सीमा से महज 100 किमी दूर है। बांग्लादेश दक्षिण भारत एशिया में भारतपाकिस्तान के बाद ड्रोन बनाने वाला तीसरा देश बन जाएगा।
चीन अब वहां पर ड्रोन प्लांट बना रहा
बांग्लादेश की यूनुस सरकार की एक और साजिश सामने आई है। चटगांव में भारत को दी गई सेज (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) का भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया है। लगभग 850 एकड़ में अब बांग्लादेश चीन का ड्रोन प्लांट बना रहा है। साल के अंत तक यहां प्रोडक्शन भी शुरू हो जाएगा। चीन ड्रोन टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करने को भी राजी हो गया है। यहां मीडियम रेंज और वर्टिकल लिफ्ट वाले ड्रोन बनेंगे। चटगांव प्लांट भारतीय सीमा से 100 किमी दूर है। बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत-पाक के बाद ड्रोन बनाने वाला तीसरा देश बन जाएगा।
20 हजार करोड़ की जेट डील, पेमेंट 10 साल में
चीन ने बांग्लादेश को 20 जे-10सी फाइटर जेट देने की डील भी की है। ये सप्लाई भी साल के अंत से शुरू हो जाएगी। चीन ने बांग्लादेश को पेमेंट में भी बड़ी मोहलत दी है। करार के मुताबिक बांग्लादेश को इन जेट्स का लगभग 20 हजार करोड़ रुपए का भुगतान अगले 10 साल में करना होगा। बांग्लादेश का ये अब तक का किसी भी देश के साथ जेट खरीद का सबसे बड़ा सौदा है। चटगांव में बन रहे ड्रोन प्लांट में भी शुरुआती रकम चीन ने अपने खजाने से लगाई है। चीन सरकार का सैन्य उपक्रम सीईटीसी इस प्लांट का निर्माण कर रहा है। सीईटीसी ने कई अफ्रीकी देशों जैसे सोमालिया, लीबिया और मोरक्को में भी डिफेंस प्रोडक्शन यूनिट लगाई हैं
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31 जनवरी को भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक होगी। इसके लिए कई अरब देशों के विदेश मंत्री आ चुके हैं। सूडान गणराज्य के विदेश मंत्री मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम, फलस्तीन की विदेश मंत्री वर्सेन अघाबेकियन और कोमोरोस के विदेश मंत्री मोहम्मद चानफिउ पहुंच चुके हैं। इस बार बैठक की अध्यक्षता भारत और यूएई मिलकर करेंगे। अरब लीग के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्री और महासचिव इसमें भाग लेंगे। इस अहम मंच की बैठक दस साल बाद हो रही है। इससे पहले बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में इन नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी यात्रा से भारत और अरब देशों के बीच आपसी रिश्ते और मजबूत होंगे।
एलएएस में परिषद, विशेष मंत्रिस्तरीय समितियाँ, महासचिव सचिवालय और विशिष्ट एजेंसियाँ शामिल हैं। सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों से बनी परिषद प्रमुख राजनीतिक निकाय है और इसकी बैठकें वर्ष में दो बार होती हैं। प्रत्येक सदस्य देश को एक मत प्राप्त है, और निर्णय केवल उन्हीं देशों पर बाध्यकारी होते हैं जो पक्ष में मतदान करते हैं। लीग बहुमत के आधार पर निर्णय लेती है, लेकिन अनुपालन को बाध्य करने का कोई तंत्र नहीं है और आंतरिक संघर्षों तथा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सामूहिक निष्क्रियता के लिए इसकी आलोचना होती रही है। एलएएस अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ, आसियान और दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र संघ के साथ बहुपक्षीय संबंध बनाए रखती है।
चीन और एलएएस ने 2008 में आर्थिक, व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को शामिल करते हुए एक संस्थागत संवाद तंत्र स्थापित किया। लीग रूस, ब्राजील और फ्रांस के साथ भी संबंध बनाए रखती है। एलएएस के 20 से अधिक देशों में मिशन हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, ब्राजील और जर्मनी शामिल हैं, और भारत में भी इसका एक मिशन है। वर्तमान महासचिव अहमद अबुल घीत हैं।
भारत और एलएएस के बीच व्यापार, विद्वता और कूटनीति के माध्यम से प्राचीन काल से चले आ रहे दीर्घकालिक संबंध हैं। भारत और एलएएस ने मार्च 2002 में संवाद को संस्थागत रूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर दिसंबर 2008 में हस्ताक्षर किए गए और दिसंबर 2013 में इसे संशोधित किया गया।
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