दशकों पहले तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी हुई थीं करोड़ों की 3 मूर्तियाँ, अब अमेरिका इज्जत से लौटाएगा वापस: जानिए 12 साल में मोदी सरकार के नेतृत्व में कितनी धरोहरें भारत को मिलीं
अमेरिका के स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने तमिलनाडु से चोरी हुई 3 कांस्य मूर्तियों को भारत सरकार को वापस करने का निर्णय लिया है।
अमेरिका में सस्ती दवाओं के लिए वेबसाइट लॉन्च करेंगे ट्रम्प:800% तक खर्च कम होगा; 16 कंपनियों से समझौता, बदले में 3 साल का टैरिफ छूट दिया
ट्रम्प प्रशासन इस महीने 'ट्रम्प Rx' नाम की एक नई सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे कम दामों पर दवाएं खरीद सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि इस पहल से अमेरिकी लोगों के दवा खर्च को 800% तक कम किया जाएगा। अमेरिकी रेडियो NPR की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन ने पिछले साल सितंबर से अब तक 16 बड़ी दवा कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। इन समझौतों को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN)’ डील्स कहा गया। बदले में दवा कंपनियों को 3 साल तक इम्पोर्टेड दवाओं पर टैरिफ से छूट मिलेगी। यह योजना चुनावी वादों और ‘अमेरिका फर्स्ट’ हेल्थ पॉलिसी से जुड़ी मानी जा रही है। ट्रम्प का कहना है कि दूसरे अमीर देश अमेरिका में बनी दवाइयां कम कीमत पर खरीदते हैं, जबकि अमेरिकियों को इसके लिए तीन गुना ज्यादा कीमत चुकाना पड़ता है। यह प्रोग्राम सुनिश्चित करेगा कि दवा कंपनियां उसी दाम पर दवा बेचे जो बाकी देशों में मिल रही है। अमेरिकी कंपनियां को कम कीमतों पर दवा बेचना होगा अमेरिकी कंपनियां दवाओं के रिसर्च, टेस्टिंग, फैक्ट्री करोड़ों-खरबों रुपये खर्च करती है। दुनिया भर में यह दवा बेची जाती है। अमेरिका में यह दवा बहुत महंगी है, जबकि यूरोप, कनाडा, जापान जैसे अमीर देशों में वही दवा बहुत सस्ती मिलती है। दरअसल, उन देशों की सरकार कम कीमत पर दवा खरीदने की मांग करती है और ऐसा न करने पर डील रोकने का खतरा रहता है। बाजार खोने के डर से कंपनियां कम कीमत में दवाइयां मुहैया करवाती है। ट्रम्प का मानना है कि अमेरिकी लोगों के पैसे से ही नई दवाइयां बनती हैं। विदेशी देश कम पैसा देकर इसका फायदा उठाते हैं। ट्रम्प के मुताबिक वह अमेरिका की मेहनत पर 'फ्री राइड' करते हैं। इसलिए इस MFN प्रोग्राम में फैसला किया गया है कि अब अमेरिका में भी दवा की कीमत सबसे कम होगी जो किसी अमीर देश में मिलती है। कंपनियों से कहा गया कि अमेरिका को भी वही सस्ती डील दो। इससे विदेशी देशों को भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी, जैसे ब्रिटेन के साथ हुए समझौते में नई दवाओं की कीमत 25% बढ़ाई गई है। अमेरिकी मरीजों को दवाएं सस्ती मिलेंगी, कंपनियों का एक्स्ट्रा पैसा अमेरिका वापस आएगा और देश में दवा बनाने का काम बढ़ेगा। दवा कंपनियां ट्रम्पRx से क्यों डरी हुई हैं वेबसाइट की लॉन्च इवेंट पोस्टपोन हुई रिपोर्ट्स के अनुसार 30 जनवरी 2026 को एक लॉन्च इवेंट रखा गया था। लेकिन अब इस इवेंट को पोस्टपोन कर दिया गया है। वेबसाइट पर अभी भी ‘जल्द आएगा’ लिखा दिख रहा है। योजना के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर अभी पूरी सहमति नहीं बनी है। दवा कंपनियों, बीमा सेक्टर और राज्यों की तरफ से कई आपत्तियां सामने आई हैं। हालांकि, सरकार भी नहीं चाहती कि आधी-अधूरी तैयारी के साथ योजना लॉन्च हो। इसी वजह से व्हाइट हाउस ने ट्रम्पRx के लॉन्च इवेंट को अभी पोस्टपोन कर दिया है। योजना रद्द नहीं हुई है। जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कंपनियों के साथ समझौते की तैयारी ट्रम्प ने दावा किया कि यह अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा में मरीजों के लिए अब तक की सबसे बड़ी जीत है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर अमेरिकियों की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कई लोग इंश्योरेंस से पहले से ही कम पैसे में दवाएं ले रहे हैं। ट्रम्प ने पहले कई बार दवा भारी टैरिफ की धमकी दी थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया। अभी अब्बवी, जॉनसन एंड जॉनसन और रेजेनेरॉन जैसी तीन बड़ी कंपनियां समझौते से बाहर हैं। ट्रम्प ने कहा कि जल्द ही जॉनसन एंड जॉनसन समेत कुछ और कंपनियां कीमत कम करने का ऐलान करेंगी। पुरानी बीमारी से जूझ रहे मरीजों को फायदा होगा इस प्रोग्राम से उन अमेरिकी मरीजों को फायदा होगा जो पुरानी और खर्चीली बीमारियों जैसे टाइप 2 डायबिटीज, गठिया, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, दमा, COPD, हेपेटाइटिस B और C, HIV, कैंसर और हृदय रोगों से पीड़ित हैं। मेडिकेड और मेडिकेयर लाभार्थी सीधे MFN कीमतों का लाभ उठा सकेंगे। इससे राज्य मेडिकेड प्रोग्रामों में अरबों डॉलर की बचत होगी और कमजोर वर्ग को बेहतर सहायता मिलेगी। TrumpRx.gov के जरिए बिना इंश्योरेंस वाले या कैश पेइंग मरीज सस्ती दवाएं खरीद सकेंगे। इसके अलावा, GLP-1 दवाओं जैसे ओजेम्पिक (टाइप 2 डायबिटीज के लिए दिया जाने वाला इंजेक्शन) और वेगोवी (मोटापा कम करने के लिए) के यूजर्स को भी लाभ मिलेगा, जहां कीमतें $1000 से घटकर $350 हो गई हैं। यह प्रोग्राम अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करेगा। 8 करोड़ से ज्यादा लोगों को मेडिकल सुविधाएं देता अमेरिका अमेरिका में गरीब या कम आय वाले लोगों को मेडिकेड नाम का सरकारी प्रोग्राम मेडिकल फैसिलिटी और हेल्थकेयर प्रदान करता है। यह एक जॉइंट फेडरल और स्टेट प्रोग्राम है जो फ्री या बहुत कम खर्च वाली हेल्थ कवरेज देता है। यह बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, डिसेबल्ड लोगों, और कम आय वाले परिवारों को कवर करता है। 2026 में यह करीब 8 करोड़ से ज्यादा लोगों को कवर कर रहा है, जिसमें से ज्यादातर गरीब परिवार हैं। मेडिकेड में अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर के पास जाना, दवाइयां, लैब टेस्ट, प्रेग्नेंसी केयर, बच्चों की वैक्सीनेशन, और लॉन्ग-टर्म केयर जैसी सेवाएं शामिल होती हैं। कई मामलों में यह पूरी तरह फ्री होती है, या बहुत कम को-पेमेंट होता है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें…. अमेरिका में जन्मे बच्चों को ₹92 हजार देंगे ट्रम्प: निवेश में बैंक-टेक कंपनियां भी शामिल; 18 साल के होने पर पढ़ाई-बिजनेस में इस्तेमाल कर सकेंगे अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को सरकार की ओर से 1,000 डॉलर (92 हजार रुपए) दिए जाएंगे। यह रकम बच्चों के नाम से खोले जाने वाले एक स्पेशल अकाउंट में जमा की जाएगी। यह योजना पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरू की थी। पूरी खबर पढ़ें…
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