अनूपपुर में EVM गायब मिलने से सियासी बवाल, कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग, पढ़ें पूरी खबर
देश में एक ओर लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाने की बात कह रहे हैं। तो वहीं, मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले से EVM से जुड़ा एक मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहडोल संभाग के अनूपपुर में EVM मशीनों के गायब होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मामले को लेकर अब जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और EVM के रखरखाव एवं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
बता दें कि अनूपपुर में पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने EVM वेयरहाउस से 24 EVM मशीनें गायब मिली हैं। इनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। इस मामले में सियासी बवाल शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी के नेता एवं कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने हाथों में EVM चोर गद्दी छोड़ के बैनर और जुबां पर तीखे सवाल लेकर सरकार को घेरा एवं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की
बता दें कि इस मामले में अनूपपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष गुड्डू सिंह चौहान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि अनूपपुर में EVM को लेकर जो सवाल और शंकाएं सामने आई हैं, उनका जवाब निष्पक्ष जांच के जरिए मिलना चाहिए। लोकतंत्र में जनता के वोट और जनादेश की पवित्रता सर्वोपरि है। गुड्डू सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह की अनियमितता को लेकर चुप नहीं बैठेगी। पार्टी की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और वास्तविकता जनता के सामने लाई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर निर्वाचन जैसी संवेदनशील सामग्री वेयरहाउस से गायब कैसे हो गई? मामला सामने आने के बाद अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब गायब मशीनों के सीरियल नंबर, रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और वेयरहाउस से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मशीनें आखिरी बार कहां दर्ज थीं और वे कब से गायब हैं।
क्या है पूरा मामला?
अनूपपुर के पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने EVM वेयरहाउस से 24 मशीनें गायब मिलने का मामला सामने आया है। इनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल बताई जा रही हैं। वहीं, 20 अगस्त को ठेकेदार ने खुले में पड़ी EVM की सूचना तत्कालीन SDM को दी थी। वेयरहाउस की पिछली दीवार टूटी होने से इसी रास्ते से मशीनें बाहर ले जाने की आशंका जताई जा रही है। 21 सितंबर को EVM को नए तहसील कार्यालय में शिफ्ट किया गया था। 24 से 28 सितंबर के बीच सत्यापन में 24 EVM कम मिलीं, हालांकि मशीनें कब और कैसे गायब हुईं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। एक शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि अनूपपुर में EVM चोरी की खबर ऐसे समय सामने आई है जब मध्य प्रदेश में 29 सितंबर को पंचायत उपचुनाव के तहत 103 पदों पर मतदान हुआ था। इन पदों में 79 सरपंच, 15 जनपद पंचायत सदस्य, 5 जिला पंचायत सदस्य और 4 पंच पद शामिल थे। प्रदेश में पंचायत उपचुनाव की प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग पदों पर मतदान कराया गया था। अनूपपुर जिले की बात करें तो चार जनपद पंचायतों में 13 पंच पदों के लिए चुनाव होना था। इनमें 10 पदों पर मतदान हुआ, जबकि 3 पद खाली रह गए। पुष्पराजगढ़ क्षेत्र की बिजौरा वार्ड-3, बेंदी वार्ड-18 और गिरारी वार्ड-10 सीटों पर एक भी नामांकन नहीं आया था। इसी बीच पुराने EVM वेयरहाउस से मशीनों के गायब होने का मामला सामने आया है।
पश्चिम बंगाल ने प्राइवेट अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति रोकने के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए
कोलकाता, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। फर्जी प्रमाणपत्रों और फर्जी पंजीकरण संख्याओं का इस्तेमाल करके चिकित्सा करने वाले लोगों की खबरों के बीच पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने राज्य भर के निजी चिकित्सा संस्थानों में फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, किसी भी निजी चिकित्सा संस्थान को नियुक्ति करने से पहले संबंधित डॉक्टरों की पंजीकरण संख्याओं का सत्यापन करना होगा।
पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण, विनियमन और पारदर्शिता) नियम, 2017 के नियम 7(4) के अनुसार निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी दस्तावेजों का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अक्सर, कई व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर वैध पंजीकरण संख्या या प्रैक्टिस करने की अनुमति के बिना प्रैक्टिस करते हैं। इससे आम लोग भ्रमित हो जाते हैं। इसलिए, हमने लाइसेंसिंग अधिकारियों से इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए सतर्क रहने को कहा है।
साथ ही, उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी चिकित्सक की पहचान, शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण या चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के अधिकार के बारे में कोई संदेह हो, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए। अधिकारी ने कहा कि ऐसे संदेह की स्थिति में संबंधित डॉक्टर की योग्यता की पुष्टि करने के लिए तुरंत पश्चिम चिकित्सा परिषद का ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए।
अंत में, यदि कोई व्यक्ति फर्जी पहचान के साथ या बिना पंजीकरण और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकृत हुए बिना चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी और संबंधित व्यक्तियों को कड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी।
इस मुद्दे को सबसे पहले निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के संघ ने उठाया था, जिसने निजी स्वास्थ्य सुविधाओं द्वारा वैध पंजीकरण के बिना व्यक्तियों को नियुक्त करने के मामलों को उजागर किया था। संघ ने ऐसे मामलों की ओर भी इशारा किया जहां ऐसे व्यक्ति निजी क्लीनिकों के माध्यम से स्वतंत्र रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे थे।
संघ ने राज्य सरकार और चिकित्सा परिषद से अनधिकृत चिकित्सकों द्वारा मरीजों के जीवन को खतरे में डालने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह किया था। राज्य में चिकित्सा चिकित्सकों के एक प्रमुख संगठन, पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम, ने भी नए दिशानिर्देशों का स्वागत किया है।
--आईएएनएस
एमएस/
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