सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल के पानी से पेट दर्द:गंभीर संक्रमण की शिकायत; सरकार ने कहा- 21 बार जांच हुई; सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये आदेश
जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद सोनम वांगचुक की तबीयत खराब हो गई है। लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक ने जेल के दूषित पानी की वजह से पेट में गंभीर संक्रमण और दर्द की शिकायत की है। वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर जेल प्रशासन को विशेषज्ञ से जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं सरकार ने कहा कि उनकी अब तक 21 बार जांच हो चुकी है। वांगचुक को एनएसए के तहत सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने गुरुवार को हुई सुनवाई में जेल प्रशासन को आदेश दिया कि वांगचुक की जांच सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) से कराई जाए। कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट 2 फरवरी तक पेश करने का निर्देश दिए। 21 बार हुई सामान्य जांच, कोर्ट ने कहा- यह काफी नहीं सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने तर्क दिया कि वांगचुक की नियमित जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि चार महीनों में जेल के डॉक्टरों ने 21 बार उनकी जांच की है और आखिरी चेकअप 26 जनवरी को हुआ था। इस पर वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा- जेल के पानी से उन्हें लगातार पेट दर्द हो रहा है। सामान्य फिजिशियन की जांच पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने सिब्बल की दलील मानते हुए कहा कि मरीज की मांग के अनुसार उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा मिलनी चाहिए। चुनौती: ‘हिरासत का आदेश पुलिस रिपोर्ट का हूबहू कॉपी-पेस्ट’ डॉ. गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका पर बहस करते हुए कपिल सिब्बल ने वांगचुक की हिरासत को पूरी तरह अवैध बताया। उन्होंने कोर्ट के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य रखे: दिमाग का इस्तेमाल नहीं: सिब्बल ने कोर्ट को हिरासत का आदेश और एसएसपी की सिफारिश की प्रतिलिपि दिखाते हुए इसे 'कॉपी-पेस्ट' बताया। सिब्बल के अनुसार एसएसपी की रिपोर्ट का पहला पन्ना और हिरासत आदेश का पन्ना शब्दशः एक जैसा है। यह साबित करता है कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी ने अपनी विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। पुराने और बेबुनियाद केस: सिब्बल ने कहा कि वांगचुक पर लगाए गए आरोप वर्ष 2024 की पुरानी एफआईआर पर आधारित हैं। इनमें से 5 में से 3 मामले पुराने हैं और अधिकतर 'अज्ञात व्यक्तियों' के खिलाफ हैं। सितंबर 2025 की हिंसा के बाद दर्ज ताजा एफआईआर में वांगचुक का नाम तक नहीं है। ‘देशभक्ति और राजनीति को न मिलाएं’ सरकार की ओर से आरोप लगाया गया था कि वांगचुक ने कहा था कि "लद्दाख के लोग युद्ध के समय भारतीय सेना की मदद नहीं करेंगे।" कपिल सिब्बल ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए इसे ‘फैलाया गया झूठ' बताया। सिब्बल ने कहा- वांगचुक ने इसके ठीक विपरीत बात कही थी। उन्होंने कहा था कि युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को सेना के साथ खड़े होने की जरूरत है। उन्होंने सिर्फ यह अपील की थी कि हमारी राजनीतिक मांगों की नाराजगी को 'भारत माता की रक्षा' के बीच में नहीं लाना चाहिए।" सिब्बल ने कहा कि उनके बयानों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, ताकि उन्हें राष्ट्र विरोधी साबित किया जा सके। सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि हिरासत के आधार तय करते समय वांगचुक के 24 सितंबर के उस महत्वपूर्ण भाषण को जानबूझकर हटा दिया गया। इसमें उन्होंने अनशन तोड़ा था और हिंसा भड़कने के बाद लोगों से शांति की अपील की थी। हिरासत प्राधिकारी के सामने केवल चुनिंदा भड़काऊ सामग्री ही रखी गई। सितंबर 2025 से जेल में हैं वांगचुक सितंबर 2025 में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें लद्दाख से शिफ्ट कर जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उनकी पत्नी ने इस हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर अगली सुनवाई मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद होगी।
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